Home हेट ट्रेकर पत्रकारिता को कलंकित करती कांग्रेस की पक्षकार स्वाति चतुर्वेदी

पत्रकारिता को कलंकित करती कांग्रेस की पक्षकार स्वाति चतुर्वेदी

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वर्तमान दौर में, देश के कुछ पत्रकार हारी हुई कांग्रेस की इज्जत बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। वे अपने इस मकसद को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ कुछ भी बोलने और लिखने के लिए हर समय तैयार रहते हैं। इन पत्रकारों का मात्र शब्द विन्यास ही बदला हुआ होता है पर सोच कांग्रेस से उधार पर ली गई होती है। इन पत्रकारों और कांग्रेस के प्रवक्ताओं में कोई भेद नहीं किया जा सकता है।

कांग्रेस के ऐसे ही चमचा पत्रकारों में एक स्वाति चतुर्वेदी हैं। स्वाति चतुर्वेदी कई समाचार पत्रों और वेबसाइट पर कांग्रेस की सोच को परोसने का काम करती हैं। स्वाति को सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप और तर्कहीन बातें लिखना काफी भाता है। आइए, आपको बताते हैं कि स्वाति चतुर्वेदी कांग्रेस के लिए पत्रकारिता कैसे करती हैं-

चमचा पत्रकारिता-1 स्वाति चतुर्वेदी ने 9 फरवरी को Twitter पर जो कुछ लिखा, उसे पढ़ कर ऐसा लगा कि जैसे कांग्रेस मुख्यालय का कोई प्रवक्ता प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक फायदे के लिए निशाना साध रहा हो। इस Tweet में उन्होंने जो कुछ लिखा उसे पढ़कर, स्वाति की पत्रकारिता के मापदंडों को अच्छी तरह समझ सकता है। आप भी उस Tweet को पढ़ें-

चमचा पत्रकारिता-2  8 फरवरी को किए गये एक Tweet को पढ़कर ऐसा लगा कि मानो राहुल गांधी का Tweet पढ़ रहे हैं। यह Tweet, वित्तमंत्री अरुण जेटली के राफेल डील पर दिए गये उस जवाब के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा कि देश हित में सुरक्षा कारणों से राफेल डील की कीमत का ब्योरा नहीं दिया जा सकता, नहीं तो इससे दुश्मन देशों को राफेल के साथ आयातित तकनीकों की जानकारी सार्वजनिक हो जाएगी। उन्होंने आगे यह भी कहा कि ऐसा पूर्व रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी करना पड़ चुका है। अरुण जेटली के जवाब पर राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए, स्वाति ने Twitter पर लिखा-

चमचा पत्रकारिता-3  8 फरवरी को संसद में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिया तो कांग्रेस और उसके पक्षकार सकते में आ गए। प्रधानमंत्री मोदी ने इतिहास के उन पन्नों को खोल कर अपने भाषण में बताया, जिसे कांग्रेस पढ़ना तो दूर, देखना भी नहीं चाहती है। स्वाति चतुर्वेदी जैसे पत्रकार सोशल मीडिया पर खिसियानी बिल्ली जिस तरह से खंभा नोचती है, उसी तरह से भाषण को लेकर तर्कहीन और बिना सिर-पैर की बातें करने लगे। स्वाति ने 08 फरवरी को भाषण पर लगातार कई Tweets किए, आप भी उन Tweets को पढ़कर स्वाति की तिलमिलाहट को समझ सकते हैं-

चमचा पत्रकारिता-4 इन कथित पत्रकारों का असली रंग तब नजर आता है, जब कोई कांग्रेस और गांधी परिवार की देश के प्रति इतिहास में की गई नाकामियों की याद दिलाता है। 7 फरवरी के Tweet में स्वाति ने कहा कि कांग्रेस को ही देश की आजादी की लड़ाई के बारे में बात करने का हक है क्योंकि कांग्रेस ने ही देश की आजादी की लड़ाई लड़ी है। 7 फरवरी को किए गये इन Tweets को पढ़कर आपको भी स्वाति के असली रंग का भान हो जाएगा।

चमचा पत्रकारिता-5  प्रधानमंत्री मोदी ने बोर्ड की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए एग्जाम वॉरियर नाम से एक पुस्तक लिखी है, जिसका विमोचन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया था। परीक्षा के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी का विद्यार्थियों से इस तरह सीधा संवाद करना इन पक्षकारों को तनिक भी नहीं भाया। इन्हें लगने लगा कि कांग्रेस को ही ऐसा करने का हक है क्योंकि वही पढ़े लिखे हैं और उन्हीं के पास ज्ञान की संपदा है। प्रधानमंत्री मोदी को ऐसा करने का कोई हक नहीं है। 3 फरवरी को स्वाति के Twitter संवाद को पढ़कर लगता है कि वह एक अंहकार भाव से ग्रसित है और अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझती है, आप भी वे Tweet पढ़िए-


चमचा पत्रकारिता-6 1 फरवरी को राजस्थान के दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के जब परिणाम आए तो कांग्रेस के साथ इन पक्षकारों को थोड़ी सी ऑक्सीजन मिल गई और सोशल मीडिया पर लगे जश्न मनाने। इस जश्न में ये पत्रकार प्रधानमंत्री मोदी पर अपनी भड़ास निकालने के लिए अमर्यादित टिप्पणियां करने लगे। परिणाम के बाद 2 फरवरी को स्वाति के Tweets को पढ़कर आप भी इनकी पत्रकारिता का स्तर देखिए-

चमचा पत्रकारिता-7 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को स्वाति ने Twitter पर जो कुछ लिखा उससे स्पष्ट हो जाता है कि इनकी पत्रकारिता का मकसद कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ाना है। 30 जनवरी को स्वाति द्वारा किया गया Tweet-

देश के पत्रकार यदि किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा को आगे बढ़ाना पत्रकारिता का मकसद समझने लगें, तो प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सामान्य जन के विकास का मुद्दा गौण रह जाएगा। स्वाति चतुर्वेदी जैसे पक्षकार ऐसा करके देश के विकास में रोड़ा साबित हो रहे हैं।

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