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पांच साल में वाराणसी बन गया देश का आदर्श संसदीय क्षेत्र

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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लोकसभा चुनावों के लिए 19 मई को मतदान होना है, लेकिन यहां चुनावी नतीजे को लेकर कोई संशय नहीं है। इसका कारण केवल मोदी का प्रधानमंत्री होना नहीं है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि पीएम ने पिछले पांच सालों में वाराणसी की तस्वीर बदल कर रख दी है। विकास में पिछड़े और गंदगी से भरा वाराणसी पांच साल में देश का आदर्श संसदीय क्षेत्र बन गया है। पहली बार देखने को मिला है कि बनारस की चर्चा वहां हुए विकास को ले कर हो रही है। अव्यवस्था और गंदगी के बीच रहने को मजबूर काशीवासियों ने बीते पांच साल में यहां का कायाकल्प होते देखा है। यहां शुरू हुए प्रोजेक्ट्स में काशी को जापान की धार्मिक नगरी क्योटो की शक्ल देने की जिद है, स्मार्ट सिटी बनाने का जज्बा है और देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने का स्वप्न भी है।

बनेगा जीत के अंतर का रिकॉर्ड
90 के दशक से वाराणसी बीजेपी के लिये एक सुरक्षित सीट मानी जाती है लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बनारस की जनता से पिछले 5 वर्षों में किये गये कार्यों के आधार पर वोट मांगे हैं। 19 मई को होने वाले मतदान से ये बात तय हो जायेगी कि बनारस की जनता अपने सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कितनी खुश है. वैसे इसकी एक छोटी सी झलक 25 अप्रैल को हुए नरेन्द्र मोदी के रोड शो में मिल चुकी है लेकिन बनारस के लोगों का ये दावा है कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ देंगे और उनकी जीत का अंतर बढ़ जाएगा।

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वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी में 5 लाख 81 हज़ार वोट मिले थे। उन्होंने अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार वोटों से हराया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 5 वर्षों में 19 बार वाराणसी का दौरा किया है और अपने ज्यादातर दौरों में उन्होंने बनारस को कुछ ना कुछ दिया है। 

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इन प्रोजेक्ट्स ने बदली काशी की तस्वीर

  • विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट के बीच में काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर।
  • इलाहाबाद से हल्दिया के बीच शुरू गंगा परिवहन योजना में कार्गो हब बनेगा काशी।
  • 2016 में काशी स्वच्छ शहरों की रैकिंग में 65वें स्थान पर था, 2018 में 29वें स्थान पर।
  • ऊर्जा गंगा प्रोजेक्ट के तहत गेल द्वारा डीजल रेल कारखाना परिसर में पीएनजी पाइपलाइन।
  • शहर में लटकते बिजली के तारों और उनके जाल को हटाने के लिए आईपीडीएस परियोजना।
  • हृदय योजना के तहत यहां की धरोहरों, ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और संवर्धन का काम।
  • अटल इंक्यूबेशन सेंटर, नागेपुर ग्राम पेयजल योजना सहित 600 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट।

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