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सर्वसमाज की अवधारणा के साथ है भाजपा, दलित-ओबीसी नेतृत्व में हो रहा ‘न्यू इंडिया’ का निर्माण

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द प्रिंट वेबसाइट में ”We analysed 1,000 BJP leaders & found the party remains a Brahmin-Baniya club’’ शीर्षक से एक आर्टिकल छपी है। इसमें यह बताने की कोशिश की गई है कि भारतीय जनता पार्टी में ओबीसी और पिछड़े वर्ग को कम महत्व मिलता है। जाहिर है आर्टिकल में आधे-अधूरे रिसर्च के जरिये आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं और सुनियोजित तरीके से झूठ फैलाने की कोशिश की गई है। जब परफॉर्म इंडिया की टीम ने वास्तविक तथ्यों की पड़ताल की तो हैरान करने वाले फैक्ट्स सामने आए। आइए इन तथ्यों पर नजर डालते हैं…

देश में कुल 4120 विधायकों में मार्च, 2018 तक देश में भाजपा के कुल 1428 विधायक थे। इनमें 543 तो सिर्फ दलित समुदाय, यानि एससी/एसटी से चुनकर आए हैं।

2014 में भारतीय जनता पार्टी के कुल 282 निर्वाचित सदस्यों में 67 सांसद दलित समुदाय से ताल्लुक रखते थे, इनमें से 26 सदस्य आदिवासी समुदाय से थे।

दलितों के लिए कुल 66 सीट रिजर्व रखे गए हैं इनमें भाजपा ने 60 प्रतिशत सीटें जीतीं, यानि इनमें से 40 सीटों बीजेपी के खाते में आए।

भाजपा में 2004 में जहां ओबीसी के 15 सांसद थे, और 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वहीं 2014 में हिस्सेदारी प्रतिशत 15.6 रही और सीटों की संख्या 44 पहुंच गई।

आदिवासी समाज से चुने जाने वाले सांसदों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई और 2004 के 20 सांसदों के मुकाबले 2014 में 31 सांसद चुने गए।

2004 में अन्य पिछड़ी जातियों के सांसदों की संख्या 30 से बढ़कर 2014 में 43 तक पहुंच गई।

दरअसल भारतीय जनता पार्टी सामाजिक समरसता में विश्वास रखती है और वह इसे अपने आचरण में ढाल चुकी है। हिंदू समाज के के हर वर्ग को वास्तविक प्रतिनिधत्व देने के साथ ही उसे प्रतिनिधित्व के स्तर पर लेकर आई है।

भारतीय जनता पार्टी ओबीसी समुदाय से कितना गहरे तक जुड़ी इसका उदाहरण ये है कि उसका शीर्ष नेतृत्व ही इसी वर्ग से है। देश का पहला ओबीसी पीएम भी भारतीय जनता पार्टी ने ही बनाया।

रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाने के पीछे उनकी जाति नहीं बल्कि उनकी योग्यता थी। जाहिर है भाजपा में कभी भी प्रतिभा को दबाया नहीं जाता बल्कि उचित अवसर देकर उसे नेतृत्व दिया जाता है।

देश का उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू पिछड़े समुदाय से हैं और वे भी भारतीय जनता पार्टी से हैं। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी ओबीसी समुदाय से है।

उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान, बाबू लाल गौर, कल्याण सिंह, स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे पिछड़ी जाति के बड़े नेताओं ने भाजपा में अपना जीवन खपाया है और समाज को अपना नेतृत्व प्रदान किया है।

दरअसल एक साजिश के तहत यह नरैटिव बनाने की कोशिश की जा रही है कि भारतीय जनता पार्टी में भेदभाव है, लेकिन उपर्युक्त तथ्य ये साबित करते हैं कि भाजपा ही ऐसी पार्टी है जिसमें सर्वसमाज की अवधारणा है और यह धरातल पर भी दिखता भी है।

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