Home गुजरात विशेष …इसलिए एजेंडा लेस, विजन लेस, लीडर लेस पार्टी है कांग्रेस !

…इसलिए एजेंडा लेस, विजन लेस, लीडर लेस पार्टी है कांग्रेस !

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कांग्रेस का पूरे देश से सफाया होता जा रहा है, लेकिन पार्टी के नेताओं को अभी तक समझ नहीं आ रहा है कि उनके पैरों के तले की जमीन खिसक चुकी है। बीते कुछ अर्से से कांग्रेस का जिस तरह का आचरण रहा है इससे यह बात तो साफ जाहिर होता है कि पार्टी बिना किसी योजना के ही राजनीतिक मैदान में डटी हुई है। दागी प्रतिनिधि विधेयक को फाड़ डालने वाले राहुल गांधी बिहार में लालू प्रसाद यादव के भ्रष्टाचार के साथ हैं। यूपी को अराजक प्रदेश बनाने वाले अखिलेश सिंह के साथ कांग्रेस ने चुनावी गठबंधन कर जनता को धोखा दिया। जीवन भर कांग्रेस पार्टी की आर्थिक नीतियों का विरोध करने वाले वामपंथियों के साथ सहयोग कर रहे हैं… ऐसी कई बातें बताती हैं कि न तो कांग्रेस पार्टी के पास कोई एजेंडा है, न विजन है और न ही कोई सशक्त नेतृत्व है जो पार्टी को सही दिशा प्रदान कर सके। 

इसलिए ‘एजेंडा लेस’ पार्टी है कांग्रेस !
चुनावों में लगातार हार से निराश कांग्रेस अब हताश हो चुकी है। इस बात का अंदाजा गुजरात चुनाव प्रचार से लग जाता है। जब गुजरात में कमियों को ना ढूंढ पाने वाले ‘युवराज’ ने तो सीधे-सीधे गुजरात के डेवलपमेंट को ही पागल करार दे दिया। दरअसल जिस गुजरात को लोग विकास के लिए ही जानते हैं, जिस गुजरात में 24 घंटे बिजली है, जिस गुजरात के सभी गांव सड़कों से जुड़े हुए हैं, जिस गुजरात में प्रति व्यक्ति आय टॉप के राज्यों में है, जिस गुजरात में देश-दुनिया के लोग इन्वेस्ट करना चाहते हैं, जो गुजरात एक मॉडल है… क्या वहां विकास नहीं हुआ है? अगर कांग्रेस को विकास को चुनाव का आधार ही बनाना था तो वह गुजरात में विकास के नये आयाम देने की बात कहती, गुजरात में इन्वेस्टमेंट बढ़ाने की बात कहती, गुजरात को भारत के राज्यों में विकास की दृष्टि से टॉप लाने की बात कहती, लेकिन जिस तरह से गुजरात के विकास को पागल कहा जा रहा है उससे साफ है कि कांग्रेस एजेंडा लेस पार्टी है।

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इसलिए ‘विजन लेस’ पार्टी है कांग्रेस !
गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी जीएसटी और देश में रोजगार को निशाना बना रही है। कांग्रेस पार्टी 21वीं सदी में भी गुजराती समाज को जाति-जमात में बांट कर राजनीति करना चाह रही है। राहुल गांधी तमाम कुतर्कों के सहारे कांग्रेस को गुजरात में जीत दिलाना चाहते हैं, लेकिन गुजरात की जनता यह जानती है कि जीएसटी को लागू करने के लिए पूरे देश की राज्य सरकारों ने प्रस्ताव पास किया है, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सहमति है और इसमें कांग्रेस की राज्य सरकारें भी शामिल हैं। फिर विरोध का कारण क्या है? दूसरी ओर रोजगार के अवसर को लेकर वे दलील देते हैं, लेकिन उन्हें समझना होगा कि 125 करोड़ के देश में युवाओं को कोई भी पार्टी नौकरी नहीं दे सकती। बस उन्हें स्वरोजगार के जरिए स्वाबलंबी बना सकती है। मोदी सरकार ने मुद्रा योजना के तहत 9 करोड़ युवाओं को स्व-रोजगार दिया भी है। तीसरा यह कि राज्य को जातिवादी राजनीति की तरफ धकेलने की कांग्रेस पुरजोर कोशिश कर रही है, लेकिन यह सच है कि गुजरात में सबका साथ, सबका विकास है जातिवाद नहीं।

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इसलिए ‘लीडर लेस’ पार्टी है कांग्रेस !
भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के नेतृत्व में उनकी पार्टी गुजरात चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वो किसके चेहरे पर चुनाव लड़ रही है, भरत सिंह जी या शक्ति सिंह या फिर राहुल गांधी। साफ है कि कांग्रेस में अभी कोई नेतृत्व नहीं दिख रहा है। हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश के सहारे मैदान में उतरी कांग्रेस यह भी बता पाने में सक्षम नहीं हो पा रही है कि किस आधार पर वह पाटीदारों और ओबीसी को आरक्षण देगी। जाहिर है बरगलाने की राजनीति के तहत कांग्रेस इन लोगों को अपने खेमे में ले तो आई है, लेकिन इन्हें कितना प्रतिनिधित्व मिलेगा यह किसी को नहीं पता। दरअसल कांग्रेस पार्टी गुजरात की जनता को टोटल कन्फ्यूजन में रखना चाहती है ताकि कुछ राजनीतिक लाभ लिया जा सके।

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