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दलितों को भड़काकर देश में हिंसा फैलाना चाहती है कांग्रेस!

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वर्ष 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की जीत में देश भर में दलितों ने जमकर उनके पक्ष में वोट किया था। इसी का परिणाम था कि यूपी में भारतीय जनता पार्टी को 73 सीटें मिलीं और दलितों की पार्टी कही जाने वाली बीएसपी को एक भी सीट नहीं मिली। कांग्रेस पार्टी तो महज दो सीटों पर सिमट कर रह गई थी। इसके बाद से ही वामपंथियों और कांग्रेस ने मिलकर साजिश रचनी शुरू की।

रोहित वेमुला को वामपंथियों ने अपनी कुत्सित राजनीति की भेंट चढ़ा दी तो कांग्रेस पार्टी ने गुजरात के ऊना कांड को अंजाम दिया। इसी तरह कांग्रेस पार्टी ने सहारनपुर में दलित-ठाकुर के बीच संघर्ष की साजिश रची तो इस साल जनवरी में महाराष्ट्र के कोरेगांव में हिंसा की पूरी कहानी ही लिख दी। खुलासा हुआ है कि कांग्रेस ने नक्सलवादियों से मिलकर देश में हिंसा और अराजकता फैलाने की साजिश रची है ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वर्ष 2019 में सत्ता में वापसी से रोका जा सके।

नक्सलियों के पत्र से हत्या की साजिश का खुलासा
सत्ता की लालच में कांग्रेस देश में हिंसा और अव्यवस्था फैलाने का कुचक्र रच रही है। माओवादियों और कांग्रेस पार्टी के बीच बिचौलिये की भूमिका भीमा-कोरेगांव हिंसा के एक अभियुक्त और विवादास्पद विधायक जिग्नेश मेवानी के निभाने की बात सामने आई है। एक शीर्ष नक्सली नेता द्वारा अपने साथी कामरेड को लिखे गए पत्र में हिंसा की इस साजिश का पूरा कच्चा चिट्ठा लिखा है। छद्म नाम वाले कामरेड एम ने अपने साथी रोनी विल्सन को इस वर्ष 2 जनवरी को लिखा था। गौरतलब है कि भीमा- कोरेगांव में पिछले वर्ष 31 दिसंबर को हिंसा हुई थी, जिसमें 28 साल के एक युवक की मौत हो गई थी। इस घटना के तुरंत बाद लिखे गए इस पत्र में देश में खून-खराबे और अराजकता की साजिश पर अमल करने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि माओवादी नेता रोनी विल्सन को भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के सिलसिले में पुणे पुलिस ने छह जून को दिल्ली में गिरफ्तार किया था। पुणे पुलिस ने इस संबंध में शहरी क्षेत्र में सक्रिय नक्सलवादी नेताओं को भी गिरफ्तार किया है, जिसमें पुणे के एक एडवोकेट और नागपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर शोमा सेन शामिल हैं। इस विस्फोटक पत्र के लेखक कामरेड एम की शिनाख्त नहीं हो पाई है।

कांग्रेस ने हिंसा के लिए नक्सलियों को किया फंडिंग
दरअसल यह सामान्य पत्र नहीं है बल्कि देश के विरूद्ध षड्यंत्र का एक दस्तावेज है। इस पत्र ने कांग्रेस पार्टी के चरित्र का भी पर्दाफाश कर दिया है।  गौरतलब है कि महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में दलितों के नाम पर हिंसा हुई थी। इस हिंसा में कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवनी और जेएनयू  के उमर खालिद जैसे लोगों का भी हाथ था, पर ये हिंसा नक्सलियों द्वारा की गयी थी, और इसी को लेकर नया खुलासा हुआ है। टाइम्स नाउ चैनल ने खुलासा किया है कि  नक्सलियों की फंडिंग राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी कर रही है, ताकि दलितों के नाम पर देश में अलग अलग जगह हिंसा फैलाई जा सके। यह भी साफ हुआ है कि भीमा कोरेगांव में जो हिंसा की गयी थी उसकी फंडिंग भी कांग्रेस पार्टी ने ही की थी। दरअसल ये हिंसा इसलिए कराई गयी थी ताकि देश में मोदी विरोधी लहर बनाई जा सके और लोगों को बताया जा सके की मोदी सरकार दलित विरोधी है, और दलितों पर अत्याचार किये जा रहे हैं।

राष्ट्रवादियों के विरुद्ध साजिश थी कोरेगांव हिंसा
मनमोहन सरकार के दौरान तत्कालीन गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में प्रतिबंधित माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी और उसके 74 फ्रंट संगठनों का ब्यौरा दिया था। माओवादियों की रिहाई के काम में लगे कमेटी फॉर रिलीज ऑफ पॉलिटिकल प्रीजनर्स (सीआरपीपी) का भी नाम शामिल था। इसी संगठन के लोगों को कांग्रेस से कानूनी और आर्थिक मदद मिलने की बात का पत्र में उल्लेख है। अब सवाल उठता है कि जिन संगठनों को उनकी सरकार ने ही नक्सली और आतंकवादी माना था उन्हें पार्टी की ओर से क्यों सहायता उपलब्ध कराई गई। पत्र में गिरफ्तार माओवादी नेताओं की रिहाई के लिए कांग्रेस से मिलने वाले सहयोग की बात कही गई है। पत्र के अनुसार कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कानूनी और आर्थिक सहयोग देने की बात कही है। इस संबंध में जिग्नेश मेवानी की सेवाएं लेने का निर्देश दिया गया है। चिट्ठी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी कथित तौर पर माओवादियों को आर्थिक साधन मुहैया करा रही थी। पुणे पुलिस को छापेमारी के दौरान एक चिट्ठी मिली जिसे कामरेड M ने 2 जनवरी 2018 को लिखी थी। माओवादी, यलगार परिषद को लिखे गए पत्र में कांग्रेस के बारे में जिक्र कर रहे है कि दलित आंदोलन को आगे बढ़ाने में मदद देंगे। इसके साथ ही उनका कहना है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद उनके और कांग्रेस के बीच सेतु का कार्य करेंगे। यही नहीं आंबेडकर के भतीजे प्रकाश आंबेडकर के बारे में भी कहा गया है कि वो माओवादियों के साथ मिलकर दलित आंदोलन से किस तरह का फायदा उठाना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश रच रही है कांग्रेस!
भीमा-कोरेगांव हिंसा में शामिल आरोपी विल्‍सन के दिल्‍ली में मुनीरका स्थित डीडीए फ्लैट से जो पत्र बरामद किया गया है इसमें एक और बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि वे ‘राजीव गांधी हत्‍याकांड’ जैसी किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की बात कही गई है।

बुधवार को रोना जैकब विल्सन, सुधीर ढावले, सुरेंद्र गाडलिंग सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। विल्सन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था, ढावले को मुंबई से, गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को नागपुर से गिरफ्तार किया गया था। पत्र में कहा गया है, ‘मोदी 15 राज्यों में बीजेपी को स्थापित करने में सफल हुए हैं। यदि ऐसा ही रहा तो सभी मोर्चों पर पार्टी के लिए दिक्कत खड़ी हो जाएगी। … कॉमरेड किसन और कुछ अन्य सीनियर कॉमरेड्स ने मोदी राज को खत्म करने के लिए कुछ मजबूत कदम सुझाए हैं। हम सभी राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर रहे हैं। यह आत्मघाती जैसा मालूम होता है और इसकी भी अधिक संभावनाएं हैं कि हम असफल हो जाएं, लेकिन हमें लगता है कि पार्टी हमारे प्रस्ताव पर विचार करे। उन्हें रोड शो में टारगेट करना एक असरदार रणनीति हो सकती है। हमें लगता है कि पार्टी का अस्तित्व किसी भी त्याग से ऊपर है। बाकी अगले पत्र में।’

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