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नोटबंदी के 3 साल, पीएम मोदी ने की थी बेईमानों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

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पिछले साढ़े 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर चुके हैं। ठीक तीन साल पहले 8 नवंबर 2016 की आठ बजे रात को पीएम मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का ऐतिहासिक घोषणा की थी। पीएम मोदी के इस कड़े फैसले से जहां बेईमानों की ताकत घटी, वहीं ईमानदारों की ताकत बढ़ गई। इसके साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को नई शक्ति के साथ तेज गति मिली। 

भारत जैसे विशाल देश में नोटबंदी जैसा निर्णय कोई आसान नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री ने साहस दिखाया और देश की जनता ने उनका साथ दिया। 08 नवंबर को नोटबंदी लागू किए हुए तीन साल पूरे हो गए हैं। नोटबंदी के अनेक फायदे सामने आए हैं।

ITR दाखिल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी

2017-18 में 25 फीसदी वृद्धि के साथ 1.07 करोड़ नये लोगों ने आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किया, जबकि 206-17 में यह संख्या 85.50 लाख थी। 2015-16 के बाद नये आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। 2014-15 के 55 लाख और 2015-16 के 66 लाख के मुकाबले यह संख्या 2016-17 में बढ़कर 85 लाख पर पहुंच गई।

अघोषित आय का खुलासा
7,961 करोड़ रुपये की अघोषित आय का लोगों ने खुद खुलासा किया एवं 6, 745 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता लगया गया।

स्वच्छ धन,स्वच्छ अर्थव्यवस्था
इस दौरान नकद जमा डेटा का विश्लेषण उन संदिग्घ व्यक्तियों की पहचान करने के लिए किया गया था, जिनके नकद लेन देन करतदाता प्रोफाइल के अनुरुप नहीं थे। इसके परिणामस्वरूप लगभग 17.92 लाक लोगों की पहचान की गई।

करदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी
3.04 लाख ऐसे लोगों की पहचान की गई जिन्होंने 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकदी जमा की लेकिन आयकर जमा नहीं किया, ऐसे लोगों में से 2.09 लाख लोगों ने 6,531 करोड़ रुपये के स्व-मूल्यांकन कर का भुगतान किया।

टैक्स का दायरा भी बढ़ा
2016-17 के 5.48 करोड़ लोगों के मुकाबले 2017-18 में 6.86 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया

डिजिटल हो रही अर्थव्यवस्था
नोटबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था लेस कैश सोसाइटी की ओर अग्रसर है। कैशलेस लेनदेन लोगों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ हर लेनदेन से काले धन को हटाते हुए क्लीन इकोनॉमी बनाने में भी मददगार साबित हुआ है। नवंबर 2016 में जहां यूपीआई आधारित ट्रांजेक्शन सिर्फ 90 करोड़ रुपए का था अक्तूबर 2018 में बढ़कर 74978 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

ट्रेस आउट हो सका कालाधन
नोटबंदी के बाद 99 प्रतिशत नकदी बैंकिंग सिस्टम में आ गए हैं। इसका फायदा यह है कि अब काले धन का पता लगाना काफी आसान हो गया है। इस निर्णय के बाद 17.73 लाख ऐसे संदिग्ध मामलों की पहचान की गई जिनमें पैन कार्ड धारकों के प्रोफाइल नोटबंदी के पहले के प्रोफाइल से मेल नहीं खाते।

इकोनॉमी सिस्टम में स्वच्छता
नोटबंदी के बाद चार लाख लाख संदिग्ध कंपनियां जांच एजेंसियों के राडार पर आईं। इनमें से अधिकतर कालाधन को छिपाने और कर चोरी के उद्देश्य से संचालित की जा रहीं थी। इनमें से  करीब तीन लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया।

फॉर्मल हो रही इकोनॉमी
नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें सामाजिक सुरक्षा से उनके अधिकारों के संरक्षण दिये जा रहे हैं। एक करोड़ से अधिक श्रमिकों को प्रोविडेंट फंड का लाभ मिलने लगा है और ESIC में 1.3 करोड़ श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन भी किया गया है।

रियल एस्टेट के लिए वरदान
रियल एस्टेट क्षेत्र कालेधन के ट्रांजेक्शन्स के लिए बेहद ही आसान जरिया बन गया था। लेकिन नोटबंदी के निर्णय के बाद आम लोगों के लिए घर खरीदना बहुत सस्ता हो गया। नोटबंदी के कारण रियल एस्टेट सेक्टर अब अधिक पारदर्शी, संगठित, भरोसेमंद और खरीददारों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति जब्त
नोटबंदी के बाद से सीबीडीटी ने देश में चल और अचल, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपत्तियों की खोजबीन शुरू की। दरअसल ये संपत्ति वास्तविक मालिक के बजाय किसी और के नाम पर दर्ज हैं। नोटबंदी के बाद ऐसी बेनामी संपत्ति का पता लगाने में भी बड़ी सफलता मिली है। 

आतंकवाद और जाली नोट पर चोट
नोटबंदी के बाद से आतंकियों के हौसले पस्त हुए हैं और उनके पास पैसा पहुंचने पर काफी हद तक ब्रेक लगाई जा सकी है। पहले जब कभी भी किसी आतंकी का एनकाउंटर होता था तो हजारों लोग वहां पहुंच जाते और आर्मी पर पत्थरबाजी करते। हवाला के जरिये नक्सलियों आतंकवादियों और जिहादियों को जो पैसा मिलता था वो अब कचरा बन गया है। 

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