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क्या केजरीवाल जैसे नेताओं के कारण ही लोग करते हैं राजनीति से परहेज?

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आजादी के बाद लोग देश की राजनीति में बदलाव चाहते थे। लेकिन जिस तरह कांग्रेसी राज में भ्रष्टाचार और घोटालों की बाढ़ सी आ गई उससे लोग राजनीति में आने से परहेज करने लगे। लोगों के मन में एक धारणा सी बन गई कि नेता यानी दो नंबर की कमाई। पांच साल में इतनी कमाई की जिंदगी भर पैसे की कोई चिंता नहीं। कांग्रेस राज में भ्रष्टाचार काफी फला-फूला। चाहे मारुति घोटाला हो या बोफोर्स घोटाला…नेशनल हेराल्ड केस हो या फिर अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला। इसके साथ ही टू जी-थ्रीजी, कोयला, आदर्श, कॉमनवेल्थ, चारा, सारदा, स्टॉम्प और खदान घोटाले जैसे ना जाने कितने घोटाले सामने आए। लोगों का राजनीति से मोहभंग होता गया। लोग तथस्थ भाव से देखते रहे और कहते रहे- कोऊ नृप होइ हमहि का हानि।

ऐसे में अन्ना हजारे से साथ आगे आए अरविंद केजरीवाल। लोगों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। लोगों को उम्मीद की एक किरण दिखी। उन्हें लगा कि ये आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़कर व्यवस्था में बदलाव लाएगा। लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और आदर्शवाद की दुहाई देने वाले दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आंदोलन के समय जो सपना दिखाते थे कि आम आदमी के हाथ में ही सब कुछ होगा। सत्ता मिलते ही जनता के विश्वास को जबरदस्त तरीके से तोड़ दिया। सीएम बनते ही आम लोगों के सामने उनका असली चेहरा सामने आने लगा।

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की सत्ता की कमान हाथ में आते ही उसे बचाये रखने और उसका फायदा उठाने का काम शुरु कर दिया। मुख्यमंत्री बनने से पहले केजरीवाल जिस स्वराज की बात करते थे, उसे वह अपने दल में स्थापित नहीं कर सके। वो भले ही आमसहमति की बात करते रहे, लेकिन उन्होंने खुद दूसरों की राय नहीं मानी। यह हकीकत धीरे-धीरे जनता के सामने तब खुली, जब वो अपने आंदोलन के साथियों को एक-एक कर बाहर निकालने लगे। अन्ना हजारे, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, शांति भूषण, मयंक गांधी जैसे लोगों को या तो बाहर कर दिया गया या फिर वे खुद केजरीवाल की तानाशाही सोच से परेशान होकर अलग हो गए।

इसके साथ ही केजरीवाल के साथी असीम अहमद, राखी बिड़लान, अमानतुल्ला, दिनेश मोहनिया, अलका लांबा, अखिलेश त्रिपाठी, संजीव झा, शरद चौहान, नरेश यादव, करतार सिंह तंवर, महेन्द्र यादव, सुरिंदर सिंह, जगदीप सिंह, नरेश बल्यान, प्रकाश जरावल, सहीराम पहलवान, फतेह सिंह, ऋतुराज गोविंद, जरनैल सिंह, दुर्गेश पाठक, धर्मेन्द्र कोली, रमन स्वामी जैसे आप विधायक और नेताओं पर आरोपों की लिस्ट लंबी होती गई।

ईमानदारी और आदर्शवाद की दुहाई देने वाले अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार को आम बना दिया। आइए देखते हैं उनके ऊपर लगे गंभीर आरोपों को…

1.विज्ञापनों पर बहाया जनता का पैसा
केजरीवाल पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगा। गाइडलाइंस का उल्लंघन करने के कारण केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपए वसूले जाएंगे। दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्य सचिव एमएम कुट्टी को विज्ञापन में खर्च पैसा वसूलने को कहा है। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद यह आदेश जारी किया गया है। तीन सदस्यीय समिति के अनुसार केजरीवाल सरकार ने आम जनता का पैसा विज्ञापन पर खर्च किया। केजरीवाल सरकार पर दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में ऐसे विज्ञापन जारी करने का आरोप है जिनमें आप और केजरीवाल का प्रचार करने की मंशा झलकती है। विज्ञापनों के माध्यम से केजरीवाल के चेहरे का प्रयोग किया गया। इस मामले में एक साल पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप था। इन आरोपों में गलत और झूठे विज्ञापन देने और खुद के प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी का प्रयोग करने का आरोप शामिल था। इसके पहले सीएजी की रिपोर्ट में भी केजरीवाल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के विज्ञापन निर्देशों का उल्लंघन करने की बात कही गई थी।

2. बेतुके विज्ञापनों पर पैसों की बर्बादी
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट के मुताबिक केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर करोड़ों रुपए के विज्ञापन जारी किए। सरकार की इमेज चमकाने के चक्कर में जनता के 21.62 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए। इतना ही नहीं केजरीवाल सरकार ने अन्य राज्यों में भी विज्ञापन पर 18.39 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कैग के मुताबिक 2.15 करोड़ रुपये के विज्ञापन ऐसे हैं जो बेतुके हैं। शब्दार्थ नाम की प्राइवेट एड एजेंसी (आरोप है कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साले की है कंपनी) को 3.63 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जिसकी जरूरत नहीं थी।

3. चाय-समोसे पर करोड़ों लुटाए
फरवरी 2015 से अगस्त 2016 के बीच केजरीवाल के कार्यालय में 1.20 करोड़ रुपये के समोसे और चाय का खर्च दिखाया गया है। आरटीआई के जरिए इस बात की सूचना सार्वजनिक हुई। आम आदमी पार्टी के अंदरखाने की हकीकत सामने आ गई। इसी आरटीआई से यह भी पता चला कि उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सचिवालय स्थित कार्यालय में 8.6 लाख और कैंप आफिस में 6.5 लाख रुपये का चाय और स्नैक्स में खर्च किए गए।

4. दावत में उड़े लाखों
केजरीवाल ने सरकार की दूसरी वर्षगांठ मनाने के लिए 11-12 फरवरी, 2016 को अपने आवास पर दावत दी। एक थाली का खर्च 12, 000 रुपये था। नियमों के मुताबिक दावतों में खाने का खर्च 2, 500 रुपये प्रति थाली से अधिक नहीं हो सकता है। लेकिन नियमों की अनदेखी कर ताज होटल में दिए गए इस दावत में 11.4 लाख रुपये का खर्च आया था।

5. सैर सपाटे में लुटाया जनता का पैसा
2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे। उपराज्यपाल की डांट पड़ी तो वापस आए। इसी तरह 11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बिजनेस क्लास में सफर करने वाला ये आम आदमी सितंबर, 2015 में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी गए। जून 2016 में बर्लिन की भी यात्रा की। इसी तरह मंत्री सत्येंद्र जैन और अन्य मंत्री, विधायक भी विदेश यात्राओं पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाया। केजरीवाल के साथी मंत्री उपराज्यपाल की अनुमति के बिना 24 बार विदेश यात्रा पर गए।

6. अपने ही रिश्तेदार को बनाया ओएसडी
केजरीवाल ने अपने रिश्तेदार डॉ. निकुंज अग्रवाल की नियुक्ति वेकेंसी ना होने के बावजूद की। पहले तो हस्तलिखित मंगवाए और इसी अवैध आवेदन के आधार पर उन्हें सीनियर रेजिडेंट बनवा दिया। इस नियुक्ति में सीबीसी गाइडलाइन्स और मेडिकल एथिक कोड की धज्जियां उड़ाई गईं। इसके एक महीने बाद सितंबर 2015 में उन्हें दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का ओएसडी बना दिया। अग्रवाल ने दिल्ली सरकार द्वारा फंड किए गए अंतरराष्ट्रीय टूर भी किए है। ऐसा इसलिए हुआ कि निकुंज अग्रवाल केजरीवाल की पत्नी की बहन के दामाद हैं।

7. अपने ही साढ़ू को दिया ठेका
केजरीवाल के अपने साढ़ू सुरेंद्र कुमार बंसल पर आरोप है कि उन्होंने पीडब्लूडी विभाग की मिलीभगत से कई ठेके लिए। इस मामले में तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने भी कहा, ‘‘हम भी लाचार है क्योंकि सुरेंद्र कुमार बंसल (दिल्ली के मुख्यमंत्री के ब्रदर-इन-लॉ) ने पूरे विभाग को लूटा है और यह एक खुला रहस्य है और बंसल के जरिए गैर कानूनी तरीके से कमाया गया पैसा पंजाब और गोवा के चुनाव में खर्च किया गया है।’’

8. जनता के पैसे से इलाज
दिल्ली में बड़े-बड़े अस्पतालों को छोड़ केजरीवाल बेंगलुरू के जिंदल नेचुरोपैथी केंद्र इलाज करवाने जाते हैं। जब से वे दिल्ली के सीएम बने हैं तब से दो बार वे इलाज करवाने जा चुके हैं। बीते साल तो उनका परिवार भी उनके साथ गया था। इस दौरान वे 17,000 रुपये प्रतिदिन वाले कमरे में रहे। इसका खर्च भी दिल्ली सरकार ने ही वहन किया। केजरीवाल के फाइव स्टार इलाज से सरकारी खजाने पर लाखों रुपए का बोझ पड़ा।

9. बिजली बिल में लाखों गुल
एक आरटीआई के जरिये यह भी पता चला कि 19 मार्च 2015 से 4 सितंबर 2016 के बीच मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास स्थान का बिल 2.23 लाख रुपये था। लेकिन बिजली बिल बचाने की नसीहत देने वाले मंत्री सत्येंद्र जैन के घर 3.95 लाख रुपये का बिजली बिल आया।

10. सुविधाएं देने को बना दिए संसदीय सचिव
13 मार्च, 2015 को आप सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। ये जानते हुए कि यह लाभ का पद है, उन्होंने ये कदम उठाया। दरअसल उनकी मंशा अपने सभी साथियों को प्रसन्न रखना था। उनका इरादा अपने विधायकों को गाड़ी, ऑफिस और अन्य सरकारी सुविधाओं से लैस करना था, ताकि उनके ये भ्रष्ट साथी ऐश कर सकें। लेकिन कोर्ट में चुनौती मिली तो इनकी हेकड़ी गुम हो गई। हालांकि केजरीवाल सरकार ने ऐसा कानून भी बनाने की कोशिश कि जिससे संसदीय सचिव का पद संवैधानिक हो जाए। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से मजबूर होकर ये फैसला निरस्त करना पड़ा।

सरकार बनाने से पहले और बाद में सैकड़ों वायदे करने वाले केजरीवाल दिल्ली की जनता से एक भी वायदा पूरा नहीं कर पाए। चाहे वह सार्वजनिक स्थानों को वाई-फाई करने, डेढ़ लाख जनशौचलाय बनाने, 500 नये स्कूलों के निर्माण,10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने, 3000 डीटीसी बसों के साथ एकीकृत परिवहन व्यवस्था देने, महिलाओं की बसों में सुरक्षा, 1000 मोहल्ला क्लिनिक देने, यमुना की सफाई के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट लगाने या फिर जनलोकपाल देने का वायदा हो उन्होंने दिल्ली की जनता को निराश ही किया।

इतना ही नहीं दिल्ली में सत्ता में आने के बाद केजरीवाल और उसके मंत्री सीधे तौर पर भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। छह मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप हैं। केजरीवाल खुद, उनके मंत्री और विधायक जनता का पैसा दिल खोलकर उड़ा रहे हैं। नियम कायदों को ताक पर रखकर मनमाने तरीकों से काम कर रहे हैं।

गोपाल मोहन की नियुक्ति- गोपाल मोहन की नियुक्ति पहले सलाहकार (भ्रष्टाचार निरोध) के रुप में 1 रुपए के वेतन पर की गयी जो बाद में सलाहकार (शिकायत) बनाये जाने पर 1.15 लाख रुपए हो गयी। इसके लिए केजरीवाल ने अंदर ही अंदर कई चालें चलीं। उपराज्यपाल द्वारा 1 रुपये की अनुमति को ही 1.15 लाख कर दिया, यह उपराज्यपाल को नही बताया गया। यह रकम गुजरे हुए माह के लिए भी दिया गया।

राहुल भसीन की नियुक्ति- पद की स्वीकृति ना होने के बाद भी राहुल भसीन को मुख्यमंत्री कार्यालय में सलाहकार के रुप नियुक्त किया गया। ऐसे पद पर नियुक्ति के लिए उपराज्यपाल की अनुमति आवश्यक होती है। राहुल भसीन बारहवीं पास हैं और ट्रेवल व टूरिज्म का डिपोल्मा पूरा नहीं कर सके हैं। उन्हें पर्यटन का सलाहकार नियुक्त किया गया। अजीब बात यह थी कि दिल्ली सरकार के प्रशासनिक विभाग को मुख्यमंत्री ने लिखा कि उनकी इच्छा है कि पर्यटन सलाहकार को 1,50,000 रुपए दिए जाएं।

अभिनव राय की नियुक्ति- अभिनव राय को 87,000 रुपए प्रतिमाह के वेतन पर ओएसडी के रुप में नियुक्त करने में भी केजरीवाल ने गड़बड़ी की। उनकी नियुक्ति वरिष्ठ क्लर्क के रुप मे की गयी लेकिन ओएसडी बना दिया गया। अभिनव राय को जो भी वेतन और सुविधाऐं दी गई वह वरिष्ठ क्लर्क को मिलने वाले वेतन से चार गुना अधिक था।

रोशन शंकर की नियुक्ति- पर्यटन मंत्री के सलाहकार रोशन शंकर की भी नियुक्ति में सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया। विभाग ने शंकर की डिग्रियों के बारे में कोई छानबीन नहीं की और इसके बावजूद उन्हें 60,000 रुपए प्रतिमाह के वेतन पर रख लिया।

वकील पी परीजा की नियुक्ति- वकील पी परीजा के पास उचित अनुभव ना होने के बावजूद भी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सभी नियमों को दरकिनार करते हुए म्यूनिसिपल कराधान ट्रिब्यूनल का पूर्ण अवधि के लिए सदस्य (प्रशासनिक) बना दिया।

ऊरी हमले पर देश के खिलाफ बोला- 18 सितम्बर 2016 को सुबह 4 बजे बारामूला के ऊरी के 12 वीं ब्रिगेड के मुख्यालय पर आतंकवादियों के आत्मघाती हमले में 17 जवान मारे गये और 19 जवान घायल हुए। इसके बाद अभियान चलाकर भारत ने पाकिस्तान को विश्व बिरादरी में अलग-थलग कर दिया। लेकिन 27 सितम्बर 2016 को केजरीवाल ने ट्वीट किया कि पाकिस्तान नहीं भारत आतंकवाद के मुद्दे पर अलग पड़ता जा रहा है। इस ट्वीट को लेकर पाकिस्तान में केजरीवाल ने काफी वाहवाही बटोरी और यहां देश में सोशल मीडिया पर उनको जमकर लताड़ मिली।

सर्जिकल स्ट्राइक पर राष्ट्रविरोधी बयान- 29 सितम्बर 2016 सर्जिकल स्ट्राइक की कामयाबी से केजरीवाल इतने असहज हो गये कि सेना की बात पर भरोसा न करते हुए पाकिस्तान की तरह सबूत मांगन लगे। दूसरे दिन केजरीवाल को पाकिस्तानी मीडिया ने अपने ‘हीरो’ की तरह पेश किया।

कश्मीर समर्थन की सभा को साथ दिया- 9 फरवरी 2016 को जेएनयू में अफजल गुरु पर आयोजित सभा में कश्मीर की आजादी के देश विरोधी नारे लगे। जिसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी तो केजरीवाल ने उन नारे लगाने वाले छात्रों का साथ दिया जो कश्मीर की आजादी और देश के टुकड़े होने के नारे लगा रहे थे।

इस सबके साथ ही पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) वीके शुंगलू की अध्यक्षता वाली समिति ने केजरीवाल सरकार के फैसलों से जुडी 404 फाइलों की जांच कर उनपर सत्ता के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

  • शुंगलू समिति ने दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार पद पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन की नियुक्ति को गलत बताया। इस मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि पेशे से आर्किटेक्ट सौम्या जैन को मोहल्ला क्लिनिक मिशन का निदेशक बना दिया गया। सौम्या की सीवी उनके दावे को कहीं से भी समर्थन नहीं देती। रिपोर्ट में कहा गया है कि सौम्या की नियुक्ति का स्टेट हेल्थ सोसाइटी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के बाई लॉज समर्थन नहीं करते।
  • सीएजी ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को घर मुहैया कराने पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 18 जुलाई 2016 को दिल्ली महिला आयोग के पद पर नियुक्त होने से पहले स्वाति मालीवाल को अपने सचिवालय में उप सचिव के पद पर 1.15 लाख रुपए और अन्य सुविधाओं के साथ नियुक्त किया था। इस समय वह जनता की शिकायतों और जनता संवाद का कार्य देख रही रही थी। स्वाति मालीवाल हरियाणा के बहुचर्चित आप नेता नवीन जयहिंद की पत्नी हैं। नवीन जयहिंद ने योगेन्द्र यादव का जमकर विरोध किया था और केजरीवाल का साथ दिया था। योगेन्द्र यादव भी हरियाणा से ही आते हैं। केजरीवाल ने जयहिंद की सेवाओं का फल इस रूप में दिया।
  • रिपोर्ट के मुताबिक आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश त्रिपाठी को अनुचित ढंग से टाइप 5 बंगला आवंटित कर दिया गया। मॉडल टाउन से आप के विधायक त्रिपाठी दंगा करने के मामले में जेल जा चुके हैं। अखिलेश त्रिपाठी के खिलाफ एक महिला के साथ दुष्कर्म करने का भी आरोप लगाया है।
  • समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से अधिकारियों की राय को किनारे रख संवैधानिक प्रावधनों, प्रशासनिक कानून और आदेशों का उल्लंघन किया गया।
  • रिपोर्ट में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दफ्तर के लिए 206 राउज एवेन्यू स्थित आवंटित बंगले के फैसले को भी अनुचित ठहराया।

अब केजरीवाल के कैश लेने के आप नेता कपिल मिश्रा के खुलासे के बाद लोगों का रहा-सहा भरोसा भी टूट गया है। अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के कारण ही लोग उन लोगों को भी शक की नजर से देखते हैं जो सही मायने में राजनीति में बदलाव लाना चाहते हैं। केजरीवाल के कारण लोग ईनामदार नेताओं पर भी संदेह करते हैं।

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