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इस तरह तो प्रधानमंत्री मोदी ने नौ महीने में ही बचा लिए जनता के 72 हजार करोड़

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एक जमाना था जब सब्सिडी का पैसा लाभार्थियों तक पहुंचता ही नहीं था। सब्सिडी ही नहीं हर सरकारी योजनाओं के पैसों की बंदरबांट के लिए अघोषित नियम बने हुए थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खुद कहा था, कि केंद्र सरकार जितने पैसे देती है उसका केवल 15% ही सही जगह तक पहुंचता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मात्र साढ़े तीन साल के कार्यकाल में इस स्थिति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। राजीव गांधी के शासनकाल को आधार मानें तो मौजूदा वित्त वर्ष में मोदी सरकार ने अबतक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए देश का 72 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा बचा लिया है। अगर यूपीए शासन की कसौटी पर कसेंगे तब तो ये आंकड़ा कहीं ज्यादा बैठेगा।

मार्च तक मोदी सरकार बचा लेगी लगभग 1 लाख करोड़ !
तथ्य यह है कि चालू वित्त वर्ष यानी 2017-18 में अब तक केंद्रीय योजनाओं के तहत 84,998 करोड़ रुपये लाभार्थियों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से पहुंचाए गए। इस माध्यम में बिचौलियों और दलालों तक सरकारी पैसे पहुंचने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। लगभग 85 हजार करोड़ की इस रकम को राजीव गांधी के 15% वाले गणित से हिसाब लगाएं तो करीब 12,750 करोड़ रुपया ही असली लाभार्थियों तक पहुंच पाता। बाकी लगभग 72,000 करोड़ बिचौलियों और दलालों की झोली में जाना तय था। ये आंकड़ा तो दिसंबर तक का है। मार्च तक उम्मीद है कि 1.15 लाख करोड़ डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों पहुंच जाएंगे। यानी इस आंकड़े को राजीव गांधी के गणित में बिठाएं तो मार्च तक मोदी सरकार जनता का लगभग 1 लाख करोड़ रुपये बिचौलियों के पास जाने से बचा लेगी।

मनमोहन सरकार की तुलना में डीबीटी में करीब 1,100% का उछाल
अगर नेतृत्व के पास विजन हो, उसका लक्ष्य देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाना हो, तो भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश का कैसे कायाकल्प हो सकता है इसका उदाहरण मोदी सरकार ने दिया है। यूं तो डीबीटी की व्यवस्था कहने के लिए यूपीए सरकार ने ही कर दी थी। जिसके तहत साल 2013-14 में मात्र 7,367.70 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर हुए थे। वही आंकड़ा इस साल सिर्फ 9 महीनों में ही 84,998 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यानी 1053.65% या 11.54 गुना का चमत्कारिक इजाफा।

लाभार्थियों की संख्या में भी लगभग 6 गुना चमत्कारिक बढ़ोत्तरी
यूपीए के कार्यकाल यानी 2013-14 में मात्र 10.81 करोड़ लोगों को डीबीटी का लाभ मिला था। लेकिन चालू वित्त वर्ष में अभी तक ही इसका फायदा 59.34 करोड़ लोग उठा चुके हैं। यानी लगभग देश की आधी आबादी को इसका लाभ मिल रहा है। भारत जैसे बड़े देश में साढ़े तीन साल के भीतर भ्रष्टाचार की धार को इस तरह से रोक देने का सामर्थ्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा देश के किसी राजनीतिक व्यक्तित्व के लिए संभव ही नहीं है।

इस समय केंद्र सरकार की 401 योजनाएं डीबीटी के तहत काम कर रही हैं। इन्हें 56 मंत्रालयों द्वारा संचालित किया जा रहा है।

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