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अक्षय मुकुल की सनक की पत्रकारिता

पत्रकारिता, प्रजातंत्र में वह व्यवहार है, जिसके माध्यम से जनता और राज्य के बीच असरदार संवाद स्थापित होता है। संवाद की इसी शक्ति से...

लोकतंत्र पर कलंक है ओम थानवी की पत्रकारिता

पत्रकारिता एक ऐसे दौर में है, जहां ओम थानवी जैसे पत्रकारों के लिए 125 करोड़ देशवासियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण राजनीति है। ओम थानवी...

विद्या सुब्रह्मण्यम ने पत्रकारिता को प्रधानमंत्री मोदी के विरोध का शस्त्र बनाया

देश के सवा सौ करोड़ लोगों के जीवन स्तर को सम्मानजनक स्थिति तक लाने में, पत्रकारिता का भी योगदान चाहिए। पत्रकार, सरकार की आलोचना...

TRP के लिए NDTV के रवीश कुमार की आसुरी पत्रकारिता

देश में पत्रकारिता एक ऐसे दौर में है, जहां पत्रकारों के लिए वही घटना, खबर होती है जो हीनता, भय, और निराशा का भाव...

विनोद जोश की Anti Modi पत्रकारिता

आज देश की पत्रकारिता एक ऐसे दौर में है जब पत्रकारों का मकसद सच का अनुसंधान नहीं बल्कि राजनीतिक व्यक्तियों और विचारधाराओं का मात्र...

देश को कलंकित करती शिवम विज की नकारात्मक पत्रकारिता

देश में पत्रकारों के एक वर्ग ने पत्रकारिता को कांग्रेस के सत्ता हासिल करने के खेल का खिलौना बना दिया है। इस खेल में...

अजीत अंजुम की REACTIONARY पत्रकारिता

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने आंदोलन के हथियार के रुप में ‘‘इंडियन ओपिनियन‘‘ समाचार पत्र का प्रथम अंक 4 जून, 1903...

इतिहासकार रामचंद्र गुहा का प्रधानमंत्री मोदी से वैमनस्य

रामचंद्र गुहा, देश के जाने-माने इतिहासकार हैं और विश्व के तमाम विश्वविद्यालयों में अध्यापन का काम कर चुके हैं। इतिहासकार, घटनाओं और व्यक्तियों का...

सीमा चिश्ती से शर्मसार होती पत्रकारिता

पत्रकारिता, देश और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए आवश्यक है इसलिए पत्रकारिता को संविधान में एक विशेष स्थान दिया गया है, लेकिन आज...

हरतोष सिंह बाल की Hate-Mongering की पत्रकारिता

देश के संविधान की दुहाई देने वाले पत्रकार आज स्वयं ही नफरत की भाषा बोल और लिख रहे हैं। अपने को उदारवादी और आधुनिक...

बरखा दत्त की उदारवादी पत्रकारिता का INTOLERANCE

सच को झूठ के अंबार से छांटकर जनता के सामने रखना पत्रकारिता का धर्म होता है, लेकिन देश के पत्रकार सच को झूठ से...

पत्रकारिता को कलंकित करती कांग्रेस की पक्षकार स्वाति चतुर्वेदी

वर्तमान दौर में, देश के कुछ पत्रकार हारी हुई कांग्रेस की इज्जत बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। वे अपने इस मकसद को हासिल...

NDTV की निधि राजदान कांग्रेस की सुपारी पत्रकार हैं

पत्रकारों का मूल धर्म क्या है? पत्रकारों का मूल धर्म है कि खबरों को निष्पक्ष तरीके से पेश किया जाए और हमेशा सच्चाई का...

Alt News यानी प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में झूठी खबरें बनाने की फैक्ट्री

सोशल मीडिया पर प्रचारित होने वाली झूठी खबरों का पर्दाफाश करने का दम भरने वाली Alt News वेबसाइट एक राजनीतिक एजेंडे पर काम करती...

गाली नंबर – 31, देखिए कब-कब कांग्रेसी नेताओं ने दी है प्रधानमंत्री मोदी को...

गुजरात चुनाव में हार से बौखलाए कांग्रेसी नेता और उनके पिट्ठूओं द्वारा प्रधानमंत्री को गाली देने का सिलसिला बरकरार है। गुजरात की जनता कांग्रेस...

‘द वायर’ की विष वमन की पत्रकारिता

‘द वायर’ समाचार वेबसाइट साल 2015 से वैकल्पिक पत्रकारिता के रुप में हमें खबरों का जहर परोस रही है। वेबसाइट की सभी खबरों को...

प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में अपनी पत्रकारिता का वजूद तलाशते पुण्य प्रसून बाजपेयी

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विरोध की हवा को बनाए रखना, पत्रकारों के एक खास समूह की आदत बन गई है। इन पत्रकारों को प्रधानमंत्री...

राजनीतिक रंग में रंगी राजदीप सरदेसाई की पत्रकारिता

देश की राजनीति में कई रंग हैं, लेकिन जब जनता और तंत्र के बीच संवाद स्थापित करने वाला एक तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार किसी विशेष...

एजेंडा पत्रकार सागरिका घोष ने गिराया पत्रकारिता का स्तर

देश में जनता के प्रश्नों को आवाज देने का दम तो सभी पत्रकार भरते हैं, लेकिन इन प्रश्नों को उठाने में उनमें से कुछ...

ABP के जावेद मंसूरी की नफरत की पत्रकारिता

पत्रकारिता का धर्म होता है कि जनता को बिना पक्षपात के सत्य से अवगत कराए, लेकिन जब पत्रकार अपने पूर्वाग्रहों से ग्रसित होकर पत्रकारिता...

EU-Asia News के संपादक पुष्प रंजन की एजेंडा पत्रकारिता

EU-Asia News के दिल्ली स्थित संपादक पुष्प रंजन भारत-नेपाल संबंध मामलों के जानकार माने जाते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि अब उन्होंने पूरी...

पत्रकारिता के नकारात्मक ‘पति-पत्नी’

पत्रकारिता, अब मिशन नहीं, व्यवसाय बन गया है जहां काम करने वालों को अपनी तर्कहीन बातों को ‘बाजार’ के हिसाब से परोसने में आनंद...

प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के एकतरफा एजेंडे पर काम करते हैं देशबंधु के ग्रुप...

- ''अमीर राजा की गरीब प्रजा'' - ''यह मीडिया का भक्तिकाल है'' - ''देश के नए बाप'' ये सब वो शीर्षक हैं जिनके सहारे राजीव रंजन श्रीवास्तव...

‘The Quint’ की राष्ट्रविरोधी पत्रकारिता

कुछ मीडिया संस्थान ऐसे होते जो पत्रकारिता की आड़ में राष्ट्रविरोधी ताकतों को प्रोत्साहित करने में शामिल रहते हैं, और उसमें अपनी शान भी...

एजेंडा पत्रकारिता के ‘प्रतीक’ सिन्हा

निष्पक्ष पत्रकारिता, प्रजातंत्र में जनता का विश्वास बढ़ाता है और पत्रकार को सम्मान देता है, लेकिन जब निष्पक्ष पत्रकारिता पर स्वार्थ हावी होने लगता...
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