Home केजरीवाल विशेष तीन गरीब बच्चों की भूख से मौत पर जवाब दीजिए केजरीवाल जी!

तीन गरीब बच्चों की भूख से मौत पर जवाब दीजिए केजरीवाल जी!

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दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन गरीब लावारिस बच्चियों की मौत भूख से हो गई। दिल्ली सरकार की नाक के नीचे तीन बच्चों की भूख से मौत हो गई और सूबे के सीएम ने भी चुप्पी साध रखी है। हर छोटी-बड़ी बात पर दिल्ली को अराजकता में धकेलने वाले अरविंद केजरीवाल इस मामले में जिम्मेदारी लेने से भाग रहे हैं। आपको बता दें कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इसी क्षेत्र के विधायक हैं और उन्होंने भी भूख से मौत पर कोई जिम्मेदारी लेने की जहमत नहीं दिखाई।

दरअसल खुद को आम आदमी बताने वाले लोग सत्ता में बैठकर ठाट काट रहे हैं। केजरीवाल सरकार के तमाम ठेके सिसोदिया के रिश्तेदारों को मिल रहे हैं। खूब माल बनाया और उड़ाया जा रहा है। हाल में ही मनीष सिसोदिया ने 13 लाख की इनोवा कार बदलकर 20 लाख की लग्जरी जीप कम्पास खरीदी है। सबसे दुखद ये है कि तीन बच्चों की मौत पर मीडिया के एक खास वर्ग द्वारा चुप्पी साध लिया गया है ताकि ये खबर दब जाए।

बहरहाल मनीष सिसोदिया ने इस मामले को अपनी कोरी दलील से टालने की कोशिश की है और ट्वीट कर कहा है कि इसके लिए जांच बिठा दी गई है। हालांकि यह भी साफ हो गया कि उन्होंने इस घटना पर किसी तरह की जिम्मेदारी लेने में रुचि नहीं दिखाई।

हालांकि मनीष सिसोदिया के झूठ की पोल खोली सांसद महेश गिरि ने। उन्होंने साफ किया कि दिल्ली सरकार सच छिपा रही है और जनता को मूर्ख बता रही है। 


बहरहाल भूख से हुई इस मौत के बहाने आइये हम जानते हैं कि आम आदमी के नाम पर ये आप नेता कितनी अय्याशियां कर रहे हैं।

  • फरवरी 2015 से अगस्त 2016 के बीच केजरीवाल के कार्यालय में 1.20 करोड़ रुपये के समोसे और चाय का खर्च किए।
  • मनीष सिसोदिया के सचिवालय कार्यालय में 8.6 लाख और कैंप आफिस में 6.5 लाख रुपये चाय और स्नैक्स में खर्च किए गए।
  • केजरीवाल ने सरकार के वर्षगांठ के लिए 2016 में दावत दी। एक थाली 12, 000 रुपये की थी, जिसमें 11.4 लाख खर्च किए गए।
  • अरविंद केजरीवाल 2015 से हर साल इलाज करवाने बेंगलुरु जाते हैं, जहां 17,000 रुपये प्रतिदिन वाले कमरे में रहते हैं।

मनीष सिसोदिया को मस्ती पसंद है!
11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बिजनेस क्लास में सफर करने वाला ये आम आदमी सितंबर, 2015 में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी गए। जून 2016 में बर्लिन की भी यात्रा की। 2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे।

बेमतलब के विज्ञापनों पर लुटाए करोड़ों
CAG की रिपोर्ट के अनुसार केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर करोड़ों रुपए के विज्ञापन जारी किए। सरकार की इमेज चमकाने के चक्कर में जनता के 21.62 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए। इतना ही नहीं केजरीवाल सरकार ने अन्य राज्यों में भी विज्ञापन पर 18.39 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कैग के मुताबिक 2.15 करोड़ रुपये के विज्ञापन ऐसे हैं जो बेतुके हैं। शब्दार्थ नाम की प्राइवेट एड एजेंसी (आरोप है कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साले की है कंपनी) को 3.63 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जिसकी आवश्यकता नहीं थी।

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