Home विचार नोटबंदी पर देश का मूड भांप नहीं पाई कांग्रेस

नोटबंदी पर देश का मूड भांप नहीं पाई कांग्रेस

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नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के साथ पूरा देश खड़ा है. लेकिन नोटबंदी का विरोध करके कांग्रेस ने एक तरह से किरकिरी मोल ले ली है. कांग्रेस की इतनी लचर हालत कभी नहीं रही. देशभर में सांसदों और विधायकों की संख्या कम होने के साथ ही पार्टी का दायरा भी सिकुड़ता जा रहा है.

भले ही पार्टी के कुछ नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि राहुल गांधी कांग्रेस की कमान संभालें, लेकिन कुछ स्वर ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि अभी यह करना ठीक नहीं होगा. पार्टी के कई नेता अब भी राहुल गांधी की काबिलियत पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. और जिस हिसाब से कांग्रेस नेता संसद से सड़क तक नोटबंदी का विरोध कर रहे हैं उससे तो पता चलता है कि पूरी पार्टी ही दिशाहीन है.

नोटबंदी पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की लूट और संगठित लूटपाट वाली टिप्पणी पार्टी के गले की हड्डी बन गई. लोग 2जी घोटाले, कोयला घोटाले, कॉमनवेल्‍थ घोटाले से लेकर कैश फॉर वोट घोटाले तक गिनाने लगे. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के तेवर के सामने तो कांग्रेस एकदम से डिफेंसिव मोड में दिखी.

एटीएम के सामने लाइन में लगकर राहुल गांधी ने सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस फैसले के कारण पूरा देश कतार में है. लेकिन लोगों से सीधा संवाद कर प्रधानमंत्री यह बताने में कामयाब रहे कि भ्रष्टाचार और कालाधन पर लगाम लगाने के लिए यह कुछ दिनो का यह कष्ट ज्यादा कष्टकारक नहीं है. कांग्रेस ने जिस तरह से पिछले 70 साल से लोगों को कतार में खड़ा किया ये आपके लिए आखिरी कतार है.

अब मोदी के कहने पर लोग देश को काले धन से मुक्त कराने के लिए नोटबंदी से होने वाली परेशानियों का झेलने के लिए भी तैयार दिख रहे हैं. कतार में खड़े लोगों को हो रही परेशानी के देखकर सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दे रही है जबकि कांग्रेस यह कुतर्क दे रही है कि जब राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंट हैक हो सकता है तो आम लोगों का ट्रांजेक्शन कैसे सुरक्षित है.

अब तो हाल यह है कि नोटबंदी का विरोध करने वालों को काले धन के जमाखोर के रूप में देखा जाने लगा है. लोग अब पूछने लगे है कि आखिर नोटबदली से इन नेताओं को मिर्ची क्यों लगी है?

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