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पीएम मोदी की ईमानदारी से डरीं ममता, भ्रष्टाचारियों को गोलबंद कर रही हैं

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पश्चिम बंगाल आज पूरी तरह अशांत है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करनी के चलते 24 परगना समेत राज्य के कई जिले सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में है। उनकी गलत नीतियों के चलते राज्य का हिल स्टेशन दार्जिलिंग पहले से ही जल रहा है। लेकिन ममता बनर्जी अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय जनता से बचने के लिए चोर दरवाजे ढूंढने में लगी पड़ी हैं। वो सबकुछ भूलकर देशभर के भ्रष्टाचारी नेताओं को गोलबंद करने में जुटी हुई हैं। ताकि येन-केन-प्रकारेण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों में बाधा डाल सकें। दरअसल वो अंदर ही अंदर बेहद डरी हुई हैं। उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार रहते हुए वो अपने घोटालों को दबा नहीं सकतीं।

भ्रष्टाचारियों को गोलबंद करने में लगी हैं
गोपाल कृष्ण गांधी को विपक्ष की ओर से उप-राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित करवाने में ममता ने अहम रोल निभाया है। उन्होंने इसके माध्यम से तमाम भ्रष्टाचारी नेताओं को साधने की कोशिश की है। ममता के इस हथकंडे में उनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, सजायाफ्ता चारा चोर लालू यादव, मायावती जैसे नेता शामिल हैं। ये सारे लोग दागी हैं और इन सब पर भ्रष्टाचार और घोटालों के बड़े-बड़े आरोप हैं और कुछ में तो जांच में भी चल रही है। जानकारी के अनुसार गोपाल कृष्ण गांधी को बलि का बकरा बनाने के बाद ये लोग संसद के मॉनसून सत्र को नाश करने की तैयारी कर रहे हैं। यही नहीं ममता, मोदी सरकार की छवि खराब करने और देश को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर #SaveIndiaFromBJP कैंपेन भी शुरु करने वाली हैं।

चोर की दाढ़ी में तिनका
दुनिया जान रही है कि पश्चिम बंगाल में हालात दिन- ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। ममता की तुष्टिकरण की नीतियों ने राज्य में जेहादी ताकतों की हौंसला बहुत बुलंद कर दिया है। टीएमसी के राज में वो खुद को संविधान और कानून से ऊपर मानने लगे हैं। वहां सरेआम हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं। लेकिन वोट बैंक को बचाने के लिए ममता सरकार चुप बैठ गई है। उसी तरह टीएमसी की नीतियों ने दार्जिलिंग को अशांत कर रखा है। वहां का पर्यटन उद्योग पूरी तरह ठप पड़ चुका है। पूरी अर्थव्यवस्था बैठ गई है। लोगों को खाने-पीने की चीजों के लाले पड़ गए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ठोस कदम उठाने के बजाय उलटे केंद्र सरकार पर दोषारोपण कर रही हैं। राज्य की जनता को जवाब देने के लिए बहाने ढूंढ रही हैं।

अपने पापों को छिपानी चाहती हैं
खुद ममता बनर्जी पर कई घोटालों के दाग हैं। नारदा, शारदा और रोजवैली स्कैम में उनपर आम लोगों के सैकड़ों करोड़ रूपये इधर से उधर करने के आरोप हैं। इन सभी मामलों की जांच चल रही है। ये जांच अदालतों की अगुवाई में केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। ममता सरकार के कई पूर्व मंत्री और टीएमसी नेता इन्हीं मामलों में सलाखों के पीछे डाले जा चुके हैं। बस यही मामले ममता की कमजोर कड़ी हैं। वो जानती हैं की पीएम मोदी के रहते भ्रष्टाचार के किसी भी मामले को दबाना नाममुकिन है। मोदी सरकार में ईमानदारी के किस्से दुनियाभर में चर्चा की विषय बन चुकी है। उन्हें लगता है कि निष्पक्ष जांच होने पर तो उन्हें भी जेल जाना पड़ सकता है। इसीलिए वो अब राजनीति में सिर्फ एक मोटो लेकर आगे बढ़ रही हैं। जैसे भी हो प्रधानमंत्री मोदी को उनकी जिम्मेदारियों को निभाने से रोक दिया जाए।

बीजेपी की बढ़त से भी होश उड़े हैं
पिछले तमाम चुनावों का ग्राफ देखें तो लगता है कि राज्य में बीजेपी का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। राज्य की जनता ने ममता को जिन वामपंथियों और कांग्रेसियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाला समझा था, वो अब उन्हीं की दोस्त बन गई हैं। जनता की नजरों में चोर-चोर मौसेरे भाई वाली स्थिति बन गई है। इसका परिणाम हुआ है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ही एकमात्र विपक्ष की तरह दिख रही है। टीएमसी-कांग्रेस-लेफ्ट का अघोषित गठबंधन है, ये बात वहां की जनता भलि-भांति समझ चुकी है। जनता महसूस करने लगी है कि केवल भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण ही इन दलों का पेशा है। ममता को भी पता है कि उनकी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है इसीलिए वो भ्रष्ट नेताओं और पार्टियों का गठजोड़ कर रही हैं।

सोनिया गांधी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं
घोटाले के मामले में मनमोहन की अगुवाई वाली सोनिया-राहुल सरकार ऐतिहासिक सरकार रही है। 10 साल के इनके कार्यकाल में देश का खजाना जिस तरह से लूटा गया, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। लेकिन इसके अलावा सोनिया पर निजी भ्रष्टाचार के भी आरोप हैं। नेशनल हेराल्ड के फंड की हेराफेरी के केस में वो जमानत पर हैं। इसके अलावा वीवीआईपी चौपर खरीद मामले में भी उनपर गंभीर आरोप लग चुके हैं। इटली की अदालत में भी साबित हो चुका है कि अगस्टा-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले में नेताओं और पत्रकारों को मोटी रकम दी गई।

राहुल गांधी भी जमानत पर बाहर हैं
नेशनल हेराल्ड केस में अपनी मां सोनिया गांधी के साथ राहुल को भी बेल मिली हुई है। आरोपों के अनुसार दोनों मां-बेटों ने नेशनल हेराल्ड की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए बड़ी धांधलियां की हैं। जाहिर है कि इन्हें लगता है कि मोदी सरकार के रहते ये मामले उस तरह से नहीं दबाए जा सकेंगे, जैसा आरोप बोफोर्स घोटाले को लेकर लगता रहा है। यही वजह है कि भ्रष्टाचार के मसले पर राहुल-सोनिया भी ममता के साथ खड़े हो गए हैं।

लालू यादव तो घोषित घोटालेबाज हैं
आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव ने अपने जीवन में इतने भ्रष्टाचार किए हैं कि अब ये शब्द उनके लिए बेमानी हो चुके हैं। तीन दशकों की राजनीति में तरह-तरह के घोटालों से इन्होंने इतनी संपत्ति जमा कर ली है जिनका हिसाब लगाना भी मुश्किल है। चारा घोटाले के एक मामले में 5 साल की सजा मिली हुई है। इसके चलते चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी है। इनकी पत्नी राबड़ी देवी, बड़ी बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव पर भी भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों में जांच चल रही है। बड़ा बेटा तेजप्रताप यादव का फर्जीवाड़ा भी पकड़ा जा चुका है। इसीलिए ममता के साथ मोदी विरोध की राजनीति का झंडा उठाकर लालू ही आगे-आगे चल रहे हैं।

मायावती भी आरोपों के घेरे में हैं
बीएसपी सुप्रिमो मायावती पर खुद आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप हैं। उनपर रिश्तेदारों के नाम पर बेनामी संपत्ति रखने के भी आरोप लग चुके हैं। मायावती के भाई आनंद कुमार पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं। कई मामलों की तो जांच भी चल रही है। यही वजह है कि मायावती भी मोदी विरोधी विपक्षी मोर्चा सोनिया-ममता-लालू की तिकड़ी के साथ बहुत सक्रिय हैं।

कणिमोझी 2जी घोटाले की आरोपी
मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन में डीएमके भी सक्रिय है। दरअसल पार्टी के कई बड़े नेता यूपीए सरकार के बड़े-बड़े घोटालों में आरोपी हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम राज्यसभा सांसद और एम करुणानिधि की बेटी कणिमोझी का है। वो 2जी घोटाले में आरोपी हैं। इस केस में वो लंबे समय तक तिहाड़ जेल की हवा भी खा चुकी हैं। फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं।

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