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पश्चिम बंगाल को दूसरा बांग्लादेश बनाने की साजिश

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पश्चिम बंगाल में हिंदू समुदाय इस समय दहशत की जिदंगी जी रहे है। ममता बनर्जी के खुले समर्थन के चलते अल्पसंख्यक समुदाय पूरी तरह से बेकाबू हो चुका है। पुलिस भी मूकदर्शक की भूमिका निभा रही है।

हर किसी को बस हर पल यही डर समा रहा है कि ना जाने कब उनके घर को जला दिया और सबकुछ लूट लिया जाए। इस डर के साए में जीने की मुख्य वजह है पश्चिम बंगाल में योजनाबद्ध तरीके से हो रहे दंगे, जिसे ममता बनर्जी का पूरा समर्थन प्राप्त है।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकता से कुछ किलोमीटर दूर धूलागढ़ का हिंदू समुदाय डर के साए में जीने को मजबूर है। धूलागढ़ में कुछ दिनों पहले जो हिंसा भड़की थी उसकी चिगारियां अभी भी सुलग रही है। सुनियोजित ढंग से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धूलागढ़ में हिंदुओं के घर और धार्मिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। और जमकर लूटपाट की। पुलिस भी सिर्फ दर्शक बनी खड़ी रही।

ममता बनर्जी ही नही पूरे देश ने इस मामलें में चुप्पी साध ली है। और इसने देश के तथाकथित सेक्यूलर नेता और पत्रकारों की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है जिन्हें सिर्फ देश में 2002 का गुजरात दंगा, 2014 का मुजफ्फरनगर दंगा और 2015 का दादरी हत्याकांड ही नजर आता है। यही नही कुछ साहित्यकार तो इतने व्यथित हो गए कि असहनशीलता का नाम लेकर अपने अवार्ड तक वापस कर दिए।

अभिनेता आमिर खान को तो अपनी सुरक्षा का डर सताने लगा। लेकिन पश्चिम बंगाल में आए दिन दंगों में हिंदुओं को निशाना बनाने की बात सामने आती ही इन सेक्यूलर लोगों के बीच एक लंबी खामोशी छा जाती है जैसे मानो मुंह में जुबान ही ना हो। पश्चिम बंगाल में लगातार हिंदुओं को बनाए जा रहे निशाने पर अशोक वाजपेयी और उदय प्रकाश जैसा साहित्यकार अवार्ड वापस नही लौटाता। तब आमिर खान को तो पश्चिम बंगाल ही अब स्वर्ग नजर आता होगा और रविश कुमार और बरखा दत्त जैसे पत्रकारों के तो मुंह पर ही जैसे ताले लटक गए हो। जरा एक नजर ममता के शासन में हुए दंगो पर भी डाल लो।

ममता के शासन में दंगे जिन्हें ममता दबा नहीं पाई।

  • 13 दिसंबर 2016 में मालदा जिले में मिलाद-उन-नबी के अगले दिन कुछ मुस्लिम युवकों ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों में आग लगा दी।
  • 12 अक्टूबर 2016 को हिंसा की शुरुआत पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना ज़िले से हुई, जहां कथित तौर पर मुहर्रम के जुलूस के दौरान भड़की हिंसा में हिंदुओं के घरों को जला दिया और इस हिंसे की आग 5 ज़िलों में फैल गई।
  •  3 जनवरी 2016 को बंगाल की एनएच 34 पर तकरीबन 2.5 लाख मुस्लिम इकट्ठा हुए। जिन्होंने कालियाचक पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया और पूरे इलाके में दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
  •  पश्चिम बंगाल के कैनिंग जिला में 19 फरवरी, 2013 में दंगा भड़का क्योंकि ये लोग अलग इस्लामी राज्य की मांग कर रहे थे। इस दंगे में 200 से ज्यादा हिंदुओं के घरों को सुनियोजित तरीके लूटा गया और बड़ी संख्या में मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया। यहां तक पुलिस ने हिंदुओं की मदद के लिए फोन नही उठाए।
  •  कोलकाता उपनगर के उस्ती बाजार को भी 2013 में मुस्लिमों द्वारा निशाना बनाया गया जिसमें 50 से ज्यादा हिंदू दुकानों को लूट लिया गया। उल्टा पुलिस ने पीड़ित हिंदुओं को ही हिरासत में ले लिया और दंगाई मुस्लिम खुले-आम घुमते रहे।
  •  14 मई 2012 को दक्षिण 24 परगना जिले के तारनगर और रूपनगर दो गांवों में जमकर हिंसा हुई और हिंदू परिवारों के घरों को मुस्लिम दंगाईयों ने आग के हवाले कर दिया।

ममता का मुस्लिम वोट-प्रेम

  • ममता बनर्जी हिजाब पहन के नमाज़ पढ़ने जाती हैं।
  • मुस्लिम छात्रों के लिए स्टाईपेंड, साइकिल, इमाम भत्ता आदि सुविधाएं।
  • 2013 में घोरा बादशाह की जहरीली शराब पीने से मौत हुई और ममता ने 2-2 लाख का मुआवजा घोषित किया।
  • यही नहीं ममता ने 10 हजार मदरसों की डिग्रियों को भी सरकारी नौकरी और उच्च पढ़ाई के लिए मान्यता दे दी।
  • और सबसे बड़ा प्रतिबंधित संगठन सिमी के संस्थापक और शारदा चिटफंड घोटाले में शामिल हसन इमरान को राज्यसभा का सांसद बनाया। हसन इमरान के पाकिस्तान के आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी संबंध है। फिर भी ममता ने हसन को राज्यसभा का सांसद बना दिया।

सहनशीलता पर अवार्ड लौटाने वाले और कैमरे के सामने रोने वाले सेक्यूलर लोगों को लगता है जब हिंदुओं पर अत्याचार हो तो सहनशीलता नजर आती है, क्योंकि हिंदु एक सहनशील समाज है और जब मुसलमानों पर अत्याचार होता है असहनशीलता नजर आती है ये कैसा पैमाना है इनका। अब एक नजर बंगाल की जनसंख्या में आए बदलाव पर भी डाल लेते है।

एक नजर बंगाल की आबादी के बिगड़ते समीकरण पर!

  •  1947 में हिंदुस्तान का विभाजन हुआ, बांग्ला बोलने वाले मुस्लिमों में कुछ भारत के हिस्से में रह गए और बाकी आज के बांग्लादेश के हिस्से में आए।
  • 1947 में पश्चिम बंगाल में 12 फीसदी मुस्लिम आबादी थी।
  • 50 हजार रोहिंग्या मुसलमान म्यामांर छोड़कर बांग्लादेश की सीमा पर डेरा डाले हुए है।
    आज पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की संख्या 27 फीसदी के पार पहुंच गई है।
  • 1947 में आज के बांग्लादेश में 27 फीसदी हिंदुओं की संख्या थी।
    आज बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी घटकर 8 फीसदी रह गई है।
  • जिस तरह से पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है उसे देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पश्चिम बंगाल को दूसरा बांग्लादेश बनाने की पूरी तैयारी ममता बनर्जी ने कर ली है और देश ने हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता पर चुप्पी साध ली है।

विजय रावत

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