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अनुच्छेद 370 को लेकर बंटी कांग्रेस, मोदी सरकार के फैसले के समर्थन में कांग्रेस के कई नेता

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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल और अनुच्छेद 370 को लेकर कांग्रेस ने भले ही संसद में जोरदार विरोध किया, लेकिन कांग्रेस के कई नेता मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी, भुवनेश्वर कालिता, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी ने आर्टिकल 370 पर सरकार के फैसले की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मेरे राजनीतिक गुरू राम मनोहर लोहिया जी हमेशा इस आर्टिकल के खिलाफ थे। देरी के बावजूद एक ऐतिहासिक गलती को आज सुधारा गया है।

इसी मामले पर कांग्रेस के रुख का विरोध करते हुए पार्टी के राज्यसभा सांसद और मुख्य सचेतक भुवनेश्वर कालिता ने सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। कालिता ने कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेश के तौर पर बांटने के कदम पर कांग्रेस के रुख के विरोध में इस्तीफा दिया है। उन्होंने एक पत्र में कहा कि मुझे पार्टी की ओर से व्हिप जारी करने को कहा गया था लेकिन यह सच है कि देश का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। यह व्हिप देश की जनभावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आज की कांग्रेस की विचारधारा से लगता है कि वह आत्महत्या कर रही है। मैं इसमें कांग्रेस का भागीदार नहीं बनना चाहता हूं। मैं इस व्हिप का पालन नहीं करूंगा और इस्तीफा देता हूं। कालिता ने यह दावा भी किया कि अब कांग्रेस को तबाह होने से कोई नहीं बचा सकता।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने भी समर्थन किया है। दीपेंद्र हुड्डा ने इस अनुच्छेद को लेकर ट्वीट किया कि 21वीं सदी में इसकी कोई जगह ही नहीं है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरी व्यक्तिगत राय रही है कि 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का औचित्य नहीं है और इसको हटना चाहिए। ऐसा सिर्फ देश की अखंडता के लिए ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर जो हमारे देश का अभिन्न अंग है, के हित में भी है। अब सरकार की यह जिम्मेदारी है कि इसका क्रियान्वयन शांति और विश्वास के वातावरण में हो।

इसी तरह मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट कर कहा कि दुर्भाग्य से आर्टिकल 370 के मसले को लिबरल और कट्टर की बहस में उलझाया जा रहा है। पार्टियों को अपने वैचारिक मतभेदों को किनारे कर भारत की संप्रभुता, कश्मीर शांति, युवाओं को रोजगार और कश्मीरी पंडितों के लिए न्याय के लिहाज से सोचना चाहिए।

रायबरेली से कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह ने भी इसका समर्थन किया।

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