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केजरीवाल के तीन साल: भ्रष्टाचार, व्यभिचार, अत्याचार !

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देश के भीतर 2011 में निराशा भरे वातावरण में एक आंदोलन ने जन्म लिया था। भ्रष्टाचार को जड़मूल से खत्म करने के संकल्प के साथ इस आंदोलन को जनता का भरपूर समर्थन मिला। गांधीवादी नेता अन्ना हजारे के नेतृत्व में देश में एक बदलाव की बयार बहने लगी थी। अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जो अलख जगाई थी उसके परिणामस्वरूप दिल्ली के लोगों ने भी अपना प्रतिनिधित्व अन्ना के अनुयायी अरविंद केजरीवाल के हाथों में सौंप दिया। परन्तु अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से दगा ही किया है।

भ्रष्टाचार से लड़ाई की जिस बात को आधार बनाते हुए अरविंद केजरीवाल सत्ता में आए थे, वे उसे ही भुला बैठे और अपने करीबियों के भ्रष्टाचार पर आंखें मूंद ली। आइए हम देखते हैं ऐसे ही 10 मामले जो सुर्खियों में रहे।

भ्रष्टाचार नंबर-1
दिल्ली का खजाना लूटा
दिल्ली पुलिस मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके रिश्तेदार सुरेन्द्र कुमार बंसल और पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। शिकायतकर्ता राहुल शर्मा के अनुसार केजरीवाल के रिश्तेदार बंसल ने अधिकारियों के सहयोग से फर्जी कागजातों के आधार पर कई कंपनियों के नाम पर काम लिए और फर्जी बिल बनाए। इस तरह उन्होंने दिल्ली के खजाने को नुकसान पहुंचाया।

भ्रष्टाचार नंबर-2
गिरफ्तार हुए राजेन्द्र कुमार
केजरीवाल के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार को जब 4 जुलाई 2016 को कार्यालय से गिरफ्तार किया गया तो लोग अवाक रह गए। हालांकि 22 दिनों बाद सीबीआई अदालत ने उन्हें जमानत दे दी, लेकिन उनके भ्रष्टाचार के कारनामों की पोल खुल गई। राजेन्द्र कुमार ने 2007-2015 के बीच अपने रिश्तेदारों की कम्पनी को दिल्ली सरकार में काम करने का ठेका दिया और उसके बदले में धन भी लिया। इस तरह से दिल्ली सरकार को 12 करोड़ का चूना लगाया और खुद अपने लिए तीन करोड़ रुपये भी कमा लिए। 

भ्रष्टाचार नंबर-3
डिप्टी सीएम का करपक्शन
सीबीआई उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले दर्ज कर जांच कर रही है। उन्होंने केजरीवाल के टॉक टू एके कार्यक्रम के प्रचार के लिए 1.5 करोड़ रुपये में एक पब्लिक रिलेशन कंपनी को काम सौंप दिया। जबकि मुख्य सचिव ने इसके लिए इजाजत नहीं देने को कहा था, लेकिन सरकार ने बात नहीं मानी। लगता है सिसोदिया ने फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया।

भ्रष्टाचार नंबर-4
सत्येंद्र जैन का हवाला कनेक्शन
केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र जैन पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपए मंगाने का आरोप है। इधर उनके लॉकर से दो करोड़ रुपये नकद भी पाए गए थे। ये वो जानकारी है जिसे आयकर विभाग ने ट्रेस किया है। बताया जा रहा है कि सत्येंद्र जैन के करीबी कोड वर्ड के साथ नकद में रुपये ट्रेन के माध्यम से कोलकाता भेजते थे और कोलकाता के हवाला कारोबारी छद्म कंपनियों के नाम से जैन की कंपनी में शेयर खरीदने के बहाने पैसे चेक या आरटीजीएस के माध्यम से लौटाते थे।

भ्रष्टाचार नंबर-5
मंत्री की बेटी बनी सलाहकार
सीबीआई स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की पुत्री सौम्या जैन को मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाए जाने की जांच कर रही है। उपराज्यपाल के आदेश के बाद यह जांच हो रही है। मंत्री सत्येन्द्र जैन का कहना है कि उनकी पुत्री एक रुपया लिए बगैर काम कर रही है।

भ्रष्टाचार नंबर-6
खाद्य मंत्री ने खाया घूस
केजरीवाल के खाद्य मंत्री असीम अहमद खान ने अपने विधानसभा क्षेत्र मटियामहल में एक बिल्डर से निर्माण कार्य जारी रखने के लिए 6 लाख रुपयों की मांग की थी, जिसकी रिकॉर्डिंग करके बिल्डर ने सभी जगह भेज दी। इसके दबाव में केजरीवाल को अपने मंत्री को बर्खास्त करना पड़ा।

भ्रष्टाचार नंबर-7
केजरी के मंत्री का व्यभिचार
केजरीवाल के सामाजिक कल्याण, महिला व बाल विकास मंत्री संदीप कुमार ने राशन कार्ड बनवाने के लिए एक महिला के साथ जबरदस्ती संबंध बनाये। इन संबंधों की सीडी सार्वजनिक होने पर केजरीवाल को इन्हें भी मंत्रालय से बर्खास्त करना पड़ा।

भ्रष्टाचार नंबर-8
तोमर की फर्जी डिग्री
दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने दावा किया था कि उन्होंने सत्र 1994-97 के दौरान मुंगेर (बिहार) के विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज से पढ़ाई की थी। मामला पकड़ में आने के बाद पता चला कि तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर तोमर को कानून की डिग्री जारी कर दी गई थी। डिग्री लेते समय माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अंकपत्र जमा करने पड़ते हैं। लेकिन तोमर द्वारा जमा किए गए दोनों सर्टिफिकेट अलग-अलग विश्वविद्यालयों के हैं। अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद का अंकपत्र और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी का माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा किया गया। दोनों विश्वविद्यालयों ने इन प्रमाणपत्रों की वैधता को खारिज कर दिया है।

भ्रष्टाचार नंबर-9
प्रचार में भी भ्रष्टाचार
हाल ही में जारी सीएजी की रिपोर्ट बताती है कि केजरीवाल सरकार ने दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली सरकार के खजाने का दुरुपयोग किया। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। दूसरे साल में जब पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में आप चुनाव लड़ रही थी, तब तो केजरीवाल ने दिल्ली के खजाने को जमकर लुटाया होगा, यह बात भी आगे आने वाली सीएजी की रिपोर्ट में साबित तो हो ही जाएगी। 2015-16 में केजरीवाल ने 522 करोड़ रुपये विज्ञापन के लिए खर्च कर दिए।

भ्रष्टाचार नंबर-10
स्ट्रीट लाइट घोटाला
आप नेता राखी बिड़लान पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे। आरटीआई के हवाले से दावा करते हुए बीजेपी ने आरोप लगाया कि मंगोलपुरी में 15 हजार की सोलर स्ट्रीट लाइट को एक लाख रुपये और 10 हजार में लगने वाले सीसीटीवी कैमरे पर 6 लाख रुपये खर्च किए गए।

भ्रष्टाचार और व्यभिचार के साथ एक बड़ी आबादी पर केजरीवाल सरकार अत्याचार करने से भी नहीं हिचकिचाती। दिल्ली के अंकित सक्सेना मर्डर केस में यही कुछ तो हुआ है। उनके परिजनों के लिए दिल्ली सरकार से मुआवजे की मांग की गई, लेकिन केजरीवाल ने एक नहीं सुनी। जाहिर है केजरीवाल इस केस को इंसानियत के नजरिए से नहीं, सांप्रदायिक नजरिए से देख रहे हैं। 

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