Home विशेष विशेष लेख: डिजिटल सशक्तिकरण- भारत की बदलती तस्वीार देखने का अधिकार

विशेष लेख: डिजिटल सशक्तिकरण- भारत की बदलती तस्वीार देखने का अधिकार

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हरएक सरकार जनता की सेवा करने और देश को रहने योग्‍य बेहतर जगह बनाने के वादे के साथ सत्‍ता में आती है। अगर यह वादा भ्रष्‍टाचार और अकर्मण्‍यता की वजह से टूटता है तो देश के नेतृत्‍व पर से जनता का भरोसा उठ जाता है और लोग जवाब मांगने लगते हैं। चुनावों में जनता खुद ही सरकार को जवाब दे देती है और इसके बाद लोगों की उम्‍मीदें नयी सरकार पर टिक जाती हैं। इसी तरह के आक्रोष और अपेक्षाओं भरे माहौल में नरेन्‍द्र मोदी सरकार सत्‍ता में आयी थी। 2014 के चुनाव से पहले भारत ने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ संघर्ष को जनांदोलन बनते देखा। ईमानदार सरकार के लिए जनता के आंदोलन की परिणति श्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रधानमंत्री के पद पर आसीन होने के रूप सामने आयी है। जनता ने उनपर भरोसा किया क्‍योंकि लोगों ने यह परख लिया था कि वह जो कहते हैं उसपर दृढ़तापूर्वक अमल करके पूरा भी करते हैं। श्री मोदी ने अपनी सरकार के लिए जो लक्ष्‍य निर्धारित किये हैं वे हैं: अतीत के कूड़े की सफाई, अपने वादों पर अमल और सरकारी संस्‍थाओं पर जनता के भरोसे का फिर से कायम करना।

2014 में जनता ने उस व्‍यवस्‍था को नकार दिया था जिसमें पर्दे के पीछे निर्णय लिये जाते थे और उनकी धुंधली-सी झलक ही ‘सूचना के अधिकार’ (आरटीआई) के जरिए जनता को देखने को मिल पाती थी। आरटीआई से लोगों के लिए सरकार के कामकाज की ठीक से निगरानी करना मुमकिन नहीं था। दरअसल जनता के अधिकार की बजाय आरटीआई एक ऐसा विशेषाधिकार बन गया था जो प्रक्रिया संबंधी पचड़ों को ठीक से न जानने वाले बहुत से नागरिकों की पहुंच से बहुत दूर था। जनता को सरकारी कार्य के पूरा हो जाने के बाद ही अजमाये जा सकने वाले हक की जरूरत नहीं थी, बल्कि ऐसे अधिकार की आवश्‍यकता थी जो कामकाज में चौबीसों घंटे पारदर्शिता का मौका देता हो। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दिशानिर्देश में विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और खान मंत्रालयों ने अपने निर्णयों, लक्ष्‍यों और प्रगति को मोबाइल एप के जरिए डिजिटल रूप में पेश करने का इंतजाम किया है। इस तरह ये मंत्रालय ‘बदले हुए भारत के अधिकार’ के बारे में प्रधानमंत्री के वादे को पूरा कर रहे हैं।

अन्‍य साधनों के साथ-साथ हम यूजर फ्रैंडली यानी आसानी से इस्‍तेमाल किये जा सकतने वाले मोबाइल एप के जरिए काम-काज में पारदर्शिता लाने में सफल रहे हैं। आज हमारी तमाम गतिविधियां लोगों के मोबाइल पर उपलब्‍ध हैं। अगर आप अपने जिले में ऐसे गांवों के बारे में जानना चाहते हैं जहां बिजली नहीं पहुंची है तो आपको GARV पर लॉगइन करना होगा। आपकी बिजली कंपनी द्वारा चुकाए जा रहे बिजली के दामों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए आप MERIT पर लॉगइन कर सकते हैं। अगर आपको इस बात की चिंता सता रही है कि आपके इलाके में अगली बार बिजली कब गुल होगी तो बिजली जाने से पहले ही ‘ऊर्जा मित्र’ आपको पहले ही इसकी सूचना दे देगा।

TAMRA और TARANG विभिन्‍न परियोजनाओं और उनके लिए सरकार से मिली स्‍वीकृतियों की स्थिति पर नजर रखते हैं। इनके जरिए जनता परियोजनाओं में आ रही अड़चनों के बारे में सरकार की जवाबदेही तय कर सकती है। यह एक तथ्‍य है कि 2014 से पहले खानों और खदानों की नीलामी करीब-करीब बंद हो चुकी थी। पिछले तीन वर्षों में सरकार को खनिज उत्‍पादन करने वाले राज्‍यों के 29 खनन ब्‍लॉकों की बकाया लीज अवधि के दौरान 1।22 लाख करोड़ रुपये से अधिक के राजस्‍व की आमदनी हुई है। TAMRA एप से इसे और बढ़ाने में मदद मिलेगी। परियोजनाओं की समय पर समाप्ति सुनिश्चित करके TARANG एप ने हमारे विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क के तेजी से विस्‍तार में भूमिका निभाई है। वर्ष 2014-17 की अवधि के दौरान चालू की जा चुकी परियोजनाओं की लागत वर्ष 2011-12 के दौरान चालू की गयी परियोजनाओं की लागत से 83 प्रतिशत अधिक रही है। इतना ही नहीं 2014-17 के दौरान भारत की विद्युत ट्रांसमिशन क्षमता में 40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

2015 के स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के राष्‍ट्र के नाम संदेश से जनता के मन में बिजली की सुविधा से वंचित देशावासियों के प्रति गहरी संवेदना जगी है। प्रधानमंत्री ने 1,000 दिन के अंदर देश के सबसे दूर-दराज के गांव को भी विद्युतीकृत कर देने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इस भगीरथ प्रयास को पूरा करने में जनहित की भावना की बड़ी प्रेरणा रही है। GARV एप ने विद्युतीकरण की दिशा में ग्रामवार प्रगति रिपोर्ट प्राप्‍त करने के लिए एक मंच उपलब्‍ध कराया और अब GARV II ने उससे भी आगे बढ़कर और परिवार वार आंकड़े उपलब्‍ध कराकर उसे भी पछाड़ दिया है। पारदर्शिता से हमें बड़ा फायदा हुआ है क्‍योंकि जब जनता पड़ताल करने लगती है तो ‘स्‍पीड, स्किल एंड स्‍केल’ (यानी ‘रफ्तार, हुनर और पैमाने’) के मंत्र में नयी ऊर्जा का संचार हो जाता है। जनता और जन-संचार माध्‍यमों के जरिए जो जानकारियां मिलती हैं, हम उन्‍हें बहुत अधिक महत्‍व देते हैं। GARV से जनता के धन के अपव्‍यय को रोकने में मदद मिली क्‍योंकि इस पर पत्रकारों ने आबादी से रहित गांवों के बारे में जानकारी दी थी। GARV केवल बिजली से वंचित गांवों की सूची ही नहीं दिखाता है, बल्कि इसने आंकड़ों को और अधिक उद्देश्‍यपूर्ण बनाते हुए गांवों में इम्‍पैक्‍ट स्‍टडी (यानी विद्युतीकरण के प्रभाव का अध्‍ययन) का कार्य भी किया है। ग्रामीण विद्युतीकरण का व्‍यावहारिक स्‍तर पर असर गांवों में आटा चक्कियों, तरह-तरह के उपकरणों आदि के उपयोग के रूप में देखा जा सकता है।

इससे पहले बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली की खरीद में भारी भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त था, MERIT और विद्युत प्रवाह नाम के एप ने मनमानी खत्म की है और लागतों में कमी ला दी है। अगले पांच वर्षों में MERIT के जरिए बिजली खरीद की लागत में 20,000 हजार करोड़ की बचत होने की संभावना है जिसका फायदा बिजली बिलों के जरिए आम उपभोक्‍ताओं तक पहुंचेगा। UDAY और URJA तो एक कदम और आगे बढ़ गये हैं और कई मानदंडों पर राज्‍यों/शहरों/वितरण कंपनियों की कारगुजारी का मूल्‍यांकन कर रहे हैं।

UJALA नाम का एप तो एलईडी बल्‍बों का सबसे तेजी से इस्‍तेमाल सुनिश्चित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चित इस एप के पीछे एक कहानी है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने जब 204 कोयला ब्‍लॉकों का आबंटन रद्द कर दिया तो कोयला ब्‍लॉकों की नीलामी की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक के अंत में माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मुझ से पूछा कि अब तक कितने एलईडी बल्‍ब लोगों को बांटे जा चुके हैं। मेरे पास उस वक्‍त ताजा आंकड़े नहीं थे इसलिए मैंने कहा कि मैं देखकर बाद में आपको बताऊंगा। उसी वक्‍त प्रधानमंत्री ने मुझे अच्‍छे परिणाम हासिल करने के लिए नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा करते रहने और कार्यनिष्‍पादन के लिए जिम्‍मेदारी तय करने की याद दिलाई। मैंने तत्‍काल अपनी टीम को एक ऐसा इंटरनेट पोर्टल तैयार करने का निर्देश जिसमें कोई भी व्यक्ति, कहीं भी और किसी भी जगह से जनता को बांटे गये बल्‍बों के बारे में जानकारी हासिल कर सके। लेकिन इससे सिर्फ एलईडी बल्‍बों की संख्‍या का ही पता नहीं चलता, बल्कि इस तरह के बल्‍बों के उपयोग से कार्बन डाई ऑक्‍साइड के उत्‍सर्जन में आई कमी, बिजली की बचत और बिजली बिलों में आई कमी से आम जनता के फायदे का भी अंदाजा लगाया जा सकता है। असल में यह एप इतना लोकप्रिय हो गया कि एलईडी बल्‍बों की बिक्री की योजना को देश भर में चलाने और इनके बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने में भी इससे अपूतपूर्व सफलता मिली।

खानों के अंदर क्‍या होता है इसकी जानकारी देनेवाले माइनिंग सर्विलेंस सिस्‍टम यानी MSS एप से अवैध खनन के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। इसी तरह कोल मित्र एप सबसे दक्षतापूर्वक कार्य कर रहे ताप बिजलीघरों का पता चलता है। ARUN एप से जानकारी हासिल कर छत पर सोलर प्रणाली खुद लगाने के साथ-साथ सरकार द्वारा इसके लिए दिये जा र‍हे प्रोत्‍साहन, इसकी लागत, स्‍थापना के तरीके आदि के बारे में भी जानकारी मिलती है। इससे उन बाधाओं को दूर किया जा सकता है जिनके कारण भारत में छत पर सोलर प्रणालियां लगाने का अभियान क्रांति का रूप नहीं ले पा रहा है।

जितने ज्‍यादा एप उतना ही ज्‍यादा उनको डाउनलोड करने का झंझट! आखिर इस भीड़ में से अपने मतलब के एप को कैसे खोजा जाएॽ जनता को किस तरह से यह बताया जाए कि इस-इस तरह के एप मौजूद हैंॽ इसके लिए आपको सिर्फ यह करना है कि 1-800-200-300-4 नंबर पर मिस्‍ड कॉल करें। यह एक साझा नंबर है जिससे कॉल करने वाले को एक लिंक भेजा जाता है जिससे अपने मतलब का एप डाउनलोड किया जा सकता है।

जनता को अपने कामकाज की पड़ताल में भागीदार बनाकर और रीअल टाइम डेटा को सार्वजनिक करके विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और खान मंत्रालयों ने सरकारी संस्‍थाओं पर जनता का भरोसा फिर से कायम करने का बीड़ा उठाया है। ‘तमसो मा ज्‍योतिर्गमय’ (अंधकार से प्रकाश की ओर जाने में हमरा पथप्रदर्शन करो)—यह सुंदर और प्रेरणास्‍पद आदर्शवाक्‍य इन सभी मंत्रालयों के कर्मचारी गणों को राह दिखाता है। इन एप्‍स के जरिए हम गोपनीयता और भ्रष्‍टाचार का अंधेरा हटाना चाहते हैं और ईमानदारी के उजाले की तरफ अग्रसर होकर 125 करोड़ भारतीयों की सेवा के लिए अपने आप को समर्पित करते हैं।

-पीयूष गोयल
विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और खान मंत्रालयों के मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)

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