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न्यू इंडिया में बदल रही है महिलाओं की भूमिका

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‘सामाजिक, आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य, जिम्मेदारी और न्यू इंडिया का सपना है।’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन न्यू इंडिया के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने हर मंच से न्यू इंडिया में महिलाओं की बराबर की भागीदारी पर बल दिया है। प्रधानमंत्री न्यू इंडिया में सिर्फ महिलाओं के विकास की बात नहीं करते हैं, बल्कि वह कहते हैं कि “महिला विकास से आगे बढ़कर आज भारत का मंत्र है- महिलाओं के नेतृत्व में विकास।”

श्री मोदी महिलाओं को राष्ट्र निर्माता बताते हैं, उनका स्पष्ट कहना है कि सामाजिक और आर्थिक तौर पर महिलाओं का सशक्तिकरण ही, उन्हें न्यू इंडिया में प्रभावशाली भूमिका के लिए तैयार कर सकता है। यह सिर्फ बातों में नहीं है, पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार लगातार इस दिशा में काम भी कर रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि आज देश में इस तरह का वातावरण तैयार हो चुका है, जहां समाज में महिलाओं की अग्रणी भूमिका को लेकर सोचा जाने लगा है। महिलाओं को लेकर दशकों से चली आ रही दकियानूसी सोच में बदलाव आ रहा है। इससे भी आगे बढ़कर महिलाएं आज अपने दम पर अपना रास्ता, अपना भविष्य तय कर रही हैं।

पहली बार मंत्रिमंडल में 9 महिला मंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई, 2014 में जब देश की बागडोर संभाली थी, तभी उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में 9 महिला मंत्रियों को शामिल कर महिलाओं के नेतृत्व में विकास को लेकर अपने दृष्टिकोंण को दिखा दिया था। ऐसा पहली बार हुआ है कि केंद्र सरकार में 9 महिला मंत्री हैं और उनमें भी 6 कैबिनेट मंत्री हैं। श्रीमती सुषमा स्वराज जहां विदेश मंत्री की जिम्मेदारी निभा रही हैं, वहीं श्रीमती निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्री के पद पर हैं। इनके अलावा उमा भारती, मेनका गांधी, स्मृति ईरानी और हरसिमरत कौर कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि कृष्णा पाल, साध्वी निरंजना ज्योति और अनुप्रिया पटेल राज्य मंत्री हैं। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) में भी पहली बार दो महिला मंत्री शामिल हैं। देश की सबसे प्रमुख इस समिति के सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं।

सेना में महिला अधिकारियों को जिम्मेदारी
महिलाओं के नेतृत्व में विकास की सोच जब आगे बढ़ी तो हर क्षेत्र में फैलती गई। सेना में महिला अधिकारियों को पहले ग्राउंड पर ही तैनाती मिलती थी, उन्हें लड़ाकू विमान उड़ाने की अनुमति नहीं थी। मोदी सरकार के महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने की नीति का ही नतीजा है कि आज सेना में महिला अफसरों को ऐसी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जो पहले सिर्फ पुरुष अधिकारियों को दी जाती थीं। सेना में पहले केवल पुरुष पायलट ही लड़ाकू विमान उड़ाते थे, लेकिन अब फ्लाइंग ऑफिसर अवनि चतुर्वेदी लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बन चुकी हैं। अवनि के अलावा मोहना सिंह और भावना कंठ की भी फाइटर पायलट के रूप में नियुक्ति हुई है। मोदी सरकार ने 2015 में पहली बार नौसेना में महिलाओं को शामिल करने का निर्णय लिया और इसी फैसले के बाद शुभांगी स्वरूप के रूप में नेवी को पहली महिला पायलट मिली। सेना में महिला सशक्तिकरण के चलते ही इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में महिला कमांडो दस्ते ने हैरतअंगेज करतब दिखाए।

प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को प्राथमिकता
सरकार और सेना में महिलाओं की भूमिका बढ़ने से बड़े स्तर पर यह संदेश गया कि अब वो वक्त आ गया है, जब एक बार फिर महिलाएं अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार हैं। इस संदेश को और प्रभावी करने के लिए मोदी सरकार ने जनसामान्य के बीच महिलाओं की स्थिति बेहतर करने की भी ठानी। सरकार की हर योजना में महिलाओं को केंद्र में रखा गया। प्रधानमंत्री आवास योजना का ही उदाहरण लें, इस योजना में मोदी सरकार ने महिलाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। इस योजना के तहत शहरों और गांवों में 2022 तक जो 2 करोड़ मकान बनाए जाने हैं, उनकी रजिस्ट्री या तो सिर्फ महिलाओं के नाम पर या फिर महिला और उसके पति दोनों के नाम पर करना अनिवार्य किया गया है। यह समाज में महिलाओं को मजबूत करने की दिशा में बहुत प्रभावकारी है, क्योंकि अब सरकारी मदद से जिन्हें मकान दिया जाएगा, आधिकारिक तौर पर उन परिवारों की मुखिया महिला होगी।

महिला उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने कई और ऐसी पहल की हैं, जिनसे महिलाओं में आत्मविश्वास जागा है और वो अपने दम पर आर्थिक और सामाजिक तौर पर सशक्त होने के लिए आगे आई हैं। जैसे कि, केंद्र सरकार ने युवाओं और बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने के लिए मुद्रा योजना शुरू की, जिसमें बगैर किसी बैंक गारंटी के स्वरोजगार के लिए ऋण दिया जाता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस मुद्रा योजना का सबसे ज्यादा लाभ महिलाएं उठा रही हैं। मुद्रा योजना के अंतर्गत 11 करोड़ से अधिक लाभार्थीं हैं, लेकिन इनमें 70 प्रतिशत से अधिक लगभग 7.88 करोड़ महिला उद्यमी हैं।

इसी प्रकार महिला उद्यमियों के प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई स्टैंडअप इंडिया योजना का भी महिलाओं ने फायदा उठाया और इसके अंतर्गत लगभग 31,000 महिला उद्यमियों को 6,895 करोड़ का लोन दिया गाया है। मतलब साफ है कि महिलाओं को जब अवसर मिलता है, तो वह उसका फायदा उठाने में सबसे आगे रहती हैं। इसी प्रकार जनधन योजना को ही लें, देश की ग्रामीण आबादी को बैंकिंग सुविधा से जोड़ने के लिए शुरू की गई इस महात्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाने में भी महिलाएं सबसे आगे हैं। जनधन योजना के अंतर्गत 31 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं और इनमें से आधे से अधिक यानी लगभग 16.42 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर खुले हैं।

न्यू इंडिया में भागीदार बन रही हैं महिलाएं
न्यू इंडिया में महिलाएं आगे बढ़ना चाहती हैं, अपने परिवार का आर्थिक सहारा बनना चाहती हैं, बस उन्हें उचित माहौल और अवसर की तलाश होती है। मोदी सरकार बस यही तो कर रही है। जैसे कामकाजी महिलाओं को रोजगार के ज्यादा अवसर मिले इसके लिए श्रम कानून में बदलाव कर उन्हें रात्रि पाली में भी नौकरी का विकल्प दिया गया है। नौकरीपेशा महिलाओं को गर्भवती होने पर मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया है, ताकि वे बेफिक्र होकर अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभा सकें और उन्हें पूरा करने के बाद दोबारा नौकरी पर जा सकें। इसी प्रकार 50 से अधिक कर्मचारियों वाले दफ्तरों में क्रेच की सुविधा अनिवार्य की गई है। यही वो छोटी-छोटी चीजें हैं तो महिलाओं में आत्मविश्वास जगा रही हैं। नारी शक्ति का यही आत्मविश्वास है जिसकी वजह से मुंबई के माटुंगा और राजस्थान के गांधी नगर रेलवे स्टेशन का पूरा संचालन महिला कर्मचारी संभाल रही हैं। केंद्र सरकार ने बस उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया और इन महिला कर्मचारियों ने वो कर दिखाया जो असंभव सा लगता था।

न्यू इंडिया की शिक्षित और स्वस्थ्य नारी
एक और मुद्दा है महिला की शिक्षा व स्वास्थ्य का, जो महिलाओं के आगे बढ़ने में सबसे बड़ा अवरोधक है। इसके लिए भी मोदी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी 2018 को चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि “जब हम महिला को शिक्षित करने में मदद करते हैं, तो पूरे परिवार को शिक्षित करने में मदद करते हैं, जब हम उसे अच्छे स्वास्थ्य की सुविधा देते हैं, तो इससे पूरे परिवार को स्वास्थ्य की उत्तम सुविधा मिलती है।” इसके लिए सरकार बनने के बाद ही काम शुरू कर दिया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने बेटियों के प्रति सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का वादा 2014 में चुनाव के वक्त अपने घोषणापत्र में भी किया था। जिन 161 जिलों में इस अभियान को शुरू किया गया है, वहां कन्या भ्रूण हत्या पर लगाम लगी है और प्रति हजार लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओं योजना को देशभर के 640 जिलों में लागू किया जा रहा है।

सरकार ने जब रास्ता दिखाया तो समाज भी आगे आया, सेल्फी विथ डॉटर सरकार की नहीं बल्कि समाज की सोच का नतीजा था, इसे हरियाणा के एक गांव के लोगों ने शुरू किया था, जो बाद में पूरे देश में एक अभियान बन गया। इसी प्रकार सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत सरकार ने लड़कियों के भविष्य के लिए बचत खाते में अधिक ब्याज देने का फैसला किया और इसे देश के नागरिकों ने हाथों हाथ लिया। आज देशभर में बेटियों के आर्थिक सशक्तिकरण को बल देने वाली इस योजना के तहत 1.26 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं।

शिक्षित और स्वस्थ्य नारी ही न्यू इंडिया की अगुवाई कर सकती है, इसीलिए राष्ट्रीय पोषण मिशन, किलकारी, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना जैसे कई कार्यक्रम हैं, जिनके माध्यम से देश की नारी शक्ति को बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराया जा रहा है।

अब देखिए जब सरकार आगे आती है, तो देशवासी भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण को देश के निजी डॉक्टर आगे आएं। ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ नाम की इस योजना में निजी महिला डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच करती हैं। इस अभियान में हजारों महिला डॉक्टर आगे आई हैं और हर महीने यह काम कर रही हैं।

मोदी सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कितनी सजग और सरकारी योजनाओं को किस तरह महिलाओं को केंद्रित कर आगे बढ़ाया जा रहा है इसका सबसे सटीक उदाहरण हैं, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत अभियान। हमारे देश में ग्रामीण क्षेत्र की करोडों महिलाओं को चूल्हे में खाना बनाना पड़ता है और इससे निकलने वाला धुआं उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है। मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना चलाई है, जिसके अंतर्गत मुफ्त में गैस कनेक्शन दिया जा रहा है। महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर यह योजना क्रांतिकारी साबित हुई है, अब तक 3.5 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन गरीब महिलाओं को धुएं से आजादी दिला चुके हैं, लक्ष्य 8 करोड़ गैस कनेक्शन देने का है। इसी तरह स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 4 करोड़ शौचालय बनाए जा रहे हैं, इसका भी सबसे अधिक फायदा महिलाओं को होगा। यह वो सोच है जो महिलाओं को प्रति नजरिया बदलने में सफल हो रही है।

मुस्लिम महिलाएं भी बराबरी के लिए आगे आईं
जब हर क्षेत्र और वर्ग की महिलाएं आगे आ रही हैं, न्यू इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं तो फिर मुस्लिम महिलाओं को भी बल मिला है। पिछले वर्षों में मुस्लिम महिलाओं उनके खराब आर्थिक और सामाजिक हालात के लिए जिम्मेदार तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन चलाया। मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की इस मांग को गंभीरता से लिए और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने की पहल की। तीन तलाक से जुड़ा बिल लोकसभा में पास हो चुका है।

इसके साथ ही मेहरम के द्वारा 45 वर्ष से अधिक उम्र की मुस्लिम महिलाओं को हज पर जाने की अनुमति दी गई। यह सब महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहा है। मुस्लिम समाज में वैसे ही शिक्षा का आभाव है, उसमें भी लड़कियों की शिक्षा का बुरा हाल है। ऐसे में केंद्र सरकार ने शादी शगुन योजना की शुरुआत की है, जिसमें ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी करने वाली मुस्लिम लड़कियों को 51,000 रुपये की राशि दी जाती हैं, इससे मुस्लिम समाज में लड़कियों की शिक्षा के प्रति सोच में बदलाव आया है।

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