Home विचार पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’ की भाषा बोल रही कांग्रेस

पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’ की भाषा बोल रही कांग्रेस

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क्या कांग्रेस पार्टी आतंकवादियों के इशारे पर काम करती है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कांग्रेस और पाकिस्तान का आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा एक ही भाषा बोल रहे हैं। इसका सबूत एक बार फिर सामने आया है। लश्कर के प्रवक्ता ने कांग्रेस पार्टी के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें पार्टी ने सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने प्रेस रीलीज कर कहा, ”भारतीय सेना कश्मीर में मासूम लोगों को मार रही है और गुलाम नबी आजाद ने भी इस बात को स्वीकार किया है। कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध किया है, हम कांग्रेस पार्टी का समर्थन करते हैं कि भारतीय सेना अपने ऑपरेशन कश्मीर में बंद करे।”

अब तो कांग्रेस के नेता सैफुद्दीन सोज ने इस बीच कश्मीर की आजादी की मांग को जायज ठहरा दिया है। दरअसल गुलाम नबी आजाद हों या सैफुद्दीन सोज, ये सभी चुनावों की आहट सुनकर अपनी देशद्रोही सोच के साथ सामने आ जाते हैं। जाहिर है कांग्रेसियों के संस्कार और नीति कश्मीर के मामले में हमेशा भारत विरोधी रही है। जाहिर है कश्मीर समस्या के मूल में सिर्फ कांग्रेस की कारस्तानियां ही हैं।

गुलाम नबी आजाद के बयान से कांग्रेस की नीयत पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘’जम्मू-कश्मीर में सेना का निशाना आतंकवादियों पर नहीं, आम नागरिकों पर ज्यादा होता है।‘’ जाहिर है कांग्रेस ने संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार आयोग के मुस्लिम उच्चायुक्त जेन बिन राद अल-हुसैन की उस रिपोर्ट को ताकत देने की कोशिश की है जिसमें भारत पर ह्यूमेन राइट्स के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। सूत्रों की मानें तो यह बयान राहुल गांधी के इशारे पर दिया गया है क्योंकि पार्टी ने इस मामले पर अपनी सफाई भी पेश नहीं की है।

सैफुद्दीन सोज ने फिर सुलगाई कश्मीर में ‘आजादी’ की आग
कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा, ‘’कश्मीरी पाकिस्तान के साथ जुड़ना नहीं चाहते, उनकी पहली इच्छा आजादी है।‘’ सोज का यह बयान कांग्रेस की उसी सोच को जाहिर करता है इन्हें न कश्मीर से मतलब है और न ही भारत देश से। मतलब है तो सिर्फ अपनी मुस्लिम परस्त राजनीति चमकाने से। अब जब लश्कर-ए-तैयबा से कांग्रेस का कनेक्शन सामने आ रहा है इससे सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस देश की राजनीतिक पार्टी है या पाकिस्तान परस्त आतंकवादी संगठन?

 

आतंकवादियों के विरुद्ध सेना की सख्ती का विरोधी है कांग्रेस
कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद से ही भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन शुरू कर चुकी है। इसी के तहत एनएसजी कमांडो भी कश्मीर पहुंच चुके हैं। आइएस और जैश के सात से अधिक आतंकी ढेर किए जा चुके हैं। साफ है सेना पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों के सफाये के प्लान पर आगे बढ़ रही है। ऐसे में सेना के विरोध में कांग्रेस पार्टी और लश्कर का एक सुर में बोलना कई सवाल खड़े कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर में अलगावद समस्या की जन्मदाता है कांग्रेस
वर्ष 1948 में कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के भारत में विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद भारतीय फौज ने लगभग पूरे कश्मीर पर कब्जा कर लिया था। लेकिन तत्कालीन पीएम पंडित नेहरू ने सेना को रोक दिया और मामले के संयुक्त राष्ट्र लेकर चले गए। नेहरू के कारण अनुच्छेद 370 का प्रावधान लागू हुआ। भारत के संविधान में अनुच्छेद 35A भी कांग्रेस ने मुस्लिम परस्ती में ही जोड़ दिया। इसी कानून से जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की अलग परिभाषा है।

कश्मीर घाटी से हिंदुओं के सफाए की गुनहगार है कांग्रेस
1990 में हिंदुओं के नरसंहार के बाद कांग्रेस की शह ने कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ा दिया। गौरतलब है कि 1990 में कश्मीर में अलगाववादी मुसलमानों ने हजारों कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया था। हिंदू औरतों के साथ बलात्कार किया गया था। चार लाख कश्मीरी पंडित अब भी विस्थापन की जिंदगी जी रहे हैं। धर्मनिरपेक्ष भारत के एक हिस्से में धर्म को लेकर ही अधर्म का नंगा नाच हो रहा था, लेकिन कांग्रेस की सरकार उस समय तमाशा देख रही थी।

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