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रामलला के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानें अयोध्या जमीन विवाद की पूरी कहानी

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491 साल पुराने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच ने एकमत से रामलला के पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन महीने भीतर एक ट्रस्ट बनाकर अयोध्या में राम मंदिर बनाने का आदेश दिया है। साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन अयोध्या में हीं मस्जिद बनाने के लिए दी जाएगी।

कोर्ट ने इससे पहले शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, खुदाई में मिला सामान इस्लामिक ढांचा नहीं था। खुदाई में मंदिर के सबूत मिले थे। साथ ही, 18वीं सदी तक नमाज पढ़े जाने के सबूत नहीं मिले हैं। हिन्दू सीता रसोई में पूजा करते थे। मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर अपना अधिकार साबित नहीं कर पाया।

आइए जानते हैं कि अयोध्‍या मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने से लेकर बाबरी मस्जिद बनने तक क्या-क्या हुआ ?

9 नवंबर, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे पुराने केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले में कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को दिया। जबकि मुस्लिम पक्ष यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।

16 अक्टूबर, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने 40 दिन में मामले की सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रखा।

6 अगस्त, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना के आधार पर भूमि विवाद पर सुनवाई शुरू की।

2 अगस्त, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता नाकाम होने पर 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया।

1 अगस्त, 2019 : मध्यस्थता की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को दी गई।

18 जुलाई, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हुए एक अगस्त तक फाइनल रिपोर्ट देने के लिए कहा।

11 जुलाई, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने ‘मध्यस्थता की प्रोग्रेस’ पर रिपोर्ट मांगी।

10 मई, 2019 : मध्यस्थता प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 15 अगस्त तक समय बढ़ाया।

10 अप्रैल, 2019 : निर्मोही अखाड़ा ने अयोध्या स्थल के आस-पास अधिग्रहीत जमीन को मालिकों को लौटाने की केंद्र सरकार की याचिका का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया।

8 मार्च, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए विवाद को एक समिति के पास भेजा दिया, जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला बनाए गए।

26 फरवरी, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का सुझाव दिया और फैसले के लिए 5 मार्च की तारीख तय की, जिसमें मामले को अदालत की ओर से नियुक्त मध्यस्थ के पास भेजा जाए या नहीं, इस पर फैसला लिया जाएगा।

25 जनवरी, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 5 सदस्यीय बेंच का पुनर्गठन किया। नई पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई , जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर को शामिल किया गया।

4 जनवरी, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मालिकाना हक मामले में सुनवाई की तारीख तय करने के लिए उसके द्वारा गठित उपयुक्त पीठ 10 जनवरी को फैसला सुनाएगी।

12 नवंबर, 2018 : अखिल भारतीय हिंदू महासभा की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार ।

29 अक्टूबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष जनवरी के पहले हफ्ते में तय की, जो सुनवाई का समय निर्णय करेगी।

27 सितंबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेजने से इनकार किया। मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर को तीन सदस्यीय नयी पीठ द्वारा किए जाने की बात कही।

6 अप्रैल, 2018 : राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दयर कर 1994 के फैसले की टिप्पणियों पर पुनर्विचार के मुद्दे को बड़ी बेंच के पास भेजने का आग्रह किया।

14 मार्च, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की याजिका सहित सभी अंतरिम याचिकाओं को खारिज किया।

8 फरवरी, 2018 : सिविल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की।

1 दिसंबर, 2017 : इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले को चुनौती देते हुए 32 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने याचिका दायर की।

11 सितंबर, 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि 10 दिनों के अंदर 2 अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति करें, जो विवादित स्थल की यथास्थिति की निगरानी करें।

7 अगस्त, 2017 : सीजेआई जेएस खेहर ने संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान का सुझाव दिया।

9 मई, 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।

30 सितंबर, 2010 : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2 : 1 बहुमत से विवादित क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच 3 हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।

13 मार्च, 2003 : हाई कोर्ट ने असलम उर्फ भूरे मामले में कहा कि अधिग्रहीत स्थल पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है।

अप्रैल 2002 : इलाहाबाद हाई कोर्ट में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की।

24 अक्टूबर, 1994 : हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए इस्माइल फारूकी मामले में कहा कि मस्जिद इस्लाम से जुड़ी हुई नहीं है।

3 अप्रैल, 1993 : विवादित स्थल में जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र ने ‘अयोध्या में निश्चित क्षेत्र अधिग्रहण कानून’ पारित किया। अधिनियम के विभिन्न पहलुओं को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कई रिट याचिकाएं दायर की गईं। इनमें इस्माइल फारूकी की याचिका भी शामिल थी। हाई कोर्ट ने अनुच्छेद 139ए के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रिट याचिकाओं को स्थानांतरित कर दिया, जो उच्च न्यायालय में लंबित थीं।

6 दिसंबर, 1992 : बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहाया गया।

30 अक्टूबर, 1990 : विहिप की अपील पर अयोध्या पहुंचे कारसेवकों ने विवादित ढांचे पर भगवा झंडा फहराया। सुरक्षा बलों की फायरिंग में कई कारसेवक हताहत हुए।

02 नवंबर 1990 : विवादित स्थल की ओर बढ़ते कारसेवकों पर सुरक्षाबलों ने फिर गोलीबारी की।

9 नवंबर, 1989 : तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने विवादित स्थल के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।

14 अगस्त, 1986 : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवादित ढांचे की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

01 फरवरी, 1986 : फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताला खोला गया। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।

1984 : विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने विवादित स्थल का ताला खोलने और मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया। समिति का गठन किया गया।

1981 : उत्तर प्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की।

1959 : निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की।

1950 : परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और मूर्तियां रखने के लिए याचिका दायर की।

1950 : रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की।

23 दिसंबर, 1949 : विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद में रामलला की मूर्ति स्थापित की गई।। इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया।

1885 : महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित ढांचे के बाहर शामियाना लगाने की अनुमति मांगी। अदलात ने याचिका खारिज कर दी।

1853 : हिंदुओं ने आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। इस मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई।

1528 : मुगल बादशाह बाबर के कमांडर मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया।

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