Home विचार मोदी लहर की चपेट में आकर कर्नाटक की सत्ता भी गंवाएगी कांग्रेस!

मोदी लहर की चपेट में आकर कर्नाटक की सत्ता भी गंवाएगी कांग्रेस!

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तो क्या कांग्रेस अपना आखिरी मजबूत किला भी गंवाने जा रही है? सवाल मौजू इसलिए है कि कर्नाटक चुनाव संपन्न हो चुके हैं और भारी मतदान यही संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। हालांकि जनता अपना निर्णय सुना चुकी है, बस घोषणा बाकी है, लेकिन कांग्रेस इसे मानने से इनकार कर रही है। वह अभी से जोड़-तोड़ में लग गई है और तमाम दांव चल रही है। दूसरी ओर कर्नाटक की जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर भारी मतदान कर ये संकेत दे दिया है कि प्रदेश में एक बार फिर मोदी लहर चली है। 

एक्जिट पोल के नतीजों में भाजपा की जीत
कर्नाटक में मोदी लहर का जादू चल गया है। शनिवार को मतदान के बाद आए एग्जिट पोल्स में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बताया जा रहा है। विभिन्न एजेंसियों के अलग-अलग आंकड़े हैं, लेकिन अधिकतर में भाजपा या तो पूर्ण बहुमत प्राप्त कर रही है या फिर सबसे बड़ी पार्टी बन रही है। हालांकि ‘पोल ऑफ ऑल एग्जिट पोल्स’ (सारे एग्जिट पोल्स का औसत) की बात करें तो बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी बनने के आसार नजर आ रहे हैं। पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक बीजेपी को 103, कांग्रेस को 86, जेडीएस को 31 और अन्य को 2 सीटें मिलने का अनुमान है।

सट्टा बाजार ने भी भाजपा की जीत माना
कर्नाटक चुनाव में भाजपा की हालत खराब बता रहा सट्टा बाजार भी पलट गया है। कह रहा है कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होगी। सटोरियों के अनुमान के अनुसार बीजेपी 96-98 सीट जीतेगी, जबकि कांग्रेस को 85-87 सीटों पर जीत मिल सकती है। सट्टा बाजार की भाषा में इसका मतलब है कि मार्केट में बिड प्राइस 96 या 85 है, जबकि लगाई जाने वाली कीमत 98 या 87 है।

कांग्रेस और सिद्धारमैया ने मान ली हार
कर्नाटक विधानसभा का चुनाव परिणाम तो कहल आएगा, लेकिन चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेसी खेमे में अजीब बैचैनी है। यह बेचैनी सिद्धारमैया के उस बयान से भी समझा जा कता है कि उन्होंने दलित सीएम बनाने की मंशा जाहिर की है। यानि उन्होंने पार्टी हाईकमान को संकेत दे दिया है कि कांग्रेस कर्नाटक में हार रही है। इससे यह बात भी जाहिर हो रही है कि वे इतना बड़ा निर्णय बिना राहुल गांधी की सहमति के बगैर नहीं ले सकते हैं।

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सत्ता हथियाने के लिए देवगौड़ा को रिझा रही कांग्रेस
किंगमेकर माने जा रहे जेडीएस चीफ एचडी देवगौड़ा को रिझाने के लिए पहला पासा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दलित CM बयान के जरिए फेंका। एग्जिट पोल्स के नतीजों के बाद चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया ने कहा था कि हाईकमान अगर किसी दलित नेता को इस पद पर बिठाना चाहता है तो वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ने को तैयार हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस की ओर से जेडीएस को साधने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

दलित दांव के सहारे जेडीएस को साध रही कांग्रेस
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की तरफ से उछाली गई दलित सीएम की थ्योरी ने राज्य की सियासत में दिलचस्प मोड़ ला दिया है। लेकिन यह साफ है कि देवगौड़ा के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी कांग्रेस नहीं, बल्कि बीजेपी के साथ जाने के मूड में हैं। हालांकि कांग्रेस यह मानती है कि त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में एचडी देवगौड़ा दलित वोटरों को लुभाने के लिए महादेवप्पा या मुनियप्पा के नाम पर समर्थन दे सकते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि जेडीएस को बीजेपी के साथ जाने से रोकने के लिए ही पार्टी दलित सीएम की थ्योरी उछाल रही है।

 

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