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गांवों का समग्र विकास केंद्र सरकार का लक्ष्य

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भारत का आधार और आत्मा गांव हैं। यदि भारत का विकास करना है तो गांवों तथा ग्रामवासियों का विकास करना होगा।

स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी का ग्रामीण विकास का आह्वान आज भी प्रासंगिक है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तेजी से हो रहे शहरीकरण के बावजूद हमारी जनसंख्या का बड़ा हिस्सा आज भी गांवों में रह रहा है। प्रतिशत के हिसाब से ग्रामीण जनसंख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन आर्थिक विकास के कार्यक्रमों के लिए ग्रामीणों की कुल संख्या अब भी बहुत बड़ी है। पिछले तीन साल के दौरान ग्रामीण विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता रही है।

ग्रामीण विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और हम टीम इंडिया के रूप में विकास की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 
– नरेंद्र मोदी

ग्रामीण विकास की चुनौतियां
बढ़ती जनसंख्या, गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, बेरोजगारी, भूमि के साथ अन्य सभी संसाधनों का असामान्य बंटवारा, सामाजिक अन्याय जैसी अनेक समस्या ग्रामीण भारत के विकास की बड़ी चुनौतियां हैं। साफ है कि ग्रामीण विकास के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करना इतना आसान नहीं है। लेकिन इसे ग्रामीण विकास को एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। हालांकि भारत सरकार के अब तक के प्रयासों से बुनियादी ढांचा खड़ा हो चुका है।

मूलभूत विकास की ओर बढ़ रहे कदम
भारत की कुल आबादी का लगभग 70 प्रतिशत लोग यानी लगभग 83.3 करोड़ लोग गांवों में रहते हैं। 16 करोड़ 78 लाख परिवारों के लिए पक्के मकान, पानी और शौचालय की सुविधाएं, सड़कें, बिजली, रोजगार, खेती के लिए खाद, बीज, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा देना किसी भी सरकार के लिए एक चुनौती है। लेकिन इस चुनौती को स्वीकार करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कई लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
• 2019 तक एक करोड़ पक्के मकान, सभी 5 लाख 93 हजार 7सौ 31 गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ना।
• 2018 तक सभी गांवों में बिजली की व्यवस्था करना।
• 2022 तक सभी बेघरों को रहने के लिए आवास मुहैया करना।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही सभी योजनाओं को इंटीग्रेटेड विजन और मिशन के साथ साथ क्रियान्वित करता है।

ग्रामीण विकास के लिए केंद्र की निम्न योजानाएं हैं –

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा
प्रधानमंत्री आवास योजना पीएवाई
पंडित दीनदयाल अंत्योदय योजना एनआरएलएम
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना पीएमजीएसवाई
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एनएसएपी

पारदर्शिता और गुणवत्ता पर नजर
कार्यों की गुणवत्ता और समय सीमा पर निगरानी रखने के लिए जियो टैगिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, खातों से भुगतान, 5,000 से ऊपर के भुगतान नगद न करने जैसे नियमों से युक्त एक पुख्ता तंत्र महज दो सालों में ही खड़ा कर दिया है।

बजटीय आवंटन में बढ़ोतरी
ग्रामीण योजनाओं के लिए केंद्र सरकार हर साल बजट के आवंटन को लगातार बढ़ा रही है। 2016-17 में इन योजनाओं के लिए 95,000 करोड़ केन्द्र सरकार ने आवंटित किए थे। वहीं 2017-18 में इसे बढ़ाकर 105447.88 करोड़ खर्च करने की योजना है। अब केंद्र सरकार का लक्ष्य धन की उपलब्धता को बनाए रखने के साथ साथ काम की गति को तेज रखना है ताकि निर्धारित समय पर सभी लक्ष्य प्राप्त किए जा सकें।

आइए हम ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को विस्तार से जानें :-

मनरेगा-महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना

• महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट के तहत गांवों के अकुशल वयस्कों रोजगार मुहैया कराता है।

  • इस एक्ट के तहत एक वित्त वर्ष में कम से कम 100 दिनों के शारीरिक श्रम वाले रोजगार देने की गारंटी देता है।
  • 2016-17 के बजट से इस योजना पर जहां केंद्र सरकार ने 38,500 करोड़ रुपये खर्च किए थे, वहीं 2017-18 में 48,000 करोड़ रुपये धन का प्रावधान।

वर्तमान केंद्र सरकार ने ज्यादा दिए रोजगार
वर्ष में औसत रोजगार दिवस एक्ट में तो 100 दिनों के रोजगार की बात है, लेकिन अन्य सरकारों की तुलना में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में ग्रामीणों को साल भर में औसत रोजगार ज्यादा दिए गए हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान रोजगार लेने वालों की संख्या और काम की उपलब्धता में कोई खास अंतर नहीं रहा है। जबकि इससे पहले की सरकारों में काम मांगने वाले ज्यादा होते थे और सरकार के पास काम कम।

पीएवाई- प्रधानमंत्री आवास योजना
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 मार्च 2016 को पुरानी योजनाओं को समाहित करते हुए एक नयी महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दी।
• इस योजना का लक्ष्य 2019 तक ग्रामीण भारत में एक करोड़ पक्के मकानों का निर्माण है।
• 2012-13 से 2015-16 के बीच प्रति वर्ष 12 लाख ही मकान बन पाये थे। अब हर साल लगभग 33 लाख मकान का लक्ष्य।
• 2015-16 के लक्ष्य प्राप्ति में कमी को 2016-17 की योजना के तहत अक्टूबर तक 77 लाख मकान बनवाकर पूरा करना है।

डीएवाई- दीन दयाल अंत्योदय योजना
कौशल विकास और रोजगार निर्माण केंद्र सरकार के एजेंडा का मुख्य केंद्र बिंदु है। 25 सितंबर 2014 को शहरी और ग्रामीण गरीबों के लिए दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी युवाओं को आजीविका के लिए स्वावलंबी और क्षमतावान बनाना है। डीएवाय के ग्रामीण घटक को 2014 में शुरू किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य तीन साल (2014-2017) के भीतर भारत के गांवों के करीब 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए क्षमतावान बनाना है।

इस उद्देश्य के लिए युवा की परिभाषा में 15 वर्ष या उससे ज्यादा आयु वाले युवाओं को शामिल किया गया। कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की ओर से शुरू किए गए विशेष केंद्रों पर आयोजित किए गए।

क्या है दीन दयाल अंत्योदय योजना ?
• राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का नाम नवबंर 2015 में दीन दयाल अंत्योदय योजना कर दिया गया।
• इस योजना में गांवों के गरीब को आजीविका के साधन उपलब्ध कराये जाते हैं।
• इस योजना में विश्व बैंक का भी अंशदान है।
• इस योजना के तहत सेल्फ हेल्प ग्रुप का बनाना, उनको रोजगार व्यापार की ट्रेनिंग और धन मुहैया कराना है।
• इस योजना के तहत कुल 642 सेंटर पर 329 प्रकार के कौशल की ट्रेनिंग दी जाती है।
• कौशल विकास योजना में सीखे हुए युवकों को सरकार आवास योजना और अन्य योजनाओं में काम देती है। 
22 मार्च 2017 तक की इस योजना की स्थिति
योजना के तहत 28 फरवरी, 2017 तक 1,48, 227 लोगों को कौशल योजना के तहत ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनें से 79, 401 प्रशिक्षितों को प्लेस्ड भी कर दिया गया है। 

पीएमजीएसवाई- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना
ऐसा कम ही होता है कि कोई योजना के क्रियान्वयन की अवधि घटाई जाती हो। लेकिन केंद्र सरकार ने हर गांव को 2022 तक जोड़ने की योजनावधि की सीमा को घटाकर 2019 कर दिया है।
• आज हर रोज 30 किमी सड़कें बन रही हैं।
• वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 44 जिलों में अगले चार वर्षों में 5411 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य।
• वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 44 जिलों में 11, 700 करोड़ की लागत से अगले चार वर्षों 26 पुलों का निर्माण का लक्ष्य।
• फरवरी 2017 से सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के तहत सांसदों द्वारा अंगीकृत गांवों को प्राथमिकता के आधार पर ग्रामीण सड़कों से जोड़ा दिया गया।

  • इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क-सम्पर्क से वंचित गांवों को बारह मासी सड़कों से इस प्रकार जोड़ना है ताकि 500 या इससे अधिक जनसंख्या वाला गांव (पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में 250 व्यक्ति) सड़कों से जोड़ा जा सके।
  • 23 मार्च, 2017 तक 1, 52,179 कार्यों के जरिये 49,91,244 किलोमीटर सड़कें कंप्लीट हो चुकी हैं। 

शत-प्रतिशत केंद्र द्वारा प्रायोजित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 25 दिसम्बर, 2000 को शुरू किया गया था। लेकिन इसने वास्तविक गति केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में पकड़ी।

एनएसपी-राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम
• राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य गरीबों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।
• इस समय इस कार्यक्रम के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन योजना, इंदिरागांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलंगता पेंशन योजना, राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना और अन्पूर्णा योजना शामिल है।
• इस सामजिक सुरक्षा कार्यक्रम में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सीधा खाते में धन देने की सुविधा वर्तमान केंद्र सरकार ने शुरू की है और सभी खातों को आधार संख्या से जोड़ दिया।

भारत के गांवों में रहने वाले लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। आजादी के बाद से ग्रामीण जनता का जीवन स्तर सुधारने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं, इसलिए ग्रामीण विकास विकास की एकीकृत अवधारणा रही है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एकीकृत विजन और मिशन के साथ आगे बढ़ रही है।

 

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