Home पोल खोल कांग्रेस की हर साजिश के ‘सूत्रधार’ हैं अहमद पटेल !

कांग्रेस की हर साजिश के ‘सूत्रधार’ हैं अहमद पटेल !

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गुजरात में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर क्यों लगा दिया है? क्या कारण है कि हिमाचल में सत्ता बचाने से अधिक उसे गुजरात में जीत की दरकार हो गई? दरअसल ये ऐसे सवाल हैं जिसकी कड़ी जाकर जुड़ती है सोनिया गांधी के राजनीति सचिव अहमद पटेल से। गुजरात का चुनाव इसबार अहमद पटेल की प्रतिष्ठा से जुड़ गई है और गांधी फैमिली किसी भी हाल में उन्हें जिताकर उनकी प्रतिष्ठा बचाना चाहती है। लोकतांत्रिक समाज में किसी को भी अपने राजनीतिक अधिकारों के इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन जिस तरह से गुजरात में दुष्प्रचार और साजिशों का खेल चल रहा है उससे ये संशय जरूर पैदा हो रहा है कि क्या गुजरात को एक बार फिर 2002 से पहले की स्थिति में ले जाने की साजिश रची जा रही है?

‘दुष्प्रचार’ की साजिश के मास्टरमाइंड
गुजरात में कांग्रेस पार्टी ‘विकास गांडो थयो छे’ यानी विकास पागल हो गया है, के नारे के साथ चुनाव में उतरी है। जिस गुजरात मॉडल का अनुसरण दूसरे प्रदेश भी करते हैं आखिर उस गुजरात को ‘पागल’ ठहराने की साजिश क्यों की जा रही है। बीते 22 वर्षों से भाजपा गुजरात में सत्तासीन है और हर ओर पुरअमन माहौल है, लेकिन कांग्रेस को शायद यह रास नहीं आ रही है। दुष्प्रचार, अफवाह और झूठ के आधार पर गुजरात की छवि नकारात्मक बनाने की कोशिश की जा रही है। गुजराती मान-सम्मान पर आघात किया जा रहा है, साढ़े छह करोड़ गुजरातियों को अस्पृश्य बनाने की साजिश रची जा रही है। सत्य का गला घोंटकर गुजरातियों के मनोबल को तोड़ने का षडयंत्र रचा जा रहा है। ये सब केवल इसलिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुजरात में शिकस्त दी जा सके।

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जातिवादी राजनीति की साजिश
बीते दो दशक से गुजरात में जाति की राजनीति हाशिये पर चली गई थी। गुजराती मान-सम्मान हर एक प्रदेश वासी के स्वाभिमान से जुड़ गया है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इसस चुनाव में इस पर आघात किया है। जातिवादी विभाजन की रेखाएं भूलते जा रहे लोगों को एक बार फिर जाति आधारित राजनीति का हिस्सा बना दिया है। हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश में बांटकर कांग्रेस ने गुजरात नुं गौरव को ठेस पहुंचाई है। क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमान यानी KHAM को आधार बनाकर राजनीति कर रही कांग्रेस की दाल जब बीते दो दशकों में नहीं गली तो पार्टी ने ऐसी साजिश रची कि गुजरात को कई भागों में विभक्त कर दिया। जिस गुजरात को मुख्यमंत्री रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने 12 वर्षों तक गढ़ने का कार्य किया उसकी सामाजिक एकता को तार-तार करने की कोशिश हो रही है।

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ऊना दलित कांड के साजिशकर्ता
ऊना कांड की जो जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है वो कांग्रेस की खतरनाक साजिश की ओर इशारा करती है। कहा जा रहा है कि अहमद पटेल के इशारे पर कांग्रेस के नेताओं ने साजिश रची थी। कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियों में रही इस घटना की टाइमिंग ही इस बात की तस्दीक कर रही थी कि ऊना कांड किसी साजिश का नतीजा थी। दरअसल ऊना कांड बिहार चुनाव से ठीक पहले करवाया गया था। इसका मकसद था कि देश भर के दलितों में ये संदेश जाए कि बीजेपी के राज्यों में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं, लेकिन जांच में सामने आया कि समधियाल गांव का सरपंच प्रफुल कोराट ऊना के कांग्रेसी विधायक और कुछ दूसरे कांग्रेसी नेताओं के साथ संपर्क में था। अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि सरपंच ने ही फोन करके बाहर से हमलावरों को बुलाया था। जो वीडियो वायरल हुआ था वो भी प्रफुल्ल कारोट के फोन से ही बना था।

राज्यसभा सीट जीतने के लिए साजिश
0.49 प्रतिशत… यही वो आंकड़ा है जिसके अंतर पर अहमद पटेल राज्यसभा की सीट जीतने में सफल रहे हैं। अहमद पटेल की ये जीत जितनी असंवैधानिक है उतनी ही अनैतिक भी है, क्योंकि इसमें सियासत के सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों का नुकसान किया गया है। कांग्रेस पार्टी 0.49 प्रतिशत के अंतर से अहमद पटेल को जितवाने में सफल रही है, लेकिन अगर कांग्रेस के दो बागी विधायकों के वोट रद्द न हुए होते तो अहमद पटेल का जीतना संभव नहीं था। अहमद पटेल ने इस जीत के लिए सारे तिकड़म और हथकंडे अपनाए। पहले तो अपनी ही पार्टी के 44 विधायकों को कैद रखा। फिर जेडीयू के विधायक छोटू बसावा को जैसे-तैसे अपने पाले में करने में कामयाब रहे, इसके बाद जीपीपी के एक विधायक जो बीजेपी के खेमे में थे उन्हें अपना शिकार बनाया और फिर चुनाव आयोग में झूठी दलील देकर दो बागी विधायकों के वोट रद्द करवा दिए।

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गोधरा कांड की सच्चाई छिपाने में ‘हाथ’
अहमद पटेल का चरित्र हिंदू विरोधी रही है। इस बात की तस्दीक गोधरा कांड से जुड़े एक वाकये के जरिये भी होता है। दरअसल जब 2004 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी तो गोधरा कांड की जांच के लिए एक जांच कमेटी बनाई गई। उस बनर्जी कमेटी की जांच में काल्पनिक रिपोर्ट दी गई कि गोधरा कांड साजिश नहीं, बल्कि एक दुर्घटना मात्र थी। इस रिपोर्ट में ये भी बताया जो आग लगायी नहीं गई बल्कि अंदर से ही किसी की गलती के कारण लग गई। हालांकि इस काल्पनिक रिपोर्ट को न तो कोर्ट ने माना और न ही लोगों ने, लेकिन यह तय हो गया कि इस कमेटी के गठन से लेकर इसकी रिपोर्ट बनाने तक में किसी की साजिश थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि यूसी बनर्जी समिति का गठन ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बनर्जी की जांच के परिणाम ‘अमान्य’ हैं।

‘भगवा आतंकवाद’ शब्द के जनक 
हिंदू के साथ आतंकवाद शब्द कभी इस्तेमाल नहीं होता था। मालेगांव और समझौता ट्रेन धमाकों के बाद कांग्रेस सरकारों ने बहुत गहरी साजिश के तहत हिंदू संगठनों को इस धमाके में लपेटा और यह जताया कि देश में हिंदू आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है। जिन बेगुनाहों हिंदुओं को गिरफ्तार किया गया वो इतने सालों तक जेल में रहने के बाद बेकसूर साबित हो रहे हैं। दरअसल मुंबई हमले के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके पीछे हिंदू संगठनों की साजिश का दावा किया था, लेकिन इसके पीछे दिमाग सोनिया गांधी और अहमद पटेल का माना जा रहा है। दिग्विजय के इस बयान का पाकिस्तान ने खूब इस्तेमाल किया और आज भी जब इस हमले का जिक्र होता है तो पाकिस्तानी सरकार दिग्विजय के हवाले से यही साबित करती है कि हमले के पीछे आरएसएस का हाथ है।

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हिंदू विरोधियों के ‘नायक’ 
माना जाता है कि अहमद पटेल हिंदू विरोधी मानसिकता से ग्रसित हैं और उन्होंने पूरी गांधी फैमिली को ही इसी विचारधारा से ग्रसित कर दिया है। दरअसल विदेशी मूल की सोनिया गांधी को भारत की सनातन संस्कृति से घृणा है। अहमद पटेल इस काम को इसलिए भी कर पा रहे है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ अहमद पटेल ही वो शख्स हैं जिनका कांग्रेस में दबदबा है। कहा जाता है कि जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तो अहमद पटेल ही महत्वपूर्ण निर्णय लेते थे और मनमोहन सिंह को यह मानना पड़ता था। इस बात का खुलासा मनमोहन सिंह के सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में भी किया है। किताब के अनुसार उनका पीएमओ में सीधा दखल होता था। यहां तक कि कौन मंत्री बनेगा और सार्वजनिक उद्यमों में किन कांग्रेसी नेताओं को शामिल किया जाएगा यह भी अहमद पटेल ही तय करते थे। कहा जाता है कि उनका प्रभाव इतना था कि वे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी आतंकवाद का आरोपी बनाना चाहते थे और सोनिया गांधी उनका साथ दे रही थीं।

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