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मोदी विजन का चमत्कार: नीम ने घोली किसानों-गरीब महिलाओं के जीवन में मिठास

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एक समय था जब गुजरात ने ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से देश को एक नई राह दिखाई और पूरे भारत में दूध के उत्पादन में क्रांति आ गई। दशकों बाद उसी गुजरात से आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए यूरिया पर नीम का लेप चढ़ाने का विजन दिया। उनका ये विजन भारतीय कृषि के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है। लेकिन नीम कोटेड यूरिया पीएम की दूर दृष्टि का सिर्फ एक पहलू है। क्योंकि इसने भारतीय गांवों की पूरी आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था में बदलाव लाना भी शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत भी गुजरात के गांवों से हुई है और सफेद क्रांति की तरह ही नीम क्रांति का भी विस्तार तेजी से देश के दूसरे भागों में होना शुरू हो रहा है।

4000 से अधिक गांव बने खुशहाल
नीम का स्वाद कड़वा होता है। लेकिन पीएम मोदी की सोच की वजह से अब गुजरात के 4000 से अधिक गांवों के लोगों के जीवन में मिठास घुल गया है। इसके चलते 25 करोड़ रुपये से अधिक के आय का नया स्रोत निकल आया है। इसका लाभ 2.25 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है जो इसके तहत सीधे रोजगार से जुड़ी हुई हैं। इनके अलावा सिर्फ 2 साल में 75,000 लोगों को परोक्ष रूप से भी रोजगार मिला है। ये ग्रामीण जनता मूलरूप से नीम के बीज को इकट्ठा करने के काम से जुड़ी हुई है।

गरीब-ग्रामीण महिलाओं की खुशियां अपार
United Nations Development Programme  (UNDP) के एक सर्वे के अनुसार गुजरात सरकार की कंपनी गुजरात नर्मदा वैली फर्टीलाइजर एंड केमिकल्स (GNFC) के इस प्रोजेक्ट से महिलाओं की आय में 56% की बढ़ोत्तरी हो गई है। यही नहीं सर्वे में ये पाया गया है कि इस योजना से महिला विरोधी घरेलू हिंसा में भी भारी कमी आ गई है। सर्वे में पाया गया है कि, जो ग्रामीण और गरीब महिलाएं नीम के बीज जमा करने के काम में जुड़ी हैं वो अपनी मेहनत के अनुसार 8000 रुपये प्रति माह तक कमा ले रही हैं।

सरकारी कंपनी में आई बहार
पीएम मोदी के विजन के चलते कड़वी नीम देश के करोड़ों किसानों और लाखों गरीब ग्रामीण महिलाओं जीवन को तो मधुर बना ही रही है। नीम कोटेड यूरिया के उत्पादन में लगी राज्य सरकार की कंपनी GNFC का भी कायाकल्प हो गया है। पहले ही साल में कंपनी के राजस्व में 50 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हो गई और उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में ये आंकड़ा 500 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। कंपनी की दुनिया बदलने की कहानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल इसने 58% की विकास दर्ज की, जिससे बाजार में लगी इसकी पूंजी चार गुना बढ़कर 4,356 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

पीएम की सोच ने नीम को अनमोल बनाया
दरअसल पहले बाजार में नीम का शुद्ध तेल मिलना मुश्किल था। जो उपलब्ध होते थे, उसमें काफी मिलावट होती थी। किसी ने इसकी शुद्धता पर कभी ध्यान ही नहीं दिया था। नीम कोटेड यूरिया के लिए जब वृहद मात्रा में इसकी आवश्यकता पड़ी तब इसके बीज को जमा करने के उपाय ढूंढे जाने लगे। इससे पहले गुजरात में नीम के अधिकांश बीज बेकार ही चले जाते थे। किसी ने उसका मोल ही नहीं समझा था। GNFC ने नीम के पेड़ों की तलाशी का काम शुरू किया ताकि उसके नीचे पड़े बीजों को जमा किया जा सके। पेड़ों की गिनती की रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य में नीम के पेड़ों की संख्या दूसरे नंबर पर है। यहां 4.5 करोड़ से अधिक नीम के पेड़ हैं। एक सीजन में एक पेड़ से 10-25 किलो बीज निकल सकता है। इसी को ध्यान में रखकर GNFC ने उन 4000 गांव पर ध्यान लगाया जहां नीम के पेड़ बहुतायात में हैं। बीज जमा करने के लिए वहीं की महिलाओं का सहयोग लिया। पहले ही साल 10,000 मिट्रिक टन बीज जमा किया, जिससे 850 टन नीम का तेल निकला। दूसरे साल में 11,500 मिट्रिक टन बीज जमा किया और उससे 1700 टन तेल निकाला जा सका।

6 और राज्यों में भी आने वाली है बहार
अभी भी नीम तेल के उत्पादन की ये मात्रा देश की आवश्यकता से काफी कम हैं जो आने वाले वर्षों में 3.1 करोड़ टन से अधिक रहने वाली है। इसके लिए ही GNFC की इस योजना का विस्तार अब देश के 6 अन्य राज्यों में भी किया जा रहा है। जिन राज्यों में इस प्रोजेक्ट का विस्तार हो रहा है वो हैं, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र। ये कंपनी अभी राज्य में 2200 सेंटर पर नीम के बीज जमा कर रही है जिसे बढ़ाकर 7000 सेंटर तक करना है। साथ ही 6 राज्यों में प्रोजेक्ट के विस्तार के साथ देश में 11,000 अतिरिक्त सेंटर खुल जाएंगे। GNFC की सफलता की कहानी देखकर खाद की बड़ी कंपनी IFFCO भी नीम तेल के कारोबार में उतरने की योजना बना रही है। वर्तमान में GNFC ही देश की 26 खाद कंपनियों को नीम कोटेड यूरिया की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही है।

यूं समझ लीजिए कि पीएम मोदी के कहने पर जिसने भी कड़वी नीम को हाथ लगाया उसके हाथ सोना ही आया है। जैसे इसने यूरिया की सब्सिडी की लूट पर 100 % लगाम लगा दिया है, तो साथ ही इसकी खपत में भी बड़ी मात्रा में कमी ला दी। यूरिया के कम उपयोग से जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचती है, तो दूसरी तरफ नीम कोटेड होने से उसे पुनर्जीवन मिलता है और कीड़े कम होने से पैदावार में भी भारी बढ़ोत्तरी हो रही है। ऊपर से इसके प्रोसेसिंग में जो लोग भी जुड़ते जा रहे हैं उनका जीवन भी बदल रहा है। जो महिलाएं दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करती थीं, अब उनके साथ ही उनके परिवार और उनका गांव भी सशक्त हो रहा है।

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