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चंद्रबाबू नायडू के ‘ब्लैकमेल’ की राजनीतिक सच्चाई समझिये…

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक बार फिर पलटी मार दी है। उनकी पार्टी तेलगुदेशम ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस से बाहर जाने का निर्णय ले लिया है। दरअसल नायडू की राजनीतिक पृष्ठभूमि को खंगालें तो ये बेहद दागदार रही है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब चंद्रबाबू नायडू ने अपना स्टैंड बदला है। राजनीतिक गुणा-भाग के आधार पर भावनाओं को भड़काना, धोखा देना, खेमा बदलना, ब्लैकमेल करना और विश्वास तोड़ना उनके चरित्र का हिस्सा है।

पॉवरगेम के माहिर खिलाड़ी हैं चंद्रबाबू नायडू
आइये देखते हैं उनके द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों के बारे में जानते हैं जो उन्होंने राजनीतिक गुणा-भाग के आधार पर किए हैं।  

चंद्राबाबू नायडू का ट्रैक रिकॉर्ड

1983– कांग्रेस का साथ छोड़ा और एनटी रामा राव के साथ आए

1989-  एनटी रामा राव के बदले खुद विपक्ष के नेता बन बैठे

1995– एनटी रामा राव का तख्तापलट कर खुद मुख्यमंत्री बने

1998– संयोजक का पद छोड़े बिना ही संयुक्त मोर्चा से अलग हुए

2004- विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी से अलग हुए नायडू

2009-  टीआरएस का साथ छोड़ा और अलग राज्य के लिए आंदोलन

2013 – लेफ्ट का साथ छोड़ भारतीय जनता पार्टी के साथ आए

2018- एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ दिया

राजनीतिक तख्तापलट के मास्टरमाइंड हैं नायडू
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राजनीतिक इतिहास में एक काला अध्याय है आंध्र प्रदेश में एनटी रामाराव का तख्तापलट। इस पूरे प्रकरण के सूत्रधार चंद्रबाबू नायडू ही थे। 1995 में तेलुगुदेशम पार्टी में चंद्रबाबू नायडू का अपने ससुर एनटी रामाराव से झगड़ा हुआ था। 22 अगस्त 1995 को विजाग के डॉल्फिन होटल से शुरू हुआ टीडीपी का विवाद नौ दिन तक चला। नायडू ने एनटीआर को सीएम और पार्टी अध्यक्ष दोनों पदों से हटा दिया था। टीडीपी के 216 में से टीडीपी के 216 में से 198 विधायकों के समर्थन के सहारे पांच दिन बाद नायडू खुद सीएम बन गए। घटना से दुखी एनटीआर हैदराबाद के बंजारा हिल्सस स्थित घर को लौट गए। बचे हुए 18 विधायक भी बाद में नायडू के साथ चले गए। एनटीआर और उनकी पत्नी लक्ष्मीभ पार्वती ने नायडू को पीठ में खंजर भोंकने वाला और औरंगजेब बताया।

TDP ने खुद स्पेशल स्टेटस से किया था इनकार
आज जिस विशेष राज्य के दर्जे को लेकर चंद्रबाबू नायडू ने विवाद खड़ा किया है उसकी सच्चाई ये है कि चंद्रबाबू नायडू ने खुद माना था कि स्पेशल स्टेटस से अधिक लाभकारी स्पेशल पैकेज है। 

तेलगुदेशम कोटे के केंद्रीय मंत्री सुजान चौधरी ने भी खुद ही कहा था कि विशेष दर्जे से अच्छा विशेष पैकेज है।


उन्होंने ये माना था कि विशेष राज्य का दर्जा देना नामुमकिन है। दरअसल इसके लिए संविधान में कुछ खास प्रावधान किए गए हैं जिसके तहत विशेष राज्य का दर्जा दिया जा सकता है। इसी आधार पर बिहार ने भी अपने लिए विशेष राज्य की मांग छोड़ दिया है और इस मांग को जोर-शोर से उठाने वाली पार्टी जेडीयू भी एनडीए का हिस्सा है।

बहरहाल यह तथ्य सब जानते हैं कि नायडू ब्लैकमेल करते हैं। इस बात के सबूत स्वामीनाथन एस अंकलेसरिया अय्यर के लेख से भी स्पष्ट होता है। 

पीएमओ से समय नहीं दिये जाने की बात भी झूठी
तेलगुदेशम पार्टी की ओर से कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। लेकिन चंद्रबाबू नायडू के झूठ की पोल केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले खोल दी है। उनहोंने स्पष्ट किया है कि पीएमओ से जब भी कोई मंत्री, सांसद, विधायक या सहयोगी मिलने का समय मांगते हैं तो यह अवश्य दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही अपने सहयोगियों को सम्मान देते हैं।

अब सवाल है कि नामुमकिन मुद्दे को ही क्यों उठाया गया? दरअसल इसके कुछ राजनीतिक पहलू भी हैं।

जगन रेड्डी की बढ़ती लोकप्रियता का डर
चंद्रबाबू नायडू के राज में आंध्र प्रदेश में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। वाईएसआर कांग्रेस के जगनरेड्डी के सामने बढ़ती अलोकप्रियता और आंध्र इलाके में संघ की बढ़ती सामाजिक गतिविधियों से नाराज चंद्रबाबू नायडू को डर लगने लगा है।

खुला मैदान नहीं देने जा रही बीजेपी
चंद्रबाबू नायडू को पता है कि अगली बार महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह भाजपा का मौजूदा नेतृत्व उन्हें शिवसेना या हरियाणा के दलों की तरह खुला मैदान नहीं देने जा रहा।

भावनात्मक मुद्दा भड़काने की कोशिश
विशेष दर्जा राज्य के लोगों के लिए भावनात्मक मुद्दा है। इसलिए नायडू ने एनडीए से बाहर जाने का दांव खेला है। प्रदेश में जनसेना और वाईएसआर कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया है जिससे चंद्रबाबू नायडू बैकफुट पर आ गए हैं।

वोटों के गणित समझकर दिया धोखा
अलगाव की एक रणनीतिक वजह ये है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वाईएसआर और कांग्रेस के वोटों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 45.38 प्रतिशत दिखता है। वहीं कांग्रेस और टीडीपी के वोट प्रतिशत को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा  47.71 प्रतिशत पहुंचता है।

देश के सबसे अमीर सीएम हैं चंद्रबाबू नायडू
भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार की सख्ती भी एक बड़ा कारण हो सकता है, क्योंकि राजनीतिक दलों पर निगाह रखने वाले संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके अनुसार 177 करोड़ की संपत्ति के साथ चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। इसके साथ ही  उनके बेटे लोकेश पर आरोप है कि उन्होंने भ्रष्टाचार किए हैं। वर्ष 2016 के अक्टूबर में 14.5 करोड़ की संपत्ति थी, जबकि पांच महीने बाद ही 330 करोड़ रुपये हो गई।

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