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वोट के लिए कांग्रेस का दोहरा चरित्र एक बार फिर सबके सामने है

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गुजरात के सोमनाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं के लिए रखे रजिस्टर में राहुल गांधी की एंट्री दर्ज होने के बाद कांग्रेस अपने बचाव में अफरातफरी भरे कदम उठाती नजर आई। यह सब देखना कुछ ऐसा था जैसे इस एंट्री से कांग्रेस को अपने पैरों पर कुल्हाड़ी चल जाने का ज्ञान हुआ हो। अब स्थिति यह है कि एक तरफ राहुल को जनेऊधारी बताने में पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ रही और दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल हैं जो अयोध्या में राम मंदिर नहीं बन सके इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में जोर लगाये हुए हैं। ऐसे में सवाल है क्या जनेऊधारी राहुल गांधी राम मंदिर पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे।

जब वोटरों को चकमा देने के इरादे पर फिरा पानी

गैर हिन्दू रजिस्टर में राहुल का नाम तब सामने आया जब गुजरात विधानसभा चुनावों में  हिन्दू वोट पाने के लिए वह मंदिर-मंदिर के चक्कर लगाते जा रहे थे। लेकिन सोमनाथ मंदिर में उनकी जिस रूप में एंट्री दिखी उसने वोटरों को चुनावी चकमा देने की उनकी कोशिश पर पानी फेर दिया। ऐसे में कांग्रेस को कुछ सूझ ही नहीं रहा था और अंत में पार्टी ने खुद एक ऐसी तस्वीर जारी कर दी जिसमें राहुल कोट के ऊपर जनेऊ धारण किये हुए दिखे। चुनावी मौसम है इसलिए कांग्रेस हर हाल में यह साबित करने पर तुली हुई है कि राहुल जनेऊधारी हैं भले इसके लिए पार्टी की कोई भी दलील वोटरों के गले ना उतरे।

राम मंदिर पर रुख स्पष्ट करेंगे ‘जनेऊधारी’ राहुल?

चलिए ऐसा अगर मान भी लिया जाए कि राहुल जनेऊधारी रहे हैं तो क्या वह उस नाते अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर अपना रुख साफ करेंगे? गौर करने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर को लेकर सुनवाई शुरू हो चुकी है। हिन्दुओं के लिए यह एक भावनात्मक मुद्दा तो रहा ही है। कानूनी पहलुओं से देखें तो लखनऊ हाईकोर्ट की इलाहाबाद बेंच का फैसला मंदिर निर्माण के पक्ष में रहा था जिस पर आगे सुप्रीम कोर्ट को आखिरी फैसला देना है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि वोटों की खातिर राहुल हिन्दू होने के दावे तो करेंगे लेकिन जब हिंदुओं की भावना से जुड़े मुद्दे की बात होगी तो वो गोलमोल ही करेंगे।

सुनवाई टालने में जुटे हैं कांग्रेस के कपिल सिब्बल

तस्वीर का एक दूसरा पहलू यह भी है कि एक तरफ कांग्रेस अपने भावी अध्यक्ष के ‘जनेऊ’ पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस के कपिल सिब्बल राम मंदिर निर्माण के मामले पर हो रही सुनवाई को टालने के लिए अदालत में हर दांव आजमाने में लगे हैं। सिब्बल सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पहले ही दिन उन्होंने इसे जुलाई 2019 तक यह कहते हुए टालने की अपील की कि मामला राजनीतिक हो चुका है। अब भला कौन होगा जिसको कांग्रेस का यह दांव समझ में ना आएगा। दरअसल कांग्रेस की यह शातिराना चुनावी चाल है जिसमें वो राहुल को जनेऊधारी बताने के साथ ही अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के दांव भी आजमा रही है। लेकिन कहते हैं ना…ये तो पब्लिक है सब जानती है। चुनावी मौसम में कांग्रेस का दोहरा चरित्र एक बार फिर उजागर हो चुका है।

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