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केजरीवाल को मोदी फोबिया, जानिए 7 वजह

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दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मोदी फोबिया हो गया है। सोते-जागते, उठते-बैठते यहां तक कि दफ्तर में हों या घर में, हर जगह केजरीवाल को सिर्फ मोदी-मोदी ही दिखता है और वो यही बोलते भी हैं। दरअसल केजरीवाल की मानसिकता यूज एंड थ्रो की रही है। कभी अन्ना को, कभी अन्ना आंदोलन को और कभी अपने ही तमाम साथियों को केजरीवाल ने इस्तेमाल करके छोड़ दिया। पीएम का सपना देखते रहे केजरीवाल की राह में रोड़ा बनकर सामने आ गये नरेंद्र मोदी। अन्ना आंदोलन की उपज जरूर रहे केजरीवाल, पर उन्हें दिल्ली के रूप में देश की नहीं, प्रदेश की भी नहीं, केंद्र शासित प्रदेश की जिम्मेदारी मिली। यही टीस केजरीवाल को सालती रहती है। उस पर बाद के चुनावों में भी केजरीवाल जमानत जब्त कराने का रिकॉर्ड बनाते रहे हैं तो मोदी जीत का। फोबिया तो होगा ही।

1. वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना
2014 के आमचुनाव से पहले दिल्ली में हुए चुनावों में केजरीवाल ने शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। उसी दौरान उन्होंने कहा था कि दिल्ली से बाहर कोई चुनाव नहीं लड़ेंगें, लेकिन पीएम मोदी का विरोध करने और अपने को उनसे अधिक दमदार नेता साबित करने के लिए वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ा। लेकिन पहले ही राउंड में मिली हार ने उनके मन में पीएम मोदी के डर को अधिक मजबूत कर दिया।

2. दिल्ली सरकार के अधिकारों के लिए मोदी पर हमला
दिल्ली में सरकार बना लेने पर केजरीवाल को लगने लगा कि वो पीएम मोदी के रथ को अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर रोक सकते हैं। उनको अपनी मोदी फोबिया का इलाज मोदी विरोध में मिल गया। इसके बाद से दिल्ली में पूर्ण राज्य के मुख्यमंत्री के बतौर काम करने के लिए असंवैधानिक तरीकों से नियम और कानून बनाकर काम करने लगे। इससे उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच एक संवैधानिक जंग छिड़ गई, जिसका निपटारा न्यायलय में हुआ, जहां दिल्ली उच्च न्यायलय ने कहा कि केन्द्रशासित प्रदेश दिल्ली का प्रशासक उपराज्यपाल है। इस प्रकार सबकुछ जानते हुए भी मोदी के डर को खत्म करने के लिए एक युद्ध छेड़े रखा।

3. मोदी को मनोरोगी और डरपोक कहना
मुख्यमंत्री केजरीवाल के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार के दफ्तर पर जब 15 दिसम्बर 2015 को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में छापा मारा तो केजरीवाल अपनी छवि को तार-तार होता देख कर इतना बौखला गये कि उन्होंने ट्वीट और न्यूज चैनलों पर कहा कि मोदी एक मनोरोगी और डरपोक हैं।

4. विमुद्रीकरण पर मोदी पर हमला बोला
जब कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे बड़ा कदम उठाया तो केजरीवाल को अपनी राजनीति डगमागाती हुई नजर आयी। वह इसके विरोध में सोशल मीडिया और सड़कों पर उतर आये। दिल्ली के आजादपुर मंडी में केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ मिलकर रैली की। इस रैली के बाद दोनों दिल्ली में आरबीआई दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए।

5. ममता के लिए मोदी विरोध
रोजवैली घोटाले में अपने नेताओं की गिरफ्तारी के बाद केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अरविंद केजरीवाल का साथ मिला। वह ट्विटर के जरिये ममता के समर्थन में उतर आए। चर्चित रोजवैली चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को गिरफ्तार किया था।

6. सर्जिकल स्ट्राइक पर किया मोदी का विरोध
सेना के सर्जिकल स्ट्राइक से देश में ही नही विदेशों में भी सभी सकते में थे। केजरीवाल भी हतप्रभ थे। लेकिन यहां भी उनको अपनी राजनीति हारती हुई नजर आयी और इस हार के डर से उन्होंने एक सोशल मीडिया पर वीडियो डाला जिसमें दबे शब्दों में तारीफ करते हुए मोदी सरकार से इस सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग लिए। ऐसे ही सबूतों की मांग पाकिस्तान भी कर रहा था। दूसरे दिन अरविन्द केजरीवाल को पाकिस्तानी मीडिया ने अपने ‘हीरो’ की तरह पेश किया। वहां का मीडिया कहने लगा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री भी सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा रहे हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा कि भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के शक के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री ने भी अविश्वास जताया।

7. मोदी की फकीरी पर केजरीवाल का डर
पीएम मोदी को राजनीति के शिखर पर पहुंचने से बहुत सारे नेताओं को सहूलियत हो गयी, क्योंकि बस विरोध ही तो करना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री इसमें सबसे आगे हैं, मोदी विरोध ही उनकी टीआरपी का मूलमंत्र है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के फकीरी वाले बयान पर ट्विट किया-


वैसे अरविंद केजरीवाल ही नहीं यूपी में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद नमो फोबिया नाम की बीमारी देश के ज्यादातर राजनीतिज्ञों में गहरे तक पैठ कर गई है। खास कर वैसे राजनीतिज्ञों में जो जाति-जमात की राजनीति के सहारे अपनी राजनीतिक रोटी सेंकते रहे हैं।

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