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भ्रष्टाचारियों के साथ ही खड़ी क्यों होती है कांग्रेस ?

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आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के बचाव में उतरकर कांग्रेस ने फिर साबित कर दिया है, कि उसकी विचारधारा सिर्फ जनता को लूटने की विचारधारा है। लालू और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज हुए हैं। उनके परिवार से जुड़ी हजारों करोड़ की बेनामी संपत्तियां उजागर हो चुकी हैं। वो अदालत द्वारा घोषित घोटालेबाज हैं। लचीले कानूनों का फायदा उठाकर वो जेल से बाहर घूम रहे हैं। फिर भी बेशर्म कांग्रेस उनका बचाव कर रही है। दरअसल किसी भ्रष्टाचारी का विरोध करने का कांग्रेस नेतृत्व में साहस ही नहीं है। क्योंकि, उसके दामन खुद भ्रष्टाचार के दागों से काले पड़े हैं।

भ्रष्ट लालू का दे रही है साथ
लालू यादव और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा मामला दर्ज हुआ है। उनपर आरोप है कि उन्होंने बेशकीमती जमीन के बदले रेलमंत्री रहते हुए रेलवे के दो होटलों को औने-पौने दाम पर लीज पर दे दिया। यही नहीं रिश्वत में पहले बेनामी संपत्ति खरीदी और फिर कई तरह की धांधली करके उसे अपने परिवार के नाम पर करा लिया। लेकिन, फिर भी कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। यहां तक कि सीबीआई की कार्रवाई को भी लालू की तरह ही राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बता रही है।

लालू का घोटाला कांग्रेस की देन !
लालू ने रेल मंत्री की हैसियत से जिस समय रेलवे के होटलों को लीज पर देने का घोटाला किया, उस समय केंद्र में मनमोहन के नाम वाली सोनिया-राहुल की सरकार थी। टेंडर घोटाला ही नहीं, मनमोहन सरकार में रहते हुए उनपर जमीन लेकर कई सांसदों को मंत्री बनवाने का भी आरोप है। यानी लालू के जो कारनामें आज सुर्खियां बन रही हैं, दरअसल उसके लिए सीधे तौर पर मनमोहन सरकार ही जिम्मेदार है। खबरों के अनुसार तब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन ने होटल सौदे की जांच की मांग को ही ठुकरा दिया था। दूसरी तरफ उन्होंने लालू के दबाव में रिश्वत देने वाले आरजेडी सांसदों को मंत्री बना दिया। जबकि संविधान के मुताबिक किसी को मंत्री बनाना या न बनाना सिर्फ प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है।

कांग्रेस का हाथ, चारा चोर के साथ
ये कोई पहला मामला नहीं है। जनता के खजाने को लूटने की लालू की आदत सी पड़ गई है। वो चारा घोटाले के सजायाफ्ता मुजरिम हैं। उनके चुनाव लड़ने तक पर भी पाबंदी है। लेकिन फिर भी कांग्रेस को उनसे परहेज नहीं। उनके भ्रष्टाचार से दिक्कत नहीं। यहां तक की यूपीए सरकार के दौरान सोनिया-मनमोहन ने उनकी संसद सदस्यता बचाने के लिए एक विवादित अध्यादेश लाने का भी कुचक्र रचा था। अभी भी कांग्रेस, लालू की पार्टी आरजेडी और जेडीयू के साथ बिहार में सत्ता पर बैठी है।

सोनिया-राहुल भी दागदार
लालू ही नहीं उनके भ्रष्टाचारों के संरक्षक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी का भी दामन पाक-साफ नहीं रहा है। अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील में इटली की अदालत में जो नाम सामने आए, उससे देश की राजनीति में खलबली मच चुकी है। यही नहीं नेशनल हेराल्ड मामले में भी दोनों मां-बेटों पर पार्टी फंड में हेरफेर का आरोप हैं। इस मामले में दोनों कोर्ट से जमानत लेकर जेल से बाहर हैं। जाहिर है कि जब कांग्रेस का नेतृत्व भी भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है, तो वो किस मुंह से लालू जैसे भ्रष्टाटाचारी का विरोध कर पाएंगे।

सोनिया-मनमोहन सरकार के घोटाले
कांग्रेस का भ्रष्टाचार से चोली-दामन का साथ रहा है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद ही कोई ऐसी कांग्रेसी सरकार रही हो जिसपर भ्रष्टाचार के दाग नहीं लगे हों। खासकर मनमोहन सरकार ने 10 साल के अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। कोयला घोटाला, 2जी घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला, टाट्रा ट्रक घोटाला, आदर्श घोटाला,एयरसेल-मैक्सिस घोटाला और एयर इंडिया घोटाला प्रमुख है। इन सारे घोटालों से देश के खजाने को जितनी चपत लगी है अगर उन्हें घोटालेबाजों से उगलवा लिया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो सकती है।

कांग्रेसियों का भ्रष्टाचार
दरअसल स्वतंत्र भारत में कांग्रेस का पूरा इतिहास ही भ्रष्टाचार से भरा पड़ा है। लेकिन सच्चाई ये है कि कांग्रेस ने कभी भ्रष्टाचार को अपराध माना ही नहीं। वो जनता के खजाने को लूटने-खसोटने को अपना धंधा मान बैठी। ये सिलसिला तब भी जारी है, जब लोकसभा में उसके सांसदों की संख्या ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। कांग्रेस के इस घोटाले की शुरुआत आजादी के एक साल बाद ही यानी 1948 में जीप खरीद घोटाले के साथ शुरू हो गई। इसके बाद बोफोर्स घोटाले के आरोपों के चलते तो पूर्व पीएम राजीव गांधी की सत्ता तक जा चुकी है। यही वजह है कि आज भी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपी हैं। वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम अपने बेटे कार्ति चिदंबरम के कारनामों के चलते भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं। कार्ति चिदंबरम पर अपने पिता के मंत्री रहते कई निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है। वहीं पूर्व रेल मंत्री पी के बंसल पर भी रिश्वत लेकर नियुक्तियां करने के आरोप लग चुके हैं।