Home केजरीवाल विशेष ‘आप’ में चलती है अरविंद केजरीवाल की गुण्डागर्दी !

‘आप’ में चलती है अरविंद केजरीवाल की गुण्डागर्दी !

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आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल की गुंडागर्दी चल रही है? क्या किसी एक व्यक्ति की पार्टी बनकर रह गई है आम आदमी पार्टी? ये सवाल पार्टी के कद्दावर नेता कुमार विश्वास की कही गई बातों से निकले हैं। कुमार विश्वास ने पार्टी के दागी विधायक अमानतुल्ला को पार्टी से बाहर नहीं निकाले जाने पर दुख जताया है। अमानतुल्ला ने कुमार विश्वास को भाजपा का एजेंट कहा था। अमानतुल्ला की इस बात से नाराज चालीस विधायकों ने उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की थी। लेकिन केजरीवाल ने इन विधायकों की भी बात नहीं मानी और अमानतुल्ला को सिर्फ पीएसी से बाहर किया। जाहिर है जिस आम आदमी पार्टी को बड़ा करने में कुमार विश्वास ने दिन रात एक कर दिया था, क्या कल का आया हुआ कोई नेता उनकी कुमार विश्वास पर अविश्वास पैदा करे और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मूक दर्शक बनकर देखता रहेगा? कुमार विश्वास ने ये भी कहा है कि अमानतुल्‍ला मुखौटा हैं, उनके पीछे से कोई और बोल रहा है। जाहिर है आम आदमी पार्टी एक व्यक्ति की जागीर बनकर रह गई है। ऐसे में केजरीवाल एंड कंपनी का अंतर्विरोध अब सतह पर आ गया है और पार्टी में टूट साफ दिख रही है। 

केजरीवाल पर ‘विश्वास’ का खतरा !
दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तख्तापलट की तैयारी हो रही है। आम आदमी पार्टी के भीतर तेजी से बदल रही स्थितियों के मुताबिक कुमार विश्वास खुद सीएम बनने की चाहत रखते हैं, वहीं मनीष सिसोदिया की भी महत्वाकांक्षाएं कुलांचें मार रही हैं। कहा जा रहा है कि कुमार विश्वास के साथ लगभग 34 विधायक हैं और उनका पलड़ा भारी है। हालांकि कुमार विश्वास ने किसी पद की महत्वाकांक्षा से इनकार किया है। इस बीच कुमार विश्वास का भाजपा से संबंध होने का आरोप लगाने वाले अमानतुल्ला को पीएसी से बाहर कर दिया गया है, लेकिन विश्वास समर्थकों की अमानतुल्ला को पार्टी से बाहर करने की मांग नहीं मानी गई है। जबकि मंगलवार को होने वाली पीएसी की बैठक भी रद्द कर दी गई है। 

विश्वास की सफाई पर कितना विश्वास ?
आज कुमार विश्वास कुछ देर के लिए मीडिया से रूबरू हुए और उन्होंने किसी भी पद की लालसा की बात से इनकार कर दिया। हालांकि अमानतुल्ला को पार्टी से बाहर नहीं निकाले जाने के लेकर उन्होंने दुख जताया। इससे पहले कुमार विश्वास के एक ट्वीट ने आम आदमी पार्टी की राजनीति में नया उबाल ला दिया। उन्होंने लिखा है-

पंजाब हार के बाद उथल-पुथल
सूत्रों से खबर है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों का एक गुट केजरीवाल को हटाने की मांग कर रहा है। कहा जा रहा है कि इसकी तैयारियां पंजाब चुनाव के नतीजों के बाद ही शुरू हो गई थीं। एमसीडी चुनाव नतीजों के बाद से पार्टी के भीतर ये मांग तेजी से उठी है कि केजरीवाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। खबर तो ये भी है कि आप पार्टी के असंतुष्ट गुट की कई बैठकें भी हो चुकी हैं। 

बंट गई आम आदमी पार्टी ?
पार्टी के कद्दावर नेता कुमार विश्वास खुलकर केजरीवाल की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं। जाहिर है वे बगावत के मूड में हैं। लेकिन केजरीवाल ने स्थितियों को भांपते हुए उन्हें छोटा भाई भी बताकर उन्हें ठंडा करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं कुमार विश्वास पर अविश्वास जताने वाले पार्टी के विधायक अमानतुल्ला को पीएसी से बाहर भी कर दिया है। हालांकि पार्टी की खेमेबंदी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। एक खेमे में केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह जैसे नेता हैं, जबकि दूसरे खेमे के नेता कुमार विश्वास हैं।

विश्वास का पलड़ा भारी !
विधायकों की संख्या के आधार पर देखें तो कुमार विश्वास का खेमा भारी नजर आ रहा है। कहा जा रहा है कि उनके साथ 34 विधायक हैं। दिल्ली में कपिल मिश्रा, इमरान हुसैन, आदर्श शास्त्री और राजेश ऋषि जैसे नेता विश्वास के साथ हैं, वहीं पार्टी के पंजाब से विधायक भी कुमार विश्वास के साथ हैं।
हालांकि केजरीवाल के दूत और कुमार विश्वास के पढ़ाई के दिनों से घनिष्ट मित्र रहे मनीष सिसोदिया उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल
दरअसल अरविंद केजरीवाल ने देशहित के मामलों में राजनीति की उसके कारण पार्टी नेताओं में भी उनके प्रति अस्मान का भाव है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक एक के बाद एक देश विरोधी बयानों, सेना पर सवाल उठाने और प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमलों की नीति ने आम आदमी पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया। ऐसे में केजरीवाल की जगह किसी और को नेतृत्व देने की जरूरत है। हालांकि कई नेताओं का मानना है कि पार्टी में किसी भी नेता से केजरीवाल का कद बहुत बड़ा है, इसलिए नेतृत्व परिवर्तन का सवाल ही नहीं।

डर गए हैं अरविंद केजरीवाल !
खबर है कि ताजा बगावत ने केजरीवाल को अंदर से डरा दिया है। यही कारण है कि उन्हें बयान जारी करके ईवीएम के मसले पर माफी मांगनी पड़ गई। डर इतना ज्यादा है कि बीते रविवार को होने वाली पार्टी के राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक भी आखिरी मिनट में रद्द कर दी गई थी। आज होने वाली पीएसी की बैठक भी रद्द कर दी गई। जाहिर है केजरीवाल को ये डर लग रहा है कि अगर विधायकों ने नेतृत्व परिवर्तन की बात औपचारिक तौर पर रख दी तो हालात बेकाबू हो जाएंगे और पार्टी के टूटने की भी नौबत आ सकती है।

विश्वास Vs ऑल
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और कुमार विश्वास के बीच तनातनी तो जगजाहिर है, लेकिन बीते गुरुवार को आशुतोष और कुमार विश्वास के बीच तूतू-मैंमैं की भी खबरें मीडिया में आ गई थीं। दरअसल कुमार विश्वास ने बैठक में कहा था कि- केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद पार्टी लगातार छह चुनाव हार चुकी है। जरूरी है कि इस बात पर चिंतन होना चाहिए। इसी बात को लेकर दोनों आमने-सामने आ गए थे।

दब जाएगी बगावत !
पार्टी में उठा-पटक के बीच कुछ नेता बीच-बचाव का रास्ता निकालने में भी जुटे हैं। इसी के तहत एक फॉर्मूला यह निकला है कि केजरीवाल पार्टी के संयोजक का पद छोड़ दें और एक नेता, एक पद के सिद्धांत का पालन करें। केजरीवाल की जगह ये पद कुमार विश्वास को दे दिया जाए। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और विधायक सोमनाथ भारती इस फॉर्मूले को लेकर दोनों खेमों को मनाने में जुटे हैं। लेकिन दूसरी तरफ खबर ये है कि केजरीवाल किसी भी हालत में कुमार विश्वास को संयोजक बनाने को तैयार नहीं हैं।

21 विधायकों की मुसीबत
लाभ के पद के मामले में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी हो चुकी है। ये फैसला भी कभी भी आ सकता है। ऐसे में एक झटके में 21 विधायकों की सदस्यता खत्म हो सकती है। यही कारण है कि दोनों ही खेमे खुलकर तलवार नहीं भांज पा रहे हैं। 

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