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परवान चढ़ रही है प्रधानमंत्री मोदी की कैशलेस इंडिया की मुहिम, दो साल में हुए 210 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैशलेस इंडिया, डिजिटल इंडिया का सपना देखा, जो तेज गति से हकीकत में बदल रहा है। इस सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की जनता डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने में जुटी है। नोटबंदी के बाद से डिजिटल लेन-देन में तेजी आई है। अकेले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानि यूपीआई से होने वाले ट्रांजेक्शन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के मुताबिक दो साल में 210 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए और इन ट्रांजेक्शन के माध्यम से 3.17 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है।

यूपीआई की शुरुआत अगस्त, 2016 से 
बैंकों ने 25 अगस्त, 2016 से यूपीआई शुरुआत की और गुगल प्ले स्टोर पर अपने-अपने यूपीआई ऐप अपलोड करना शुरू किया था। सिर्फ अगस्त 2016 महीने में 21 बैंकों के माध्यम से 93 हजार ट्रांजेक्शन हुए और 3.1 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। दो साल बाद, अगस्त, 2018 में 114 बैंकों का यूपीआई ऐप है। इन बैंकों के यूपीआई के जरिए बीते माह अगस्त, 2018 में 31.2 करोड़ ट्रांजेक्शन के जरिए 54,212 करोड़ रुपयों का लेन-देन हुआ। यानि दो साल में 1800 प्रतिशत से अधिक लेन-देन हुए। 

ट्रांजेक्शन एक नजर में – 

माह, वर्ष ट्रांजेक्शन (लाख में) रुपए (करोड़ में)
अगस्त, 2016 93 हजार 3.1
अक्टूबर 2016 1 लाख 48.6
नवंबर, 2016 2.85 लाख 100
दिसंबर, 2016 19.67 लाख 700
दिसंबर, 2017 14.5 करोड़ 13,144
अप्रैल, 2018 19 करोड़ 27,021
अगस्त, 2018 31.2 करोड़ 54,212

NPCI के फैसले से बढ़ी यूपीआई की लोकप्रियता
मार्च, 2018 में NPCI ने राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) को यूपीआई से जोड़ने की घोषणा की। NPCI ने मई, 2018 में एमेजॉन के ई-कॉमर्स प्लेटफार्म को यूपीआई के जरिए भुगतान की मंजूरी दी है। हाल ही में, BookMyShow को भुगतान के लिए सभी यूपीआई से जोड़ने के लिए कहा है। NPCI के सलाहकार (Innovation) नंदन नीलकेणी ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में डिजिटल ट्रांजेक्शन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका यूपीआई हो जाएगा। 

IMPS और NEFT ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी
जून, 2017 की अपेक्षा जून, 2018 में IMPS के जरिए ट्रांजेक्शन करने वालों की संख्या में दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई। पिछले साल जून, 2017 में IMPS के जरिए ट्रांजेक्शन करने वालों की हिस्सेदारी सभी माध्यमों से भुगतान करने वालों की कुल संख्या का मात्र 0.2 प्रतिशत थी, जो एक साल में बढ़कर 0.4 प्रतिशत हो गई है। वहीं NEFT के जरिए ट्रांजेक्शन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल जून 2017 में ट्रांजेक्शन में NEFT की भागीदारी 5.6 प्रतिशत थी। 12 महीने बाद जून, 2018 में 7.1 प्रतिशत हो गई है।

नोटबंदी के बाद से कैशलेस समाज के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने पर जोर है। आइए एक नजर डालते हैं डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावे के लिए मोदी सरकार के प्रयासों और उनके असर पर।

मोबाइल वॉलेट से लेनदेन रिकॉर्ड 14,170 करोड़ के पार
रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार डिजिटल इंडिया के तहत मोबाइल वॉलेट के माध्यम से मई के महीने में रिकॉर्ड लेनदेन हुई है। आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्ड के माध्यम से पिछले महीने अप्रैल में 3.55 ट्रिलियन का लेनदेन हुआ, जबकि मई में यह आंकड़ा 3.59 ट्रिलियन तक पहुंच गया। मई में मोबाइल वॉलेट के माध्यम से इसके पिछले महीने के मुकाबले 21% की वृद्धि के साथ 14,170 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, अप्रैल में यह आंकड़ा 11,695 करोड़ रुपये था। 

भीम ऐप के माध्यम से हुए 1.63 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन
आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा लेनदेन पेटीएम से हुए हैं। पेटीएम प्लेटफॉर्म से 9.4 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए हैं, जो कुल ट्रांजैक्शन का 38 प्रतिशत है। वहीं गूगल की पेमेंट्स सर्विस तेज के माध्यम से 5.4 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, जो कुल ट्रांजेक्शन का 22 प्रतिशत हैं। सरकार समर्थित भीम ऐप से जून महीने में 1.63 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए हैं। यह मई महीने में हुए 1.4 करोड़ लेनदेन से 15 फीसदी ज्यादा है। जून महीने में हुए कुल यूपीआई ट्रांजेक्शन में भीम ऐप का 7 पर्सेंट हिस्सा था।

डेबिट कार्ड इंडस्ट्री में दूसरे नंबर पर पहुंचेगा ‘रुपे कार्ड’
डिजिटल क्रांति की दूनिया में एक और अच्छी खबर आई है। नैशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने दावा किया है कि इस वर्ष रुपे कार्ड भारतीय डेबिट कार्ड इंडस्ट्री में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का अपना रुपे कार्ड वर्ष 2018 में दो टॉप अंतर्राष्ट्रीय कार्ड वीजा और मास्टरकार्ड में एक को पीछे छोड़ देगा। यानी इन कार्डों के माध्यम से भारत में किए जाने वाले लेनदेन की संख्या और कीमत के मामले रुपे कार्ड इनमें से एक को पीछे छोड़ कर दूसरा स्थान हासिल कर लेगा।

आपको बता दें कि लगभग 30 देशों ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए ‘BHIM UPI’ की टेक्नॉलजी के लिए भारत से संपर्क किया है। जाहिर है कि वीजा और मास्टरकार्ड का तीन दशकों से भारत में डेबिट कार्ड इंडस्ट्री पर दबदबा था। हालांकि करीब छह साल पहले भारत के अपने रुपे कार्ड्स जारी करने के बाद स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ। NPCI के अधिकारियों के मुताबिक ‘जारी किए गए कार्ड्स की संख्या के लिहाज से रुपे कार्ड्स पहले ही नंबर वन पर है। इस साल प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीनों और ई-कॉमर्स पर वैल्यू और वॉल्यूम के लिहाज से नंबर दो पर पहुंच जाएगा। लिहाजा वीजा और मास्टरकार्ड के पीछे रुपे कार्ड नंबर तीन पर नहीं रहेगा, इनमें से एक को पीछे छोड़कर नंबर दो पर पहुंच जाएगा।

डिजिटल पेमेंट एप BHIM निभा रहा है अहम भूमिका
आंकड़ों से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल पेमेंट बढ़ाने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की ‘Trend and Progress of Banking in India’ (2016-17) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई प्लेटफार्म के जरिए कुल 6,950 करोड़ रुपये के 1.79 करोड़ ट्रांजेक्शन किए गए थे। जैसा की हमने बताया कि नोटबंदी के फैसले के बाद डिजिटल पेमेंट बढ़े और जून, 2016 में एक करोड़ ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार हो गया। आपको बता दें कि नवंबर, 2016 में नोटबंदी के बाद ही 30 दिसंबर को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अपना डिजिटल पेमेंट एप BHIM लांच किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस मौके पर कहा था कि भीम एप डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा और इसके जरिए बगैर किसी गलती के सिर्फ मोबाइल नंबर और VPAs के इस्तेमाल से पैसों का ट्रांसफर किया जा सकेगा। हुआ भी यही, दिसंबर में भीम एप लांच होने के बाद ही डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला, और आज इसका नतीजा सभी के सामने हैं।

डेबिट कार्ड, भीम ऐप से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर अब कोई चार्ज नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिजिटल पेमेंट के लेकर प्रोत्साहित करना चाहते हैं। लोगों को कैशलेस पेमेंट के लिए प्रेरित करने के लिए मोदी सरकार ने डेबिट कार्ड, भीम ऐप और अन्य पेमेंट गेटवे से 2000 रुपये तक के लेन-देन पर सभी चार्जेस हटा दिए हैं। यह सुविधा एक जनवरी, 2018 से लागू हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले महीने ही डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए डेबिट कार्ड, भीम यूपीआई या आधार आधारित अन्य भुगतान प्रणालियों के जरिए 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट दर (एमडीआर) चार्जेस का बोझ सरकार द्वारा उठाने के प्रस्ताव को सहमति दी थी। वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार के मुताबित दिसंबर तिमाही में भीम ऐप के जरिए लेन-देन 86 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान भीम ऐप के जरिए 13,174 करोड़ रुपये के 14.56 करोड़ लेन-देन हुए। राजीव कुमार ने कहा, डिजिटल भुगतान को और प्रोत्साहन देने के लिए सरकार डेबिट कार्ड-भीम से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर चार्जेस की भरपाई करेगी। दुकानदारों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। केंद्र सरकार 1 जनवरी, 2018 से दो साल तक एमडीआर का बोझ उठाएगी ।बैंकों को इसका भुगतान सरकार करेगी। इससे सरकार पर 2,512 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

डिजिटल पेमेंट प्रणाली में भारत सबसे सक्षम
गौरतलब है कि फ्लेवर्स ऑफ फास्ट के नाम से तैयार एफआईएस सर्वे के लिए फास्टर पेमेंट्स इनोवेशन इंडेक्स (FPII) का इस्तेमाल किया गया। इसके तहत 1 से 5 तक के स्केल का उपयोग हुआ, जिसमें लेवल- 1 तेज पेमेंट, लेवल- 3 लोगों तक पहुंच और 24 घंटे उपलब्धता और लेवल- 5 उपभोक्ता को आकर्षित करने वाले अतिरिक्त क्षमता शामिल हैं। भारत की IMPS विश्व की एकमात्र प्रणाली पायी गई है जो तेज भुगतान संवर्द्धन सूचकांक रैंक में लेवल 5 पर है।

डिजिटल पेमेंट से पारदर्शी शासन को मिल रही ‘शक्ति’
भ्रष्टाचार से निपटने, पारदर्शी और प्रभावी शासन उपलब्ध कराने और गरीब-अमीर के बीच खाई को पाटने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया का कंसेप्ट सामने रखा है। डिजिटल पेमेंट को प्रचलन में लाना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि बैंक उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल पेमेंट बढ़ा है। 

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कार्ड स्वाइप भुगतान में बढ़ोतरी
08 नवंबर, 2016 को डिमोनिटाइजेशन के बाद कार्ड स्वाइप कर भुगतान करने में भी वृद्धि हुई है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2016 में जहां 20.5 करोड़ कार्ड स्वाइप हुए थे, वहीं जनवरी 2018 में कार्ड स्वाइप की संख्या 27.1 करोड़ पहुंच गई।  

कैशलेस ट्रांजेक्शन और मोदी के लिए चित्र परिणाम

Rupay का इस्तेमाल बढ़ा
जेफरीज के अनुसार ई-कॉमर्स के लिए Rupay का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके साथ ही ई-कॉमर्स पर किए जाने वाला खर्च भी दोगुना से अधिक बढ़ा है। गौरतलब है कि Rupay वीजा और मास्टरकार्ड की ही तरह घरेलू कार्ड पेमेंट सिस्टम है। प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल सोसाइटी बनाने के आह्वान का देश के लोगों पर असर हो रहा है अब इसके प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आ रहे हैं।

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