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मिशेल के बाद भगोड़े कारोबारी माल्या को लाया जाएगा भारत, एक-एक अपराधी पर शिकंजा कर रही है मोदी सरकार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने इतिहास रच दिया है। आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने वाला कोई भगोड़ा अपराधी ब्रिटेन से भारत प्रत्यपर्ति हो रहा है। ब्रिटेन की कोर्ट ने भारत की बैंकों का 9 हजार करोड़ से अधिक लूट कर फरार होने वाले भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यपर्ण को मंजूरी दे दी है।

लंदन की कोर्ट में माल्या ने कई दलीले दीं लेकिन मोदी सरकार की तरफ से पेश किए तर्कों के सामने उसकी एक नहीं चली और अखिर कोर्ट ने माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश सुना दिया। जाहिर है कि उद्योगपति विजय माल्या कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार का करीबी थी और यूपीए शासन के दौरान ही उसे नियमों को एक किनारे रख कर फायदा पहुंचाया गया था। आपको बता दें कि मोदी सरकार एक-एक भगोड़े अपराधी को भारत लाने में लगी है। अभी हाल ही में वीवीआईपी हेलिकॉप्टर अगस्ता वेस्टलैंड डील के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को यूएई से भारत लाया गया था।

बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल यूएई से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया
इसके पहले इसी महीने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की वजह से ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण पर राजी हुआ है। जाहिर है कि 3700 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में मुख्य आरोपी है। अगस्ता वेस्टलैंड ने भारतीय वायु सेना के अधिकारियों और सोनिया गांधी समेत तत्कालीन यूपीए सरकार के लोगों को प्रभावित कर कंपनी की डील दिलाने में मदद के लिए मिशेल की नियुक्ति की थी। भारत लाने के बाद सीबीआई क्रिश्चिएन मिशेल से पूछताछ में लगी है। क्रिश्चियन मिशेल के भारत लाए जाने के बाद आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। क्रिश्चियन पर 3,700 करोड़ रुपये की अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील में मनी लॉन्ड्रिंग करने, घूस लेने और धोखाधड़ी करने का आरोप है। क्रिश्चियन पर आरोप है कि उसने घूस की रकम ट्रांसफर करने के लिए दो कंपनियों ग्लोबल सर्विसेज एफजेडई, दुबई और ग्लोबल ट्रेड एंड कॉमर्स सर्विसेज, लंदन का इस्तेमाल किया था।

इंडोनेशिया से पकड़ा गया भगोड़ा कारोबारी विनय मित्तल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब से देश की सत्ता संभाली है उनकी प्राथमिकता हर स्तर पर भ्रष्टाचार और लूट-खसोट को खत्म करना रहा है। इसके लिए मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने वाले कई नए कानून बनाए हैं और कई पुराने कानूनों को मजबूत भी किया है। बैंकों का पैसा लूट कर विदेश भागने वालों को पकड़ने के लिए मोदी सरकार ने इसी साल अगस्त में भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून बनाया था। इस कानून के बनने के बाद विदेशों में बैठे घोटालेबाजों की शामत आ गई है। सीबीआई ने इसकी कानून के तहत 7 बैंकों से 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर फरार उद्योगपति विनय मित्तल को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है। सीबीआई इस भगोड़े कारोबारी को इंडोनिशेया से प्रत्यर्पित कर भारत ले आई है। विनय मित्तल का नाम विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों की सूची में शामिल था। जिस प्रकास मोगी सरकार भगोड़े उद्योगपतियों पर कार्रवाई कर रही है, उससे लगता है कि वो दिन दूर नहीं है जब विजय माल्या और नीरव मोदी भी शिकंजे में होंगे।

गौरतलब है कि सीबीआई ने भगोड़े कारोबारी विनय मित्तल के खिलाफ 2014 और 2016 में कॉरपोरेशन बैंक और पीएनबी की शिकायत पर केस दर्ज किए थे। सीबीआई ने उसके फरार होने के बाद दिल्ली और गाजियाबाद की अदालत में सात चार्जशीट दाखिल की थीं। कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। सीबीआई ने कड़ी मशक्कत के बाद विनय मित्तल और उसके परिवार को इंडोनेशिया के बाली में खोज निकाला था और अब उसे प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है।

मोदी सरकार की सख्ती का असर, बहरीन से पकड़ा गया भगोड़ा आर्थिक घोटालेबाज
सीबीआई ने 9 वर्ष पहले बैंकों को लाखों का चूना लगाने वाले एक आर्थिक घोटालेबाज को बहरीन में धर दबोचा है। सीबीआई ने मोहम्मद याहया नाम के इस शख्स के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून के तहत कार्रवाई की है। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने बैंकों का धन लूट कर विदेश भागने वाले कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई के लिए इसी वर्ष अगस्त में भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून बनाया है। इस कानून के तहत देश ही नहीं विदेश में भी ऐसा घोटालेबाजों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है।

मोदी सरकार के भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत सीबीआई को यह पहली कामयाबी थी। सीबीआई घोटालेबाज मोहम्मद याहया को पकड़कर भारत ले आई है। बता दें कि 47 वर्षीय मोहम्मद याहया 2003 में बैंगलुरू के कुछ बैंकों के साथ करीब 46 लाख रुपए का घोटाला करने बाद खाड़ी देश भाग गया था। याहया को बहरीन से पकड़ा गया। पिछले काफी समय से उस पर भारतीय एजेंसियों की नजर थी। बहरीन में उसकी गिरफ्तारी के बाद सभी आवश्यक कार्रवाई को पूरा कर भारत लाया गया। याहया के खिलाफ सीबीआई ने 2009 में जांच शुरू की थी, तबतक वह देश छोड़कर भाग चुका था। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुआ था। मोहम्मद याहया पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी जैसे कई आरोप लगाए गए हैं।

जाहिर है कि घोटालेबाजों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए अगस्त में बने सख्त कानून के बाद यह पहला मामला है, जब सरकार किसी भगोड़े, घोटालेबाज को वतन वापस लाने में कामयाब रही हो। यह भगोड़े आर्थिक अपराधी नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या जैसे घाटालेबाजों पर भी मोदी सरकार इसी कानून के तहत कार्रवाई कर रही है।

 

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