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करप्शन पर जीरो टॉलरेंस का असर, सिस्टम में दिख रहा पीएम मोदी का डर !

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भ्रष्टाचार के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीरो टॉलरेंस नीति का कितना असर पड़ रहा है इसकी बानगी पीएनबी घाटाले में हुई त्वरित कार्रवाई से समझा जा सकता है। दरअसल मुंबई में पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा में 11360 करोड़ रुपए के फ्रॉड ट्रांजैक्शन मामले में गुरुवार (15 फरवरी) को बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में अरबपति ज्वैलरी डिजाइनर नीरव मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है और देश में 10-12 जगहों पर ED ने इस मामले को लेकर छापेमारी की है। इतना ही नहीं पीएनबी ने इस मामले में दस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले को जांच के लिए सीबीआई के पास भेज दिया है।

दरअसल भ्रष्टाचार के मामले में प्रधानमंत्री मोदी का खौफ सिस्टम में सिर चढ़कर बोल रहा है। 31 जनवरी को बैंक द्वारा एफआईआर किये जाने के बाद 2010 के कांग्रेसी शासन से चले आ रहे इस घोटाले का खुलासा पहली बार बुधवार (14 फरवरी) को हुआ। इसके तुरंत बाद गुरुवार को जिस क्विक एक्शन मोड में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है ऐसा देश में पहली बार ही हुआ है। दरअसल देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई के मामले में कांग्रेस की सरकारों का रिकॉर्ड बेहद खराब है। घोटालों का पता लगने के वर्षों बाद तक कार्रवाई न होना कांग्रेस की कार्यशैली के साथ फितरत बन गई थी। आइए हम देखते हैं कांग्रेस के कार्यकाल में हुए 10 वे घोटाले जो कांग्रेस की ढीली कार्यशैली के उदाहरण हैं।

मारुति घोटाला के लिए इमेज परिणाम

नंबर 1- जीप घोटाला
यह देश में होने वाला पहला घोटाला था। आजादी के बाद भारत सरकार ने एक लंदन की कंपनी से 2000 जीपों को सौदा किया। सौदा 80 लाख रुपये का था। लेकिन केवल 155 जीप ही मिल पाई। घोटाले में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वी के कृष्ण मेनन का हाथ होने की बात सामने आई। लेकिन 1955 में केस बंद कर दिया गया। जल्द ही मेनन नेहरू कैबिनेट में शामिल हो गए।

नंबर 2- मारुति घोटाला
मारुति कंपनी बनने से पहले यहां एक घोटाला हुआ जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम आया। मामले में पैसेंजर कार बनाने का लाइसेंस देने के लिए संजय गांधी की मदद की गई थी। 1971 से चल रहे घोटाले पर जस्टिस ए सी गुप्ता कमीशन ने अपनी रिपोर्ट जमा की। इस घोटाले में सोनिया गांधी का भी नाम आया था, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेसी सरकारों ने इसकी जांच में इतनी देरी कर दी कि इसके सही तथ्य मिलने कठिन हो गए।

नंबर 3- अंतुले ट्रस्ट घोटाला
अंतुले ट्रस्ट प्रकरण की गूंज 1981 में हुई। यह महाराष्ट में हुए सीमेंट घोटाले से संबद्ध था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ए आर अंतुले का नाम एक घोटाले में सामने आया। उन पर आरोप यह था कि उन्होंने इंदिरा गांधी प्रतिभा प्रतिष्ठान, संजय गांधी निराधार योजना, स्वावलंबन योजना आदि ट्रस्ट के लिए पैसा इकट्ठा किया था। जो लोग, खासकर बडे़ व्यापारी या मिल मालिक ट्रस्ट को पैसा देते थे, उन्हें सीमेंट का कोटा दिया जाता था।

नंबर 4- बोफोर्स घोटाला
1987 में एक स्वीडन की कंपनी बोफोर्स एबी से रिश्वत लेने के मामले में राजीव गांधी समेत कई बेड़ नेता फंसे। खबर सामने आई कि भारतीय 155 मिमी. के फील्ड होवित्जर के बोली में नेताओं ने करीब 64 करोड़ रुपये का घपला किया है। इस घोटाले में सोनिया गांधी का भी नाम इटली के ऑक्टोवियो क्वात्रोची कनेक्शन से जुड़ा, लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने इसकी जांच को लगातार भटकाया और अब तक इसमें किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सका है।

नंबर 5- तेलगी घोटाला
हजारों करोड़ रुपये का ये घोटाला 1990 से चल रहा था, लेकिन पहली एफआईआर 1995 में हुई। 2001 में इस मामले से जुड़ी पहली गिरफ्तारी हो सकी थी। आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस की कार्यशैली क्या रही है।

नंबर 6- शेयर घोटाला
1991 में कांग्रेस की सरकार ने उदारवादी अर्थव्यवस्था अपनाई। इसी का लाभ हर्षद मेहता ने उठाया और 4000 करोड़ से अधिक का घोटाला कर दिया। 1992 में हुए इस घोटाले का पता चला, लेकिन इस मामले में 2002 में सजा सुनाई गई।

नंबर 7- सीआरबी घोटाला
वर्ष 1996 में शेयर मार्केट और निवेशकों के कोलकाता के चैनरूप भंसाली ने अपनी कंपनी के जरिए फ्रॉड कर 1,200 करोड़ रुपए डुबो दिए। इस मामले में अबतक किसी को सजा नहीं हुई। कंपनी का मालिक चैनरूप भंसाली अपने परिवार समेत हांगकांग शिफ्ट हो गया।

नंबर 8- यूरिया घोटाला
26 मई, 1996 को 133 करोड़ रुपये घपले का मामला दर्ज हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहराव के करीबी नेशनल फर्टिलाइजर के प्रबंध निदेशक सी एस रामाकृष्णन ने यूरिया आयात के लिए पैसे दिए, जो कभी नहीं आया। इसमें किसी को सजा नहीं हुई।

नंबर 9- सत्यम घोटाला
2009 में भी कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार थी। इस दौरान सत्यम कंपनी के प्रमुख रामलिंगा राजू और उनके परिवार के सदस्यों ने निवेशकों को 14,162 करोड़ रुपए का चूना लगाया। रामालिंगा राजू ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि उसने सत्यम कम्प्यूटर्स के अकाउंट्स और इसके बैंक बैलेंस में मुनाफे को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया, लेकिन जब घोटाला सामने आया तो इसे छुपाने के लिए रिश्तेदारों की कंपनियों को अधिग्रहीत करने का भी प्रयास किया। इस मामले में कंपनी के मालिक सहित कईयों को सजा तो सुनाई गई, लेकिन सभी जमानत पर बाहर हैं।

नंबर 10- किंगफिशर घोटाला
भारत के बैंकों से 9000 करोड़ रुपये लेकर फरार होने वाले किंगफिशर के मालिक विजय माल्या को भी कांग्रेस के कार्यकाल में ही सहूलियतें मिली थीं। इसी के एवज में विजय माल्या ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को मुफ्त यात्राओं की भी सुविधाएं दी थीं। 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो उनपर कार्रवाई की गई जिसके बाद वह भारत से फरार हो गए। हालांकि सरकार ने उन्हें भगोड़ा भी घोषित कर रखा है।

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