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मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल यूएई से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया

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अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीति की वजह से ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण पर राजी हुआ है। जाहिर है कि 3700 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में मुख्य आरोपी है। अगस्ता वेस्टलैंड ने भारतीय वायु सेना के अधिकारियों और सोनिया गांधी समेत तत्कालीन यूपीए सरकार के लोगों को प्रभावित कर कंपनी की डील दिलाने में मदद के लिए मिशेल की नियुक्ति की थी। भारत लाने के बाद सीबीआई क्रिश्चिएन मिशेल से पूछताछ में लगी है।

मिशेल के भारत आने से सोनिया गांधी की बढ़ेगी मुश्किल
क्रिश्चियन मिशेल के भारत लाए जाने के बाद आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। क्रिश्चियन पर 3,700 करोड़ रुपये की अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील में मनी लॉन्ड्रिंग करने, घूस लेने और धोखाधड़ी करने का आरोप है।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले क्रिश्चियन के खिलाफ भारत की ओर से लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए थे। ऐसे में यूएई की सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन जज अब्दुल अजीज अब्दुल्ला ने प्रत्यर्पण के फैसले पर रोक लगा दी थी। क्रिश्चियन को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद फरवरी 2017 में भारतीय अधिकारियों ने दुबई से क्रिश्चियन के प्रत्यर्पण की मांग की थी। क्रिश्चियन के वकील ने दावा किया था कि भारत की ओर से किया गया प्रत्यर्पण का अनुरोध कानूनी रूप से वैध नहीं है। अब दुबई कोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल के बचाव के तर्कों को अस्वीकार कर दिया है। क्रिश्चियन पर आरोप है कि उसने घूस की रकम ट्रांसफर करने के लिए दो कंपनियों ग्लोबल सर्विसेज एफजेडई, दुबई और ग्लोबल ट्रेड एंड कॉमर्स सर्विसेज, लंदन का इस्तेमाल किया था। 

जानिए अगस्ता वेस्टलैंड मामले में क्यों बढ़ी कांग्रेस की मुश्किल
विवादित अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। गौरतलब है कि यूपीए सरकार के दौरान इटली की कंपनी से हुए 3,700 करोड़ रुपये के इस सौदे में सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के बड़े नेताओं की संलिप्तिता सामने आ चुकी है। मिशेल के प्रत्यर्पण के आदेश को सीबीआइ और ईडी के पक्ष में बड़ी सफलता माना जा रहा है। ईडी ने मिशेल के खिलाफ जून, 2016 में जारी अपने आरोप पत्र में कहा है कि उसने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 360 करोड़ रुपये की दलाली ली थी। इस रकम को उसे भारतीय राजनेताओं, एयर फोर्स अधिकारियों और ब्यूरोक्रेट्स को देने थे। इस मामले में सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के बड़े नेताओं का नाम भी सामने आया है। जाहिर है कि फरवरी, 2017 में मिशेल को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया था। मिशेल के वकील ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उनके मुवक्किल पर दबाव बना रही है। हालांकि सीबीआई ने इन आरोपों से साफ इन्कार किया था। 

क्या है अगस्ता वेस्टलैंड मामला
आपको बताते हैं कि आखिर यह पूरा मामला है क्या। वीवीआइपी हेलिकॉप्टर अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 12 चॉपर ख्ररीदे जाने थे। इसके लिए मिशेल समेत तीन बिचौलियों के जरिए कथित रूप से दो भारतीयों को रिश्वत दी गई थी। मिशेल ने दुबई की अपनी कंपनी ग्लोबल सर्विसेज के जरिए यह रकम हासिल की थी। यूपीए सरकार के कार्यकाल में इन बिचौलियों ने भारतीय वायुसेना के अफसरों को प्रभावित करने की कोशिश की। कहा जाता है कि इसके बाद ही हेलिकॉप्टर खरीदने की एक अनिवार्य शर्त में छूट दी गई। वर्ष 2005 में हेलिकॉप्टर की उड़ान की ऊंचाई की सीमा 6,000 मीटर से कम करके 4,500 मीटर कर दी गई थी। इस मामले में पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी और उनके रिश्तेदार को भी आरोपी बनाया गया है।

क्रिश्चियन मिशेल के भारत प्रत्यर्पण से कांग्रेस पार्टी में बेचैनी बढ़ गई है। इसका कारण भी है, क्योंकि यूपीए शासन के दौरान हुई इस हेलिकॉप्टर डील में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी  का भी नाम सामने आया था। डालते हैं एक नजर-

अगस्ता वेस्टलैंड सौदे का सोनिया गांधी कनेक्शन
अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 37 अरब रुपये के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर खरीदने थे, जिसमें 360 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी की बात सामने आई। इटली की कोर्ट ने माना कि इस मामले में भारतीय अफसरों और राजनेताओं को 15 मिलियन डॉलर रिश्वत दी गई। कोर्ट ने एक नोट में इशारा किया था कि सोनिया गांधी सौदे में पीछे से अहम भूमिका निभा रही थीं। कोर्ट ने 225 पेज के फैसले में चार बार सोनिया का जिक्र किया। हालांकि कांग्रेस मोदी सरकार पर आरोप लगा रही है कि उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि अभी तक सामने आए सारे तथ्य ये कहते हैं कि इस मामले में सोनिया गांधी शामिल थीं। दरअसल ये और पुख्ता इसलिए होता है कि इसकी जांच 2013 में  तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ही शुरू की थी। ए के एंटनी की अगुआई में इस जांच को आगे बढ़ाया गया था।

कांग्रेस की बौखलाहट इसलिए भी दिख रही है कि वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद के सौदे में बिचौलिये का काम करने वाले इटली के नागरिक जेम्स क्रिश्चियन मिशेल को दुबई में हिरासत में लिया गया था और अब उसे जल्द ही भारत को सौंप दिया जाएगा। इस खबर से कांग्रेस पार्टी बुरी तरह से डरी हुई है। क्योंकि उसे डर है कि वो कहीं सोनिया गांधी के खिलाफ बयान न दे दे।गौरतलब है कि बिचौलिया जेम्स क्रिश्चियन मिशेल एक अहम कड़ी है। आरोप है कि उसी के जरिये इस सौदे में कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेताओं ने रिश्वत ली थी। 

घोटाले में सोनिया गांधी हैं शामिल!
2010 में हेलीकॉप्टर बनाने वाली इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी के लिए 12 हेलिकॉप्टर खरीदने का सौदा हुआ था। 12 हेलीकॉप्टरों के लिए कुल 3700 करोड़ रुपये देना तय हुआ था। लेकिन तभी यह पोल खुल गई कि कंपनी ने भारत में 125 करोड़ रुपये घूस दिए हैं। इटली की अदालत में यह साबित हुआ कुल डील का 10 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत में देने की बात तय हुई थी।

घूसखोरी का भंडाफोड़ होने के बाद 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने डील रद्द कर दिया। इसके बाद पूर्व एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी समेत 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया। इटली की कोर्ट की कार्रवाई में यह बात सामने आई थी कि भारत के ‘सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार’ ने सौदे में 125 करोड़ रुपये कमीशन लिया।

चूंकि इस मामले का भंडाफोड़ इटली में ही हुआ था, लिहाजा वहां भी इस पर मुकदमा चला। मिलान शहर की अदालत के फैसले के पेज नंबर-193 और 204 पर कुल मिलाकर 4 बार सोनिया गांधी का नाम आया। इसमें उनके नाम की स्पेलिंग Signora Gandhi लिखा गया था। कोर्ट ने कहा कि सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने बिचौलिए जरिए 125 करोड़ रुपये कमीशन लिया। कुल 225 करोड़ रुपए रिश्वत की लेन-देन हुई, जिसमें से 52 प्रतिशत हिस्सा कांग्रेस के नेताओं को दिया गया। 28 प्रतिशत सरकारी अफसरों को और 20 प्रतिशत एयरफोर्स के अफसरों को मिला। इस केस में तब के एयरफोर्स चीफ एसपी त्यागी को भी आरोपी बनाया गया।

इटली की अदालत में फैसला हुआ
2016 में इटली की निचली अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के दो अफसरों को रिश्वत देने का दोषी ठहराया। उन्होंने कोर्ट के आगे कबूला कि भारत को हेलीकॉप्टर की 3,700 करोड़ रुपये की डील के बदले कंपनी ने कांग्रेस पार्टी के टॉप नेताओं को रिश्वत दी। रिश्वत लेने वालों को सजा नहीं दी जा सकती थी, क्योंकि वो इटली से बाहर रह रहे हैं। हालांकि इस साल जनवरी में इटली की ऊपरी अदालत ने दोनों अधिकारियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उन्हें सजा देने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। हालांकि कोर्ट में यह बात साबित हुई कि रिश्वत की लेन-देन हुई है। इटली की कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने अपनी जीत बताया। लेकिन सीबीआई और ईडी ने साफ कह दिया कि ये मुकदमा भारत में चलेगा और इटली की अदालत के फैसले से इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सोनिया गांधी के लिए मुश्किल
दरअसल इस केस में 34 भारतीय और विदेशी नागरिकों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। जेम्स जून से दुबई पुलिस की हिरासत में है और अब भारतीय एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही हैं। दुबई पुलिस ने जेम्स क्रिश्चियन मिशेल को भारत सरकार के टिप ऑफ पर भी हिरासत में लिया था। इस केस में सबसे खास बात यह है कि इस बिचौलिए ने 1997 से 2013 के बीच भारत के 300 चक्कर लगाए थे। जैसे ही घोटाला खुला वो भारत छोड़कर भाग गया। तब से कानूनी लड़ाई लगातार जारी है और अब ये अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।

अब आपको बताते हैं गांधी परिवार के घोटालों के बारे में, नेहरू के समय से लेकर आज के राहुल के वक्त तक किन-किन घोटालों को अंजाम दे चुका है देश का सबसे भ्रष्ट राजनीतिक परिवार पढ़िए-

मूंदड़ा स्कैंडल
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे घोटाले के तौर पर याद किया जाता है। इसके छींटें प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर भी पड़े। दरअसल 1957 में मूंदड़ा ने एलआईसी के माध्यम से अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश कराया था। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इंवेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। जब तक एलआईसी को पता चला, उसे कई करोड़ का नुकसान हो चुका था। इस केस को फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू ख़ामोशी से निपटाना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें अंतत: पद छोड़ना पड़ा।

मारुति घोटाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। वर्ष 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। बताया जा रहा है कि कंपनी को सरकार की ओर से टैक्स, फंड और कई छूटें मिलीं थी।

बोफोर्स घोटाला
बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये के होवित्जर तोप का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी थी। आरोप है कि इसमें दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने बतौर कमीशन 64 करोड़ रुपये दिये थे। इस सौदे में गांधी परिवार के करीबी और इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के अर्जेंटीना चले जाने पर सोनिया गांधी पर भी आरोप लगे।

नेशनल हेराल्ड मामले में करोड़ की हेराफेरी
गांधी परिवार पर अवैध रूप से नेशनल हेराल्ड की मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति हड़पने का आरोप है। वर्ष 1938 में कांग्रेस ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी। यह कंपनी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज नाम से तीन अखबार प्रकाशित करती थी। एक अप्रैल, 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया और राहुल गांधी ने ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नाम की कंपनी खोली और एजेएल को 90 करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन दिया। एजेएल यंग इंडिया कंपनी को लोन नहीं चुका पाई। इस सौदे की वजह से सोनिया और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एजेएल की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया। इस कंपनी में मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के 12-12 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76 प्रतिशत शेयर हैं। गांधी परिवार पर अवैध रूप से इस संपत्ति का अधिग्रहण करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। इस मामले में सोनिया और राहुल के विरुद्ध संपत्ति के बेजा इस्तेमाल का केस दर्ज कराया गया। अब इसी मामले में आयकर विभाग ने प्रियंका गांधी की संलिप्तता भी पाई है।

एक नजर कांग्रेस की सरकारों में हुए कुछ प्रमुख घोटालों पर-

कोयला घोटाला (2012)  1.86 लाख करोड़ रुपये
2जी घोटाला (2008)  1.76 लाख करोड़ रुपये
महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला 70,000करोड़ रुपये
कामनवेल्थ घोटाला (2010) 35,000 करोड़ रुपये
स्कार्पियन पनडुब्बी घोटाला  1,100 करोड़ रुपये
अगस्ता वेस्ट लैंड घोटाला 3,600 करोड़ रुपये
टाट्रा ट्रक घोटाला (2012) 14 करोड़ रुपये

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