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भगोड़े आर्म्स डीलर संजय भंडारी से रॉबर्ट वाड्रा के कनेक्शन पर कांग्रेस की चुप्पी क्यों?

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा आज जिस बुलंदी पर हैं वह किसी के लिए भी सपने जैसा है। प्रियंका गांधी से विवाह के बाद न केवल दुनिया ने उन्हें जाना बल्कि वे करोड़ों की संपत्ति के स्वामी भी हो गए। लेकिन यह सब कैसे हुआ? आरोप कमीशनखोरी, घोटाले और भ्रष्टाचार के लगे हैं। इन आरोपों के बीच रॉबर्ट वाड्रा पर हथियार तस्करों से संबंध जैसे आरोप भी लग रहे हैं। जाहिर है यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है लेकिन कांग्रेस पार्टी ने चुप्पी साध रखी है। आजकल सोशल मीडिया पर एक्टिव नजर आने वाले राहुल गांधी भी अपने बहनोई के कारनामे पर कुछ नहीं बोल रहे है।

रॉबर्ट वाड्रा पर ये हैं आरोप
भगोड़े हथियार तस्कर संजय भंडारी के साथ रॉबर्ट वाड्रा के वित्तीय संबंधों की जानकारी सामने आई है। गौरतलब है कि वाड्रा के लंदन स्थित मकान और विदेश यात्रा के लिए भंडारी ने मदद मुहैया कराई थी। टाइम्स नाउ के अनुसार भगोड़े हथियार दलाल ने वर्ष 2012 में वाड्रा के लिए बिजनेस क्लास की टिकटें खरीदी थीं। भंडारी के बैंक खाते में 7.5 लाख स्विस फ्रैंक (करीब 4.95 करोड़ रुपए) जमा कराए गए थे। यहीं सवाल उठते हैं कि कहीं इस राशि का वाड्रा के लंदन स्थित मकान खरीदने से कोई संबंध तो नहीं है?

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रॉबर्ट वाड्रा दिखा रहे ठसक
ये गंभीर आरोप हैं, देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। यह तब और भी गंभीर हो जाता है जब देश के शीर्षस्थ परिवार से जुड़ा मामला हो। ऐसे में कांग्रेस पार्टी जांच करवाने की दलील दे रही है लेकिन आरोपों पर कुछ नहीं कह रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी चुप्पी लगा बैठे हैं। न तो वाड्रा से कोई सवाल, न कोई जवाब। हालांकि रॉबर्ट वाड्रा अपनी ठसक और गुरुर जरूर दिखा रहे हैं। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखा, ‘सुप्रभात, मैं सक्षम और मजबूत हूं। यदि मैं खुद पर भरोसा करता हूं तो मैं अपने सपनों को योजना में और उन्हें हकीकत में बदल सकता हूं।’

दरअसल कांग्रेस उपाध्यक्ष के जीजाजी के नाम से चर्चित वाड्रा अपने कारनामों के चलते हमेशा से विवादों में रहते हैं। आइये हम जानते हैं उनके ऐसे ही कुछ घोटाले, कुछ कारनामे-

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार को बीकानेर में हुए जमीन घोटालों की जांच सीबीआई से कराने के लिया कहा है। जिन विवादित जमीन सौदों की जांच की मांग की गई है उनमें रॉबर्ट वाड्रा के कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि, गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारे एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़े हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिये जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

इस विवाद में इससे पहले क्या हुआ था ?
गौरतलब है कि बीकानेर में जमीन सौदे में हुई जालसाजी पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने 31 दिसंबर, 2014 को विवादित जमीनों के 18 दाखिल-खारिज (Mutations) को रद्द कर दिया था। जानकारी के अनुसार 2006-07 में इन जमीनों पर कुछ गांव वालों को अवैध कब्जा सौंपा गया। आरोप है कि उन्हें फर्जी तरीके से सेना के महाजन फिल्ड रेंज से विस्थापित किसानों के तौर पर दिखाया गया था। इन्हीं जमीनों के सौदों का आरोप वाड्रा की कंपनियों पर भी लगे हैं। जबकि जो किसान असल में विस्थापित हुए थे, उन्हें 1992-1996 के बीच में ही जमीन अलॉट कर दिया गया था।

रॉबर्ट वाड्रा- डीएलएफ घोटाला-2012

  • 2012 में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर हरियाणा में डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीद कर भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा।
  • उनपर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन लेने का भी आरोप लगा। उनपर ये आरोप लगे कि इसके पीछे कंपनी को राजनीतिक फायदा पहुंचाना था।
  • वाड्रा पर यह भी कहा गया कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते उन्होंने कई जगह बेहद कम दाम पर जमीन खरीदने का काम किया।

पति के चलते प्रियंका वाड्रा पर भी उठ चुके हैं सवाल
इससे पहले हरियाणा में ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट सामने आने पर भी कांग्रेस में खलबली मच चुकी है। भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की फांस में तब वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा को भी घेरे में ले लिया था। नतीजा ये हुआ कि खुद प्रियंका वाड्रा को सामने आकर सफाई देनी पड़ी । उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति से उनके पति रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी का कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल वहां भी वाड्रा पर जमीन घोटाले का आरोप है। इसपर जांच के लिए बिठाए गए ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में 20 से ज्यादा प्रॉपर्टीज की जानकारी दी गई, जो वाड्रा और उनकी कंपनियों ने खरीदी थीं। इनमें से एक भूखंड को स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से खरीदा था। आरोपों के अनुसार ओंकारेश्वर से खरीदी गई प्रॉपर्टी को फिर लैंड यूज में बदलाव के बाद कहीं ज्यादा कीमत पर डीएलएफ के हाथ बेच दिया गया था और इस तरह 50.50 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हासिल किया गया। 

हरियाणा का जमीन घोटाला क्या है ?
रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा ने 2006 में हरियाणा के फरीदाबाद जिले के गांव अमीपुर में खेती की जमीन खरीदी थी। 5 एकड़ की इस जमीन के लिए उन्होंने 15 लाख रुपए चेक के जरिए चुकाए थे। इसी जमीन को लेकर उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने खेती की जमीन को बदलाव के बाद कहीं ज्यादा कीमत पर डीएलएफ के हाथों बेच दिया था और इस तरह 50.50 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हासिल किया गया।

प्रियंका की सफाई काम न आई
प्रियंका गांधी ने सफाई में कहा था कि उस प्लॉट की खरीद का स्काईलाइट के ट्रांजैक्शंस या डीएलएफ से कोई संबंध नहीं है और उसे ‘कथित’ स्काईलाइट लैंड डील के छह साल पहले खरीदा गया था। स्काईलाइट हॉस्प‍िटलिटी के कथित जमीन सौदे से पहले 28 अप्रैल, 2006 को प्रियंका गांधी वाड्रा ने 40 केनाल (5 एकड़) जमीन हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अमीपुर गांव में खरीदी थी। 

ढींगरा कमीशन ने जांच की जरूरत बताया था
ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस मामले की जांच की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा को डीएलएफ से जो पैसा मिला, क्या उसके एक हिस्से का इस्तेमाल उनकी पत्नी ने हरियाणा के फरीदाबाद में संपत्ति खरीदने के लिए किया। कमीशन ने 20 से ज्यादा ऐसी प्रॉपर्टी की रिपोर्ट दी है। ढींगरा कमीशन के अनुसार वाड्रा ने हसनपुर गांव में भी 16 लाख रुपये प्रति एकड़ के ऑफिशियल रेट के आधे से कम भाव पर एक प्रॉपर्टी खरीदी थी। जिसके सेल डीड को जीरो पेमेंट पर स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के फेवर में बनाया गया। यह काम स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के एकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने के लिए डीएलएफ को एनलिस्ट करने के लिए किया गया था।

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