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कांग्रेस ने कहा, सिख दंगा हुआ तो हुआ, उससे क्या

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तीन हजार से ज्यादा सिखों की हत्या की दोषी कांग्रेस पार्टी का गैर जिम्मेदार रवैया फिर सामने आ गया है। कांग्रेस के रणनीतिकार और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के गुरु सैम पित्रोदा ने पहले कहा कि सिख दंगा हुआ तो हुआ, उससे क्या। ये बयान उन्होंने मीडिया से बातचीत में दिया। उनके इस बयान से कांग्रेस का असली चरित्र उजागर हो गया है। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली की सड़कों पर खुलेआम सिखों का कत्लेआम हुआ और इसके निर्देश सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से दिए गए थे। यह सच्चाई साबित हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस अफसोस जताना तो दूर, उल्टे-सीधे बयान देकर सिखों की भावनाओं को आहत कर रही है। विवाद बढ़ने के बाद सैम पित्रोदा अपने बयान से इनकार कर रहे हैं, लेकिन उनका पूरा वीडियो मीडिया में उपलब्ध है।

राजीव ने क्या कहा था
सिख दंगों को करीब 15 दिन ही हुए थे जब कांग्रेस पार्टी ने जोर-शोर से इंदिरा गांधी का जन्मदिन मनाने का एलान किया। 19 नवंबर, 1984 को दिल्ली के वोट क्लब पर रैली को संबोधित करते हुए राजीव गांधी ने कहा था,  ‘हमें मालूम है कि लोगों के अंदर कितना क्रोध है, लेकिन जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास की धरती हिलती है’।

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नानावटी कमीशन ने बताया सच
देश के सबसे बड़े नरसंहार के लिए गठित नानावती कमीशन ने माना था कि सिख दंगों के दौरान सरकार ने अपने ही लोगों की हत्या की थी। आयोग की जांच में बताया गया कि इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दफ्तर से निर्देश दिए गए थे।

बीजेपी ने की आलोचना
पित्रोदा के इस बयान पर केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पित्रोदा की टिप्पणियां “हैरान” करने वाली हैं और किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी। जावड़ेकर ने कहा, “उन्होंने (पित्रोदा) कहा कि 1984 में नरसंहार हुआ. तो क्या? देश को यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और हम इसे बर्दाशत नहीं कर सकते।” बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर लोगों की भावनाओं से खेलने का आरोप लगाया। जावड़ेकर ने कहा, “पित्रोदा राजीव गांधी के साथी और राहुल गांधी के गुरु हैं. अगर गुरु ऐसा है तो ‘चेला’ कैसा होगा? कांग्रेस यही कर रही है। पूरी तरह से जनता की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील।”

ताज्जुब यह है कि इतना होने के बाद भी कांग्रेस राजीव गांधी को शहीद मानती है।

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