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‘जीजाजी’ की जालसाजी ? सीबीआई जांच की सिफारिश

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कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। राजस्थान सरकार ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के चर्चित दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर लगे जमीन घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है। कांग्रेस उपाध्यक्ष के जीजाजी के नाम से चर्चित वाड्रा अपने कारनामों के चलते हमेशा से विवादों में रहते हैं। जाहिर है कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच शुरू होने से गांधी परिवार के कई और राज फाश हो सकते हैं।

बीकानेर में जमीन घोटाले का मामला
राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार को बीकानेर में हुए जमीन घोटालों की जांच सीबीआई से कराने के लिया कहा है। जिन विवादित जमीन सौदों की जांच की मांग की गई है उनमें रॉबर्ट वाड्रा के कंपनियों के जमीन सौदे भी शामिल हैं। अंग्रेजी न्यूज पोर्टल इकनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि, गलत जमीन सौदों के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें से 4 वाड्रा की कंपनियों से जुड़े हैं। ये सारे एफआईआर 1400 बीघा जमीन जाली नामों से खरीदे जाने से जुड़े हैं, जिनमें से 275 बीघा जमीन वाड्रा की कंपनियों के लिये जाली नामों से खरीदे जाने के आरोप हैं।

इस विवाद में इससे पहले क्या हुआ था ?
गौरतलब है कि बीकानेर में जमीन सौदे में हुई जालसाजी पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने 31 दिसंबर, 2014 को विवादित जमीनों के 18 दाखिल-खारिज (Mutations) को रद्द कर दिया था। जानकारी के अनुसार 2006-07 में इन जमीनों पर कुछ गांव वालों को अवैध कब्जा सौंपा गया। आरोप है कि उन्हें फर्जी तरीके से सेना के महाजन फिल्ड रेंज से विस्थापित किसानों के तौर पर दिखाया गया था। इन्हीं जमीनों के सौदों का आरोप वाड्रा की कंपनियों पर भी लगे हैं। जबकि जो किसान असल में विस्थापित हुए थे, उन्हें 1992-1996 के बीच में ही जमीन अलॉट कर दिया गया था।

रॉबर्ट वाड्रा- डीएलएफ घोटाला-2012

  • 2012 में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर हरियाणा में डीएलएफ घोटाले का आरोप लगा। उनपर शिकोहपुर गांव में कम दाम पर जमीन खरीद कर भारी मुनाफे में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को बेचने का आरोप लगा।
  • उनपर डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन लेने का भी आरोप लगा। उनपर ये आरोप लगे कि इसके पीछे कंपनी को राजनीतिक फायदा पहुंचाना था।
  • वाड्रा पर यह भी कहा गया कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते उन्होंने कई जगह बेहद कम दाम पर जमीन खरीदने का काम किया।

पति के चलते प्रियंका वाड्रा पर भी उठ चुके हैं सवाल

इससे पहले हरियाणा में ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट सामने आने पर भी कांग्रेस में खलबली मच चुकी है। भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की फांस में तब वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा को भी घेरे में ले लिया था। नतीजा ये हुआ कि खुद प्रियंका वाड्रा को सामने आकर सफाई देनी पड़ी । उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति से उनके पति रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी का कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल वहां भी वाड्रा पर जमीन घोटाले का आरोप है। इसपर जांच के लिए बिठाए गए ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में 20 से ज्यादा प्रॉपर्टीज की जानकारी दी गई, जो वाड्रा और उनकी कंपनियों ने खरीदी थीं। इनमें से एक भूखंड को स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से खरीदा था। आरोपों के अनुसार ओंकारेश्वर से खरीदी गई प्रॉपर्टी को फिर लैंड यूज में बदलाव के बाद कहीं ज्यादा कीमत पर डीएलएफ के हाथ बेच दिया गया था और इस तरह 50.50 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हासिल किया गया। 

हरियाणा का जमीन घोटाला क्या है ?
रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा ने 2006 में हरियाणा के फरीदाबाद जिले के गांव अमीपुर में खेती की जमीन खरीदी थी। 5 एकड़ की इस जमीन के लिए उन्होंने 15 लाख रुपए चेक के जरिए चुकाए थे। इसी जमीन को लेकर उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने खेती की जमीन को बदलाव के बाद कहीं ज्यादा कीमत पर डीएलएफ के हाथों बेच दिया था और इस तरह 50.50 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हासिल किया गया।

प्रियंका की सफाई
प्रियंका गांधी ने सफाई में कहा था कि उस प्लॉट की खरीद का स्काईलाइट के ट्रांजैक्शंस या डीएलएफ से कोई संबंध नहीं है और उसे ‘कथित’ स्काईलाइट लैंड डील के छह साल पहले खरीदा गया था। स्काईलाइट हॉस्प‍िटलिटी के कथित जमीन सौदे से पहले 28 अप्रैल, 2006 को प्रियंका गांधी वाड्रा ने 40 केनाल (5 एकड़) जमीन हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अमीपुर गांव में खरीदी थी। 

ढींगरा कमीशन ने जांच की जरूरत बताया था
ढींगरा कमीशन की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस मामले की जांच की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा को डीएलएफ से जो पैसा मिला, क्या उसके एक हिस्से का इस्तेमाल उनकी पत्नी ने हरियाणा के फरीदाबाद में संपत्ति खरीदने के लिए किया। कमीशन ने 20 से ज्यादा ऐसी प्रॉपर्टी की रिपोर्ट दी है। ढींगरा कमीशन के अनुसार वाड्रा ने हसनपुर गांव में भी 16 लाख रुपये प्रति एकड़ के ऑफिशियल रेट के आधे से कम भाव पर एक प्रॉपर्टी खरीदी थी। जिसके सेल डीड को जीरो पेमेंट पर स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के फेवर में बनाया गया। यह काम स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के एकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने के लिए डीएलएफ को एनलिस्ट करने के लिए किया गया था।

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