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कांग्रेस सरकारें थीं देश के गुनहगारों की मददगार, कानूनी हिसाब करने में जुटी है मोदी सरकार

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ओत्तावियो क्वात्रोकी और क्रिश्चियन मिशेल जैसे नामों की चर्चा जब होती है, तब रक्षा सौदों में हुई दलाली के साथ ही तत्कालीन कांग्रेस सरकारों की भूमिका भी सीधे कटघरे में आ जाती है। पूरा देश देख चुका है कि कांग्रेस ने अपना बचाव करने के लिए कैसे देश के गुनहगारों की मदद की थी। वहीं देश की मौजूदा सरकार है, जो गुनहगारों का तेज कानूनी हिसाब करने में जुटी है।  

तहव्वुर राणा जल्द होगा भारत के हवाले
मोदी सरकार की कोशिशों से 26/11 मुंबई हमलों के एक बड़े गुनहगार तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की पूरी उम्मीद बनी है। 2008 में हुआ यह हमला देश पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक है और उसी की साजिश रचने के मामले में राणा अभी अमेरिका में 14 साल की सजा काट रहा है। मोदी सरकार पाकिस्तानी मूल के इस कैनेडियन नागरिक के प्रत्यर्पण को लेकर जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी करने में जुटी है।

हेडली भी लाया जाएगा
राणा के अलावा सरकार मुंबई हमलों के एक और शातिर गुनहगार डेविड कोलमैन हेडली को भी भारत लाने के प्रयासों में जुटी है। विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने पिछले दिनों बताया था कि इस सिलसिले में सरकार अमेरिकी एजेंसियों के साथ संपर्क में है। गौर करने वाली बात है कि एनआईए ने दिसंबर के मध्य में अमेरिका का दौरा किया था जहां मुंबई हमले के दोषियों को सजा दिलाने को लेकर उसने भारत की प्रतिबद्धता जताई थी।

शिकंजे में मिशेल
जरा सोचिए कि अगर कांग्रेस सरकार होती तो क्या ऑगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील का बिचौलिया मिशेल आज भारत में कानूनी शिकंजे में छटपटा रहा होता? लेकिन मोदी सरकार में आज न सिर्फ उसका खुद का हिसाब हो रहा है, बल्कि उसे संरक्षण देने वाला कांग्रेस हाईकमान भी भयभीत है। यह मोदी सरकार का ही प्रयास था कि पिछले महीने मिशेल का भारत प्रत्यर्पण संभव हो पाया। तब से वह सीबीआई, प्रवर्तन निदेशलय से लेकर न्यायिक हिरासत में अपनी जिंदगी काटने को मजबूर है।  

लद गए माल्या के मौज के दिन
शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को ब्रिटेन की अदालत मंजूर कर चुकी है। मोदी सरकार ने देश के आर्थिक भगोड़ों पर सख्ती में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह उसी का नतीजा है कि भारत लाए जाने को लेकर जहां माल्या घबराया हुआ है, वहीं उसे मनमाना लोन देने वाली पूर्ववर्ती सरकार के कर्ता-धर्ता भी डरे हुए हैं। पिछले दिनों विजय माल्या को मुंबई का PMLA कोर्ट Fugitive Economic Offender घोषित कर चुका है। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही वह देश का पहला भगोड़ा आर्थिक अपराधी बन चुका है। मोदी सरकार द्वारा बनाए गए इस कानून में जांच एजेंसियों को भगोड़े आर्थिक अपराधियों की सारी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार है।

जब्त होती जा रहीं नीरव मोदी की संपत्तियां
प्रवर्तन निदेशालय जहां माल्या की देश-विदेश की संपत्तियां जब्त करने की कार्रवाई में तेजी लाने वाला है, वहीं एक और आर्थिक भगोड़े नीरव मोदी की संपत्तियां जब्त होने का दौर जारी है। दो महीने पहले PMLA के तहत नीरव मोदी की दुबई में 56 करोड़ रुपये मूल्य की 11 संपत्तियां जब्त की गईं। इससे पहले नीरव मोदी और उसके परिवार की भारत, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों में 637 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी थी। नीरव मोदी के साथ पीएनबी घोटाले के एक और आरोपी मेहुल चोकसी पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।  

जब एंडरसन को भागने दिया था कांग्रेस ने
2-3 दिसंबर, 1984 की मध्यरात्रि को हुई भोपाल गैस त्रासदी को यह देश कभी भूल नहीं सकता। एक तो इसलिए कि बड़ी संख्या में मासूमों सहित हजारों लोग जिंदगी से हाथ धो बैठे, दूसरा इसलिए कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस घटना के लिए जिम्मेदार वारेन एंडरसन के भारत से भागने का रास्ता साफ कर दिया। गौर करने वाली बात है कि एंडरसन को आईपीसी की ऐसी धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था जिसमें जमानत पाना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन गैस कांड के महज कुछ घंटों के भीतर वह भारत से भाग चुका था। फर्क साफ है-कांग्रेस की सरकारें देश के गुनहगारों को भगाने में मददगार रही हैं, तो मोदी सरकार ऐसे हर गुनहगार का हिसाब करने में जुटी है।

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