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कालेधन व भ्रष्टाचार की लड़ाई में कारगर है आधार, इसलिए बदनाम करने को अपनाए जाते हैं हथकंडे

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एग्रेसिव पहल से आधार नंबर एक के बाद एक कई योजनाओं, सुविधाओं और सेवाओं के साथ जोड़ा जा रहा है। इससे देश में फर्जीवाड़े, भ्रष्टाचार और कालेधन में काफी कमी आई है। कालाधन और भ्रष्टाचार की लड़ाई में आधार कारगर हथियार बन गया है। इसलिए एक तबका ऐसा है जो हर पल आधार को बदनाम करने की ताक में लगा रहता है। आधार को बदनाम करने के लिए नए-नए तिकड़म गढ़ता है। मोबाइल के कॉन्टेक्ट लिस्ट में गूगल की गलती से UIDAI का पुराना हेल्पलाइन सेव हो गया तो ये लोग एक बार फिर आधार को बदनाम करने में जुट गए। केंद्र सरकार सक्रिय हुई तो गूगल ने एक बयान जारी करके अपनी गलती के लिए माफी मांगी। उधर, UIDAI ने कहा कि किसी फोन के कॉन्टेक्ट लिस्ट में दर्ज नंबर के जरिये उस फोन की सूचनाएं नहीं चुराई जा सकती है। इसलिए इस नंबर को मिटाने में कोई डर नहीं होना चाहिए। लोग चाहें तो यूआईएडीआई का नया हेल्पलाइन नंबर 1947 को रख सकते हैं।

गूगल ने गलती स्वीकार करके मांगी माफी 
गौरतलब है कि फ्रांस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होने का दावा करने वाले एक ट्विटर यूजर ने प्राधिकरण को ट्वीट में कहा था कि अलग-अलग मोबाइल फोन सेवा कंपनियों के ग्राहक, जिनके पास आधार कार्ड है या नहीं और जिन्होंने एमआधार एप का इस्तेमाल भी नहीं किया है, उनके भी फोन की कॉन्टेक्ट सूची में आपका हेल्पलाइन नंबर उन्हें बताये बिना क्यों दर्ज कर दिया गया है? इसके बाद सोशल मीडिया पर आधार के खिलाफ अफवाहों का दौर चलने लगा। इस पर केंद्र सरकार हरकत में आई। इसके बाद गूगल ने एक बयान करके इसके लिए अपनी गलती मानी और इसके लिए माफी मांगी। गूगल ने बताया कि अनजाने में यूआईडीएआई के पुराने टोल फ्री नंबर 18003001947 समेत 112 अन्य हेल्पलाइन नंबर एंड्रॉयड फोन के ‘सेटअप विजार्ड’ में दर्ज हो गए थे। सिंक्रोनाइज सिस्टम के कारण लोगों के मोबाइल नंबर में यह हेल्पलाइन नंबर दर्ज हो गया था। 

आधार नंबर नहीं वर्चुअल आईडी
सरकार आधार की सुरक्षा और विश्वनीयता को लेकर बहुत सतर्क है। यही कारण है कि सरकार आधार नंबर में कुछ नए फीचर जोड़े गए। अब आधार नंबर का वर्चुअल आईडी भी बनाया जा सकता है। इस वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल आधार नंबर के बदले में किया जा सकता है। वर्चुअल नंबर को अपने मुताबिक, कभी भी बदला जा सकेगा। वर्चुअल आईडी 16 अंको का एक कोड होगा जो आधार नंबर की जगह उपयोग किया जा सकेगा। अब आधार लिंक या सुविधा के लिए 12 अंकों वाला नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा। इसके बदले वर्चुअल आइडी का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे लोगों की पहचान सुरक्षित रहेगी।

वर्चुअल आईडी कैसे करें जनरेट
*आधार की जगह वर्चुअल आईडी के लिए यूजर यूआईडीएआई की वेबसाइट या mAadhaar एप पर जाकर 16 अंकों का वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकता है।
*यह वर्चुअल आईडी अनगिनत बार जनरेट किया जा सकेगा और नया आईडी जनरेट होते ही पुराना बेकार हो जाएगा।
*वर्चुअल आईडी अस्थायी होगी और इसे किसी भी समय वापस लिया जा सकेगा। हर आईडी की एक समय सीमा होगी। इस समय सीमा को यूजर खुद तय कर सकता है।
*वर्चुअल आइडी की नकल नहीं की जा सकेगी।
*नया वर्चुअल आईडी जनरेट करने में सिर्फ 10 सेकेंड का समय लगेगा।
*वर्चुअल आईडी से सिर्फ नाम, पता और व्यक्ति की फोटो को एक्सेस किया जा सकेगा।

आधार भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा हथियार बन चुका है। आपको बताते हैं किस आधार कार्ड से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में किस तरह मदद मिल रही है। 

तमिलनाडु में गायब हुए 1.4 करोड़ फर्जी राशनकार्डधारी
तमिलनाडु में आधार को राशन कार्ड से जोड़ने के बाद 10 लाख से अधिक फर्जी और डुप्लीकेट राशन कार्ड रद्द हुए हैं। इतना ही नहीं इन राशन कार्डों में दर्ज 1.43 करोड़ लोगों के नाम भी सब्सिडी का अनाज पाने वाले लाभार्थियों की सूची से हटाया गया है। तमिलनाडु सरकार के एक अधिकारी के अनुसार राशन कार्ड को आधार से जोड़ने के बाद डाटाबेस में 8 करोड़ लोगों की संख्या घटकर 6.6 करोड़ रह गई है। तमिलनाडु में अब वैध राशनकार्डों की संख्या 1.96 करोड़ रह गई है। 

1.30 लाख फर्जी शिक्षकों का खुलासा
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीते साल सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से कहा था कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों की जानकारी देते समय उनका 12 अंकों का आधार नंबर भी जरूर उपलब्ध कराएं। आधार नंबर के जरिये शिक्षकों के बारे में पता करने की प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है कि देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत बताए जा रहे 1,30,000 शिक्षक असल में हैं ही नहीं। livemint की खबर के अनुसार देश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की संख्या करीब 14 लाख है। यानी अब आधार से पहचान के पुष्टिकरण के बाद इनमें से 10 प्रतिशत ऐसे निकले हैं जो असल में थे ही नहीं। 

मिड डे मील योजना में भी फर्जी छात्रों का पर्दाफाश
यह एक बड़ा खुलासा है जो आधार के जरिये पहचान कन्फर्म करने की प्रक्रिया से सामने आया है। इससे पहले मध्यान्ह भोजन यानी मिड डे मील योजना में भी ऐसी ही गड़बड़ियां सामने आई थीं। पिछले वर्ष अप्रैल में पता चला था कि इस योजना में 4 लाख 40 हजार छात्रों का रजिस्ट्रेशन फर्जी तरीके से हुआ है। यह आंकड़ा भी सिर्फ तीन राज्यों-आंध्र प्रदेश, झारखंड और मणिपुर के बच्चों का था। ऐसे में अनुमान ही लगाया जा सकता है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हो रही होगी और आधार लिंकेज इसका पर्दाफाश करने में कितना कारगर है। मोदी सरकार अपने सुधारवादी कार्यक्रमों में आधार लिंकेज को शामिल कर भ्रष्टाचार पनपाने वाले लीकेज को खत्म करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

राशन कार्ड से आधार जुड़ा तो मिले 3 करोड़ फर्जी 
आधार नंबर से राशन कार्ड को जोड़ने की योजना से भी सरकारी खजाने को राहत मिली है। खाद्य सब्सिडी में सालाना 17 हजार करोड़ रुपये की चोरी रुक गई है। आधार लिंकिंग से देश भर में कुल 3 करोड़ फर्जी और नकली राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में 23.20 करोड़ राशन कार्ड हैं जिसे शत प्रतिशत डिजिटल किया जा चुका है। अब तक 19 करोड़ यानी 82 फीसदी राशन कार्ड को आधार से जोड़ा जा चुका है। इसमें 2.95 करोड़ राशन कार्ड फर्जी मिले। इन फर्जी राशन कार्डों को रद्द करने से सालाना 17 हजार करोड़ की बचत हो रही है।

पौने चार करोड़ फर्जी गैस कनेक्शन खत्म 
सरकार ने रसोई गैस कनेक्शन से आधार लिंक करना अनिवार्य कर दिया। इसके साथ ही गैस सब्सिडी आधार लिंक्ड बैंक खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर बेनिफिट के तहत जाने लगा। इससे नकली कनेक्शन और चोर-बाजारी की समस्या पर रोक लगाने में मदद मिली है। 1 दिसंबर, 2017 तक के ताजा सरकारी आंकडों के मुताबिक आधार से लिंक करने की वजह से कुल 3,77,94,000 गैस कनेक्शन रद्द किए जा चुके हैं। इनमें फर्जी, एक नाम से अलग-अलग कंपनियों में कनेक्शन और निष्क्रिय गैस कनेक्शन शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा फर्जी गैस कनेक्शन रद्द किए गए हैं। वहीं एलपीजी कनेक्शन को आधार नंबर और बैंक खाते के जोड़ने के बाद से अब तक सरकार 29,668 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी की बचत कर चुकी है।

राज्य रद्द किए गए एलपीजी कनेक्शन 
उत्तर प्रदेश 55.87 लाख
महाराष्ट्र 36.15 लाख
आंध्र प्रदेश 28.72 लाख
बिहार 11.42 लाख
झारखंड 4.89 लाख

 

वित्त वर्ष सब्सिडी में बचत की रकम
2014-15 14,818 करोड़
2015-16 6,443 करोड़
2016-17 4,608 करोड़
2017-18 29,708 करोड़

मनरेगा के एक करोड़ फर्जी जॉब कार्ड रद्द 
मनरेगा में अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखते हुए आधार नंबर को इस योजना के लिए अनिवार्य कर दिया। आधार नंबर लिंक होने पर मनरेगा में देश भर में एक करोड़ से ज्यादा जॉब कार्ड फर्जी मिले। सरकार ने तत्काल प्रभाव से फर्जी जॉब कार्ड को रद्द कर दिया।

बिछड़े परिजनों को मिलाया
आधार सिर्फ भ्रष्टाचार रोकने में ही नहीं, लापता परिजनों को खोजने में भी कारगर साबित हुआ है। आधार कार्ड पहचान का आधार होने के साथ-साथ अपनों को मिलाने का जरिया भी बन रहा है। आधार कार्ड बने होने की वजह से अपनों से बिछड़ गए सैकड़ों लोगों को वापस अपना परिवार मिल गया है। आधार नंबर की बदौलत 500 गुमशुदा बच्चों का पता लगाया गया। इसका सबसे बड़ा मानवीय पक्ष यह है कि अगर आधार न होता तो सैकड़ों व्यक्ति गुमनामी के अंधेरे खो गए होते।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने संसद में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए Prevention of Money-Laundering (Maintenance of Records) पारित किया। इस कानून के तहत सरकार ने कई योजनाओं और सेवाओं के साथ आधार नंबर से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। जाहिर है सरकार के इस कदम से सब्सिडी बिचौलिए की जेब में न जाकर लाभार्थियों के खाते में जा रही है। 

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