Home तीन साल बेमिसाल मोदी सरकार ने बदली किसानों की किस्मत

मोदी सरकार ने बदली किसानों की किस्मत

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का कृषि मंत्रालय का संकल्प

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किसानों और गांवों की स्थिति में बदलाव लाना भारत सरकार की प्राथमिकता है। परम्‍परागत कृषि के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग कर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनायी जायेगी। डिजिटल इंडिया का फायदा किसानों को दिलवाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।     – नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के अन्नदाता को भारत का वास्तविक भाग्य विधाता मानते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि देश के किसानों और गांवों की समृद्धि की बुनियाद पर भारत के भाग्य को बदला जा सकता है। एकीकृत मिशन के जरिये खेती-किसानी का विकास सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने सबसे पहले कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कर दिया। मंत्रालय के अधीन केंद्र सरकार ने पिछले तीन साल में कई ऐसी योजनाएं चलाई हैं जो किसानों के कल्याण के लिए हैं।

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय किसानों की आय बढ़ाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके तहत नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने, फसल चक्र में परिवर्तन करने और कम लागत में किस मौसम में कौन सी खेती की जाए इसकी जानकारी देने पर बल दिया जा रहा है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी की जाए। इस संकल्प के साथ कई आधारभूत योजनाओं को जमीन पर उतारा गया है जो खेती-किसानी में सहायक सिद्ध हो रहा है। सॉइल हेल्थ कार्ड, फसल बीमा योजना, ई-नाम, जैविक खेती, नीम कोटिंग यूरिया, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना और पशुधन की योजनाएं कृषि को किसानों के लिए एक लाभप्रद व्यवसाय में परिवर्तित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

फसलों का रिकार्ड उत्पादन
2016-17 के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार इस साल बंपर फसल हुई है। रिकार्ड 271.98 मिलियन टन अनाज के उत्पादन का अनुमान है, जिसमें चावल का 108.86 मिलियन टन और गेहूं का 96.64 मिलियन टन रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। मोटे अनाजों का भी उत्पादन रिकार्ड 44.34 मिलियन टन है। पिछले सालों में दालों के उत्पादन में कमी हुई थी जिससे दालों का आयात करना पड़ा था, लेकिन इस साल रिकार्ड 22.14 मिलियन टन उत्पादन हुआ है, तिलहनों का भी उत्पादन रिकार्ड 33.60 मिलियन टन हुआ है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि
कृषि उत्पादन से किसानों की आय को सुनिश्चित बनाये रखने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी खासी बढ़ोतरी की गई है। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपये से बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया, उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपये से बढ़ाकर 5,250 रुपये तक कर दिया गया है।

मोदी विजन से निकला किसान चैनल
देश की आत्मा को समझने की शुरुआत भारत के गांव-देहात से होती है। इसी आधार पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने मंत्र दिया हर खेत को पानी और हर हाथ को काम। इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हल के पीछे चल रहे आदमी की सुध ली और देश को किसान चैनल की शुरुआत की। 26 मई 2015 को शुरू किया गया 24 घंटे का यह किसान चैनल कृषि तकनीक का प्रसार, पानी के संरक्षण और जैविक खेती जैसे विषयों की जानकारी देता है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना                                                   
देश के इतिहास में पहली बार किसानों की भलाई के लिये नई फसल बीमा योजना बनायी गई है। यदि किसान इस योजना से जुड़ गये तो कोई भी प्राकृतिक आपदा डरा नहीं पायेगी।                                 -नरेंद्र मोदी

सरकार की यह फसल बीमा योजना कम प्रीमियम पर अधिकतम बीमा का लाभ देती है। इस योजना में सभी खाद्य फसलें, तिलहन, वार्षिक व्यावसायिक या साग सब्जी का बीमा होता है। पहले की योजनाओं में कुछ फसलें और तिलहन का ही बीमा होता था। खरीफ की सभी फसलों और तिलहन के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत एवं 1.5 प्रतिशत रबि की फसलों और तिलहन के लिए और व्यावसायिक फसलों और फल व सब्जी के लिए 5 प्रतिशत का वार्षिक प्रीमियम देना है। प्रीमियम की शेष राशि में केन्द्र और राज्य सरकार का बराबर- बराबर हिस्सा होता है।

गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान
उत्तरी भारत के राज्यों के गन्ना उत्पादक किसानों का कई सालों से चीनी मिल मालिकों के ऊपर बकाया था, जिससे किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 4, 305 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी गयी, जिससे 32 लाख किसानों को फायदा हुआ। इस तरह से 2014-15 के 99.33 प्रतिशत और 2015-16 के 98.21 प्रतिशत किसानों को अपना बकाया रुपया वापस मिल चुका है।

धान की खरीद में लेवी प्रणाली का ‘द इंड’
किसानों के हित में सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए धान की खरीद में लेवी प्रणाली को खत्म कर दिया, जिससे किसान अब अपनी उपज सीधे सरकारी केन्द्रों पर बेच सकते हैं जहां पर उन्हें धान की अच्छी कीमत मिलती है।

नीम कोटिंग यूरिया से कालाबाजारी पर रोक
केंद्र सरकार ने खेती के लिए यूरिया की कमी को खत्म कर दिया। पहले यूरिया के लिए किसानों को लंबी लाइनें लगाने के बावजूद भी यूरिया नहीं मिल पाता था। सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया को कालेबाजारी औद्योगिक इकाइयों को बेच देते थे। मोदी सरकार ने यूरिया पर नीम कोटिंग को अनिवार्य बनाकर इसकी कालाबाजारी को पूर्णरुप से खत्म कर दिया। अब किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिलती है।

कृषि मौसम विज्ञान सेवा की शुरुआत                             भारतीय कृषि में अगली क्रांति प्रौद्योगिकी और आधुनिकीकरण का उपयोग करते हुए लानी होगी।- नरेंद्र मोदी

मौसम विज्ञान से किसानों को मिलने वाली सीधी सूचनाओं से बहुत फायदा हुआ है। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंच रहीं हैं।

मिट्टी की सेहत के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड
खेती के भूमि की उर्वरा शक्ति का बने रहना है बहुत ही आवश्यक है और इसकी जानकारी किसानों को रहे यह सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण काम है। इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार सॉइल हेल्थ कार्ड की योजना शुरुआत की। इसकी मदद से किसान अपनी भूमि पर उचित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करके अच्छी पैदावार बनाये रखने में सफल हो सकें। अभी तक 6.5 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिये जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
इस योजना ने खेती के लिए पानी की समस्या का समाधान किया है। इस योजना से 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचा है। इस प्रकार ‘per drop more crop’ की सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के अंन्तर्गत 2016-17 में लाया गया है।

डिजिटल इंडिया की पहल- ई-नाम
सरकार ने किसानों के फसल उत्पादन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए तो योजनाएं लागू की हैं बल्कि उपज की सही कीमत मिल सके इसके लिए भी आधुनिक तरीके से मंडियों को विकसित किया है। ई-नाम के तहत देश की सभी कृषि मंडियों को एक दूसरे से जोड़ दिया गया है, जहां किसान अपनी उपज को बेच सकता है। ई-नाम पर 250 मंडियां जुडी हुई हैं, जिस पर 36.43 लाख किसान को सीधा फायदा हो रहा है। इनके अलावा 84,631 व्यापारी और 42,109 कमीशन एजेंट भी जुड़े हैं।

जोर पकड़ रही जैविक खेती
जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए सरकार जैविक खेती के विकास के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10000 समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाने का काम चल रहा है। अब तक राज्य सरकारें 7186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जौविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। देश के उत्तरी पूर्वी राज्यों की भौगोलिक दशा को देखते हुए जैविक खेती पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके लिए 2015 से 2018 तक 400 करोड़ की परियोजना चल रही है। 2015 -17 तक 143.13 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं जिनसे 2016-17 तक 1975 समूहों के माध्यम से 39,969 किसानों को जैविक खेती का काम कर रहे हैं।

ब्लू रिवोल्यूशन से बढ़ा मत्स्य उत्पादन
देश में ब्लू रिवोल्यूशन के जरिए किसानों को आय के अन्य स्रोत उपलब्ध कराने के संकल्प से सरकार ने मत्स्य प्रबंधन और विकास के लिए अगले पांच साल में 3000 करोड़ रुपये की योजना दी है। 15000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया गया है। 2012-14 में मत्स्य उत्पादन जहां 186.12 लाख टन था वहीं 2014-16 में 209.59 लाख टन हो गया।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन
मिशन मोड में लागू की गयी गोकुल योजना का उद्देश्य देश की पशुधन संपदा को संवर्धित करके किसानों की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत करना है। इस योजना से देशज पशुधन के जेनेटिक स्टाक को संवर्धित करना और दूध उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना में 14 गोगुल गांव स्थापित किया गया है। 41 बुल मदर फार्म का आधुनिकीकरण किया गया है। देश में दूध उत्पादन 155 मिलियन टन के पास पहुंच चुका है। इसी प्रकार इस क्षेत्र में युवाओं को शिक्षित और प्रशिक्षित करने के लिए पशुविज्ञान कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 52 तक पहुंच चुकी है। देश के प्रति व्यक्ति के लिए 2013-14 में जहां 307 ग्राम दूध उपलब्ध था वहीं 2015-16 में बढ़कर 340 ग्राम हो गया।

खाद्य प्रसंस्करण

सरकार की कृषि नीति के कारण
• देश दूध उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है, 2015-16 में 155 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ।
• फल और सब्जियों में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, 254 मिलियन टन का उत्पादन करता है।
• चावल उत्पादन में भी भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
• मत्स्य उत्पादन में भी भारत का स्थान विश्व में दूसरा है।
• अंडों के उत्पादन में तीसरे और मांस के उत्पादन में भारत पांचवें स्थान पर है।
इसलिए देश में खाद्य प्रसंस्करण की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें देखते हुए मोदी सरकार ने पिछले सालों में कई नीतिगत निर्णय लिये हैं जिनके परिणाम आशा के अनुसार आ रहे हैं।
• खाद्य प्रसंस्करण में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की छूट है।
• देश में खाद्य उत्पादों के उत्पादन और खुदरा बिक्री में भी 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की छूट है।
• कई प्रकार के करों में भी छूट का प्रवाधान किया गया है।
इन नीतियों का परिणाम है कि—
• जनवरी 2017 तक देश में 42 मेगा फूड पार्कों पर विभिन्न स्तरों पर काम चल रहा था।
• जनवरी 2017 तक 200 से कोल्ड चेन विकसित किये जा रहे थे।
किसानों को हर स्तर पर सहयोग देकर मोदी सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने का जो बीड़ा उठाया है, उसे पूरा होने में कोई शंका नहीं है।

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