Home नरेंद्र मोदी विशेष नोटबंदी से टूटी अपराध की कमर

नोटबंदी से टूटी अपराध की कमर

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प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने नोटबंदी का निर्णय लेते समय जिन परिणामों की अपेक्षा की थी, वस्तुस्थिति उस से भी अधिक सकारात्मक रही। भ्रष्टाचार के समूल उन्मूलन और कालेधन की पहचान के लक्ष्य के साथ लागू की गई नोटबंदी ने अपने पहले ही वर्ष में मानव तस्करी और अवैध देह व्यापार, नक्सलवाद, आतंकवाद तथा छोटे बच्चों का तस्करी व लड़कियों के शोषण तथा उनकी खरीद-फरोख्त जैसे धंधों की कमर तोड़ कर रख दी है। कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा हुए सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है। आइए, इसी विषय से जुड़े कुछ और पक्षों व लाभों के बारे में जानें-

देशवासियों का विश्वास मोदी सरकार के साथ

अत्यंत कठोर निर्णय होने के बावजूद अगर देश के 87 प्रतिशत लोग ‘नोटबंदी’ के परिणाम से संतुष्ट हों, 92 प्रतिशत लोग यह कहें कि उन्हें कम नगदी होने के फायदे अधिक मिले हैं और 81 प्रतिशत इस बात के लिए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार को दोषी मानें कि उन्होंने कभी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी निर्णय लेने का साहस ही नहीं जुटाया तो ये सभी बातें सिद्ध करती हैं कि नोटबंदी मोदी सरकार द्वारा लिया गया एक दूरदर्शितापूर्ण निर्णय था। इसमें कोई दोराय नहीं कि इस निर्णय से देशवासियों को कुछ समय तक थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था, परंतु फिर भी देशवासी इस निर्णय में मोदी सरकार के साथ डटकर खड़े रहे। इसके पीछे उनका यही विश्वास काम कर रहा था कि यह जो कुछ भी किया जा रहा है, उसके पीछे की मंशा केवल और केवल देशहित है। वैसे भी दशकों से भ्रष्टाचार की जो दीमक इस देश की व्यवस्था की जड़ों को लग चुकी थी, उसका समूल नाश करने में थोड़ी कठिनाई तो आनी ही थी।

अपराधों पर हुआ कठोर आघात

नोटबंदी से हुए लाभों के बारे में जो दावे सरकारी तौर पर किए गए हैं, ‘प्रथम’ चैरिटी जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं ने उन दावों की पुष्टि की है। प्रथम बाल-श्रम और बाल-तस्करी के विरुद्ध सामाजिक रूप से सक्रिय सामाजिक संस्था है। उसके अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान आदि स्थानों से बड़ी संख्या में बच्चों को लाकर उन्हें अवैध रूप से काम-धंधों पर लगा दिया जाता था, जिनमें उनका बुरी तरह से शोषण होता था। यह सारा काम पूरी तरह से नगद लेन-देन पर ही आधारित होता था। नोटबंदी ने इस अवैध और अमानवीय कारोबार की कमर तोड़ कर रख दी। यही स्थिति लड़कियों की खरीद-फरोख्त करके उन्हें जबरन देह व्यापार जैसे धंधों में झोंक दिए जाने वाले कारोबार पर भी बनी हुई है। इनके अतिरिक्त नक्सलवाद और आतंकवाद पर भी नोटबंदी ने कुठाराघात किया है। इस तरह से जितना भी धन अवैध रूप से इन सब जगहों पर लगा हुआ था, उस पर लगाम लगी। उदाहरण के तौर पर कश्मीर में होने वाली पत्थरबाजी जैसी घटनाओं में 75 प्रतिशत की कमी आई तथा नक्सलवाद में भी 20 प्रतिशत की गिरावट देखने की मिली।

कालाधन पर कसा शिकंजा

नोटबंदी द्वारा हुए लाभों में से सबसे बड़ी सफलता कालाधन पर शिकंजा कसने में हासिल हुई। इसकी सहायता से 18 लाख संदिग्ध खातों की पहचान की जा सकी। अभी भी 2.89 लाख करोड़ रुपये जांच के दायरे में हैं। 1626 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त की गई। 22.23 लाख अकाउंट्स को जांच के नोटिस जारी हुए हैं। एक और उपलब्धि यह रही कि एडवांस्ड डेटा एनालिसिल के द्वारा 5.56 लाख नए केसों की भी जांच की जा रही है। साढ़े चार लाख से ज्यादा के ऐसे ट्रांजेक्शंस की पहचान हुई, जो संदेहास्पद हैं। कर व्यवस्था से जुड़ने वाले नए करदाताओं की संख्या बढ़कर 56 लाख हो गई। एक बड़ी सफलता यह भी रही कि 2.1 लाख फर्जी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन अवैध होने के चलते रद्द किया गया।

कैश ट्रांजेक्शन को मिला भरपूर प्रोत्साहन

नोटबंदी के कारण उत्पन्न हुई कम नगदी की अल्पावधिक अवस्था से कैश ट्रांजेक्शन को बहुत अधिक प्रोत्साहन मिला। न केवल लोगों ने कैशलेस व्यवस्था को अधिक से अधिक अपनाया, बल्कि सरकार की ओर से भी ऐसे कदम उठाए गए, जो इस स्थिति को प्रोत्साहित कर रहे थे। इसके द्वारा अगले कुछ ही समय में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन अत्यंत उच्च स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि त्योहारों का समय होने के चलते लोग खरीदारी तो खूब कर रहे थे, परंतु वह नगदी-प्रयोग के पूरवर्ती रूप में न होकर ऑनलाइन बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट, मोबाइल बैंकिंग का ही उपयोग कर रहे थे। साधारण जीवनचर्या में भी कैश की बजाय वैकल्पिक रूपों से लेन-देन को प्रोत्साहन मिला।

महंगाई पर किया जा सका प्रभावी नियंत्रण

नोटबंदी के चलते पैसा बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गया। पहले का चलन यह था कि अवैध धन को खपाने के लिए लोग अधिक से अधिक खरीदारी किया करते थे, जिससे बाजार में वस्तुओं का मूल्य उसकी वास्तविक लागत से कई गुना ज्यादा होता था। नोटबंदी ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। नवंबर 2016 में जो महंगाई दर 3.63 प्रतिशत थी, वह जुलाई 2017 तक घटकर 2.36 प्रतिशत ही रह गई। इसके साथ-साथ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर भी सरकार द्वारा नजर रखी गई, जिससे संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर रोक लगी। इस स्थिति का लाभ महंगाई दर घटने को पहुंचा।

घर खरीदना हुआ आसान

नोटबंदी के द्वारा बैंकों में बड़ी संख्या में कैश जमा हुआ। इससे बैंकों द्वारा लोगों को ऋण मिलना सस्ता और आसान हो गया। इससे होम लोन पर हाउसिंग दर गिरकर 3 प्रतिशत पर पहुंच गई। पिछले साल यह दरें 10.5 प्रतिशत से लेकर 12 प्रतिशत तक थी, वही अब घटकर 8 से 9 प्रतिशत पर आ गई। नोटबंदी के द्वारा रीयल एस्टेट की मनमानी पर भी रोक लगी, क्योंकि यह भी देखने में आया था कि बड़ी संख्या में लोग अवैध धन का प्रयोग इस क्षेत्र में कर रहे थे, जिस कारण यह क्षेत्र आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा था। अपना घर लेना एक सपना बन गया था। किसी के पास अकूत संपत्ति थी, किसी के लिए एक घर जुटा पाना भी मुश्किल था। नोटबंदी ने इस असमानता को भी कम किया।   

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