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कैशलेस इकोनॉमी की तरफ बढ़ता भारत, UPI के जरिए डिजिटल लेनदेन में 30 फीसदी की बढ़ोतरी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का डिजिटल इंडिया का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। मोदी सरकार का जोर हमेशा से डिजिटल लेनदेन को बढ़ाने और कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने पर रहा है। इस उद्देश्य को पूरा करने के मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं और अब इनका असर भी दिखने लगा है। नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानि NPCI के मुताबिक सितंबर के महीने में UPI के जरिए लेनदेन में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सितंबर में यूपीआई के जरिए कुल 40.58 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए हैं। इन डिजिटल लेनदेन का मूल्य करीब 59,835 करोड़ रुपये था। आपको बता दें कि अगस्त में कुल 54,212 करोड़ रुपये के 31.20 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए थे। वहीं BHIM UPI से 7,064 करोड़ रुपये के 1.63 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए।

अब तक UPI से 120 से ज्यादा बैंक जुड़ गए हैं। भीम एप को डाउनलोड करने वालों की संख्या भी बढ़ी है। अगस्त अंत तक करीब 3.16 करोड़ से अधिक भीम एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किए गए। वहीं, Paytm ने एक बयान में कहा है कि उसने सितंबर में 13.7 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन किए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी बनने की ओर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की बागडोर थामने के साथ ही डिजिटल इंडिया के लिए ऐसी मजबूत पहल की जिसके लगातार कई बड़े परिणाम सामने आ रहे हैं। ये ऐसे परिणाम हैं जिनसे देश ही नहीं विश्व जगत को भी भरपूर फायदा मिल रहा है। डिजिटल इंडिया का उद्देश्य है देश को डिजिटल लिहाज से एक सशक्त और मजबूत अर्थव्यवस्था बनाना। मौजूदा सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए हैं जिनसे आम लोगों को डिजिटली साक्षर होने की प्रेरणा तो मिली ही है, साथ ही वे खरीदारी से लेकर लेनदेन और कारोबार तक डिजिटल ढांचे में ढल रहे हैं।

सिलिकॉन वैली में केंद्रीय आईटी मंत्री के अनुभव
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डिजिटल इकोनॉमी पर सितंबर,2018 के मध्य में अर्जेंटीना में हुई G-20 की मंत्रिस्तरीय बैठक और उसके बाद कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली की यात्रा के दौरान अपने अनुभव को एक ब्लॉग के जरिए शेयर किया है। Times of India में अपने इस ब्लॉग में उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में हो रही डिजिटल क्रांति की गूंज पूरे विश्व में सुनाई पड़ रही है। वो लिखते हैं कि सिलिकॉन वैली के इनोवेशन की ताकत के पीछे दरअसल वहां काम कर रहे भारतीय हैं। समय आ गया है कि डिजिटल पर सिलिकॉन वैली जैसा इकोसिस्टम अब अपने देश में भी बने। वैसे डिजिटल के पैमाने पर पिछले चार सालों मे देश में क्रांतिकारी बदलाव स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं।

JAM के जरिए हजारों करोड़ की बचत
देश डिजिटल की राह में जितना ही आगे बढ़ रहा है, उतनी ही बड़ी राशि की बचत भी होती जा रही है जिनसे गरीबों और वंचितों की योजनाओं को और बल मिलेगा। जन धन, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति से 90,000 करोड़ रुपयों की बचत हो चुकी है। यानि ये बचत हुई है 440 सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को डिजिटल तरीके से पेमेंट किए जाने से। गुड गवर्नेंस का कॉन्सेप्ट आज तकनीक के सहारे बेहतरीन तरीके से काम कर रहा है। समयसीमा के भीतर कामकाज को पूरा करने में इसकी पूरी मदद ली जा रही है, वहीं लोगों तक सर्विस भी समय से पहुंच रही है। जनसामान्य को मोबाइल पावर यानि एम-पावर के जरिए सबल किया जा रहा है और इसके दायरे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

कॉमन सर्विस सेंटर से डिजिटल उद्यमशीलता को बढ़ावा
दो लाख ग्राम पंचायतों को मिलाकर देश भर में करीब 3 लाख कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से 300 सेवाएं-सुविधाएं लोगों तक पहुंच रही हैं। कॉमन सर्विस सेंटर के सहारे आधार एनरॉलमेंट, टिकट बुकिंग और जन सुविधाओं से जुड़ी कई प्रकार की ई-गवर्नेंस सर्विस दी जा रही हैं। कॉमन सर्विस सेंटर ने देश के गरीब, हाशिए पर खड़े, दलित और महिलाओं में डिजिटल उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया है। इन सेंटरों में 52,000 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं जो लोगों को टिकट बुकिंग, टेली मेडिसिन, जन औषधि और आधार सर्विस मुहैया करा रही हैं। इनके अलावा देश के 101 छोटे शहरों में 124 BPOs के माध्यम से युवाओं को घर बैठे ही रोजगार मिले हैं।

गांवों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर विशेष जोर
आंकड़े बताते हैं कि भारत की डिजिटल प्रोफाइल लगातार कैसे दमदार होती जा रही है। 130 करोड़ लोगों के इस देश में 121 करोड़ मोबाइल फोन हैं, 122 करोड़ आधार कार्ड बन चुके हैं, करीब 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं। देश भर में एक लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट किया जा चुका है और 2.5 लाख से अधिक गांवों में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सर्विस पहुंचाई जा चुकी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों को डिजिटली साक्षर किया जा चुका है।

जल्द ही ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी बनेगा इंडिया
नवंबर, 2016 से देश में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का दायरा करीब 200 प्रतिशत बढ़ चुका है। यहां के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी बड़ा विस्तार लिया है और पिछले चार वर्षों में यह दोगुना होने के बाद तेजी से बढ़ता जा रहा है। ई-कॉमर्स का दायरा भी लगातार विस्तारित हो रहा है और इसमें 19 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ोतरी हो रही है। ये सब ऐसी सकारात्मक और उत्साहजनक स्थितियां हैं जो आने वाले तीन से चार वर्षों में भारत को ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी बनने की दिशा में प्रेरित करेगा। 

नोटबंदी के फैसले के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर पैसों के डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाने पर रहा है। देशभर में उनकी इस मुहिम को जनता का समर्थन भी मिल रहा है। आइए एक नजर डालते हैं डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावे के लिए मोदी सरकार के प्रयासों और उनके असर पर।

पीएम मोदी की पहल पर चार साल में आठ गुणा बढ़ा डिजिटल पेमेंट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देशभर में लेन-देन के लिए ई-पेमेंट के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। लोग ई-पेमेंट को तवज्जो देने लगे है। उसी का असर है कि ई-पेमेंट के माध्यम से लेन-देन होने वाले की संख्या चार साल में आठ गुणा बढ़ी है। हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए सूचना तकनीक राज्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2013-14 में जहां ई-पेमेंट के जरिए मात्र 220 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। वहीं, 2017-18 में यह रकम आठ गुणा बढ़कर 2070.98 करोड़ रुपए हो गया। पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नकद लेन-देन को कम करने और ई-पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग सेक्टर से लेकर तमाम पेमेंट प्रोवाइडरों की सुविधाओं पर ध्यान दे रही है। केंद्र सरकार वित्तीय वर्ष 2018-19 में ई-पेमेंट के जरिए 3,013 करोड़ रुपए का कारोबार करने लक्ष्य निर्धारित किया है। 

मोबाइल वॉलेट से लेन-देन रिकॉर्ड 14,632 करोड़ पार
पीएम मोदी की पहल पर, नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद, देश में डिजिटल लेन-देन में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार डिजिटल इंडिया के तहत मोबाइल वॉलेट के माध्यम से जून महीने में रिकॉर्ड लेन-देन लगभग 14,632 करोड़ रुपए की हुई। इससे पहले मई में 14,047 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ था। इससे पहले अप्रैल महीने में यह आंकड़ा मात्र 11,695 करोड़ रुपये था। 

मोबाइल वॉलेट के उपयोग में नंबर एक बना भारत
भारत में डिजिटल पेमेंट के लिए मोबाइल वॉलेट का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। नवंबर 2016 में नोटबंदी के फैसले के बाद मोबाइल वॉलेट के इस्तेमाल में खासी बढ़ोतरी हुई है। आजकल सुपरमार्केट, परचून की दुकान, चाय के स्टॉल, पेट्रोलपंप और यहां तक कि ऑटो और टैक्सी के किराए के भुगतान में भी मोबाइल वॉलेट का उपयोग किया जा रहा है। ग्लोबल डाटा के सर्वेक्षण के अनुसार मोबालइट वॉलेट के उपयोग के मामले में भारत ने अमेरिका, चीन, ब्रिटेन जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।

आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में मोबाइल वॉलेट का उपयोग कई गुना बढ़ गया है। 2013 में जहां मोबाइल वॉलेट के माध्यम से 24 अरब रुपये का लेनदेन हुआ, वहीं 2017 में यह बढ़ कर 955 अरब हो गया। ग्लोबल डाटा की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कैश की जगह डिजिटल माध्यम से पैसों के लेनदेन में खासी वृद्धि दर्ज की गई है। सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में 55.4 प्रतिशत से अधिक लोग किसी न किसी तरीके से मोबाइल के जरिए पेमेंट करते हैं, जो विश्व में सबसे ज्यादा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2016 के अंत में नोटबंदी का फैसला लेने के बाद डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी हुई। हालांकि भारत में लोग बड़े लेनदेन के लिए डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करते हैं, लेकिन दैनिक जीवन में छोटे-मोटे भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट का उपयोग किया जा रहा है, और यह दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। 2013 में जहां 7 प्रतिशत लोग मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करते थे वहीं 2017 में यह आंकड़ा बढ़ कर 29 प्रतिशत हो गया।

भीम ऐप के माध्यम से हुए 1.63 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन
आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा लेनदेन पेटीएम से हुए हैं। पेटीएम प्लेटफॉर्म से 9.4 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए हैं, जो कुल ट्रांजैक्शन का 38 प्रतिशत है। वहीं गूगल की पेमेंट्स सर्विस तेज के माध्यम से 5.4 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, जो कुल ट्रांजेक्शन का 22 प्रतिशत हैं। सरकार समर्थित भीम ऐप से जून महीने में 1.63 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए हैं। यह मई महीने में हुए 1.4 करोड़ लेनदेन से 15 फीसदी ज्यादा है। जून महीने में हुए कुल यूपीआई ट्रांजेक्शन में भीम ऐप का 7 पर्सेंट हिस्सा था।

मोदी सरकार की नीतियों से डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ता भारत
मोदी सरकार डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए व्यापारियों को कैशबैक और ग्राहकों को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर छूट देने जैसे प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्व विभाग एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसमें डिजिटल मोड से पेमेंट करने वालों को एमआरपी पर छूट दी जाए, यह छूट अधिकतम 100 रुपये रखी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों को कैशबैक की भी सुविधा दी जा सकती है। कैशबैक कितना मिलेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी ने डिजिटल मोड से कितना पेमेंट लिया। इस प्रस्ताव को 4 मई को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में रखा जाएगा।

डेबिट कार्ड इंडस्ट्री में दूसरे नंबर पर पहुंचेगा ‘रुपे कार्ड’
डिजिटल क्रांति की दूनिया में एक और अच्छी खबर आई है। नैशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने दावा किया है कि इस वर्ष रुपे कार्ड भारतीय डेबिट कार्ड इंडस्ट्री में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का अपना रुपे कार्ड वर्ष 2018 में दो टॉप अंतर्राष्ट्रीय कार्ड वीजा और मास्टरकार्ड में एक को पीछे छोड़ देगा। यानी इन कार्डों के माध्यम से भारत में किए जाने वाले लेनदेन की संख्या और कीमत के मामले रुपे कार्ड इनमें से एक को पीछे छोड़ कर दूसरा स्थान हासिल कर लेगा।

आपको बता दें कि लगभग 30 देशों ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए ‘BHIM UPI’ की टेक्नॉलजी के लिए भारत से संपर्क किया है। जाहिर है कि वीजा और मास्टरकार्ड का तीन दशकों से भारत में डेबिट कार्ड इंडस्ट्री पर दबदबा था। हालांकि करीब छह साल पहले भारत के अपने रुपे कार्ड्स जारी करने के बाद स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ। NPCI के अधिकारियों के मुताबिक ‘जारी किए गए कार्ड्स की संख्या के लिहाज से रुपे कार्ड्स पहले ही नंबर वन पर है। इस साल प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीनों और ई-कॉमर्स पर वैल्यू और वॉल्यूम के लिहाज से नंबर दो पर पहुंच जाएगा। लिहाजा वीजा और मास्टरकार्ड के पीछे रुपे कार्ड नंबर तीन पर नहीं रहेगा, इनमें से एक को पीछे छोड़कर नंबर दो पर पहुंच जाएगा।

हर महीने बढ़ रहा है डिजिटल पेमेंट का आंकड़ा
यूपीआई, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की मोबाइल के जरिए डिजिटल पेमेंट का एक तरीका है। भारत इंटरफेस फॉर मनी यानी BHIM एप के ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2018 में यूपीआई प्लेटफॉर्म पर 17.12 करोड़ ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 19,100 करोड़ रुपयों का लेनदेन हुा। वहीं जनवरी 2018 महीने में यूपीआई प्लेटफॉर्म पर 15.17 करोड़ ट्रांजेक्शन के जरिए लगभग 15,540 करोड़ का लेनदेन हुआ। जबकि दिसंबर 2017 में 14.5 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे और लगभग 13,174 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। नवंबर, 2017 मे इसके जरिए 10.5 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे, और लगभग 9,669 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। इसी प्रकार अक्टूबर, 2017 में कुल 7.69 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे और लगभग 7,075 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। यानी आंकड़ों से साफ है कि हर महीने यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। आपको बता दें कि वैसे तो यूपीआई को अगस्त, 2016 में ही लांच किया गया था, लेकिन इसके जरिए लेनदेन की संख्या में बढ़ोतरी 8,नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद हुई।

महीना डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या UPI के जरिए लेनदेन रुपयों में
अक्टूबर,2017 7.69 करोड़ 7,075 करोड़ 
नवंबर, 2017 10.5 करोड़ 9,669 करोड़ 
दिसंबर, 2017 14.5 करोड़ 13,174 करोड़ 
जनवरी, 2018 15.17 करोड़ 15,540 करोड़
फरवरी,2018 17.12 करोड़ 19,100 करोड़

 

डिजिटल पेमेंट एप BHIM निभा रहा है अहम भूमिका
आंकड़ों से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल पेमेंट बढ़ाने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की ‘Trend and Progress of Banking in India’ (2016-17) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में यूपीआई प्लेटफार्म के जरिए कुल 6,950 करोड़ रुपये के 1.79 करोड़ ट्रांजेक्शन किए गए थे। जैसा की हमने बताया कि नोटबंदी के फैसले के बाद डिजिटल पेमेंट बढ़े और जून, 2016 में एक करोड़ ट्रांजेक्शन का आंकड़ा पार हो गया। आपको बता दें कि नवंबर, 2016 में नोटबंदी के बाद ही 30 दिसंबर को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अपना डिजिटल पेमेंट एप BHIM लांच किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस मौके पर कहा था कि भीम एप डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा और इसके जरिए बगैर किसी गलती के सिर्फ मोबाइल नंबर और VPAs के इस्तेमाल से पैसों का ट्रांसफर किया जा सकेगा। हुआ भी यही, दिसंबर में भीम एप लांच होने के बाद ही डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला, और आज इसका नतीजा सभी के सामने हैं।

सुरक्षित है यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट
यूपीआई के जरिए पैसों के लेनदेन में कहीं भी कोई दिक्कत नहीं होती है, साथ ही इसके जरिए ट्रांजेक्शन काफी सुरक्षित भी है। इसमें स्मार्ट फोन पर पहले एप लांच किया जाता है और फिर उसी के द्वारा जिसे पैसा भेजना है उसके मोबाइल नंबर को जोड़कर रकम ट्रांसफर कर दी जाती है। इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है, साथ ही पैसा ट्रांसफर होने के बाद तत्काल पता भी चल जाता है। सरकार की तरफ से लांच किए गए BHIM एप के अलावा निजी कंपनियों की तरफ से संचालित ‘PhonePe’ और ‘Tez’ एप भी यूपीआई प्लेटफार्म के जरिए डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।

डेबिट कार्ड, भीम ऐप से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर अब कोई चार्ज नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिजिटल पेमेंट के लेकर प्रोत्साहित करना चाहते हैं। लोगों को कैशलेस पेमेंट के लिए प्रेरित करने के लिए मोदी सरकार ने डेबिट कार्ड, भीम ऐप और अन्य पेमेंट गेटवे से 2000 रुपये तक के लेन-देन पर सभी चार्जेस हटा दिए हैं। यह सुविधा एक जनवरी, 2018 से लागू हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले महीने ही डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए डेबिट कार्ड, भीम यूपीआई या आधार आधारित अन्य भुगतान प्रणालियों के जरिए 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट दर (एमडीआर) चार्जेस का बोझ सरकार द्वारा उठाने के प्रस्ताव को सहमति दी थी। वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार के मुताबित दिसंबर तिमाही में भीम ऐप के जरिए लेन-देन 86 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान भीम ऐप के जरिए 13,174 करोड़ रुपये के 14.56 करोड़ लेन-देन हुए। राजीव कुमार ने कहा, डिजिटल भुगतान को और प्रोत्साहन देने के लिए सरकार डेबिट कार्ड-भीम से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर चार्जेस की भरपाई करेगी। दुकानदारों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। केंद्र सरकार 1 जनवरी, 2018 से दो साल तक एमडीआर का बोझ उठाएगी ।बैंकों को इसका भुगतान सरकार करेगी। इससे सरकार पर 2,512 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से मानना रहा है कि भ्रष्टाचार को डिजिटल पेमेंट के जरिए ही काबू में पाया जा सकता है। यही वजह है उन्होंने इस ओर लगातार प्रयास किए हैं। एक नजर डालते हैं रुपयों के लेनदेन में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने क्या क्या किया है।

डिजिटल भुगतान में भारत ने यूके, चीन और जापान को भी पछाड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की कोशिशें की हैं। उनके प्रयासों से हुई सफलता का लोहा दुनिया भी मानने लगी है। एक सर्वे में पता चला है कि डिजिटल पेमेंट्स के मामले में भारत ने यूनाइटेड किंगडम, चीन और जापान जैसे देशों को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। लाइव मिंट की खबरों के अनुसार एफआईएस के सर्वे में डिजिटल भुगतान प्रणाली में भारत को 25 देशों में सबसे विकसित माना गया है। एफआईएस अमेरिका स्थित एक बैंकिंग टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर है जिसने हर वक्त उपलब्धता, स्वीकार किए जाने लायक और तत्काल भुगतान के मापदंडों के आधार पर यह सर्वे किया है। इस सर्वे से यह भी साफ हो गया है कि यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भी लोकप्रियता के नए शिखर को छू लिया है। यानी लोग कैश की जगह प्वॉइंट ऑफ सेल मशीन और ई-वॉलेट का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट प्रणाली में भारत सबसे सक्षम
गौरतलब है कि फ्लेवर्स ऑफ फास्ट के नाम से तैयार एफआईएस सर्वे के लिए फास्टर पेमेंट्स इनोवेशन इंडेक्स (FPII) का इस्तेमाल किया गया। इसके तहत 1 से 5 तक के स्केल का उपयोग हुआ, जिसमें लेवल- 1 तेज पेमेंट, लेवल- 3 लोगों तक पहुंच और 24 घंटे उपलब्धता और लेवल- 5 उपभोक्ता को आकर्षित करने वाले अतिरिक्त क्षमता शामिल हैं। भारत की IMPS विश्व की एकमात्र प्रणाली पायी गई है जो तेज भुगतान संवर्द्धन सूचकांक रैंक में लेवल 5 पर है।

डिजिटल पेमेंट से पारदर्शी शासन को मिल रही ‘शक्ति’
भ्रष्टाचार से निपटने, पारदर्शी और प्रभावी शासन उपलब्ध कराने और गरीब-अमीर के बीच खाई को पाटने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया का कंसेप्ट सामने रखा है। डिजिटल पेमेंट को प्रचलन में लाना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म जेफरीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि बैंक उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल पेमेंट बढ़ा है।

40 प्रतिशत बढ़े NEFT
नोटबंदी के बाद बैंक उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल पेमेंट बढ़ा है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (NEFT) में भी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नवंबर 2016 में जहां 12.3 करोड़ NEFT के माध्यम से 88,078 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था, वहीं जनवरी 2018 में 17 करोड़ NEFT के साथ 1,53,741 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। इस तरह कुल मिलाकर NEFT में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

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IMPS में 200 प्रतिशत की वृद्धि
IMPS की संख्या में भी बढ़त देखने को मिली है। इसके तहत 24X7 के लेनेदेन की उपलब्धता और आकर्षक पेमेंट्स सिस्टम की वजह से इसमें भी करीब 200 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिल रही है। नवंबर 2016 में जहां 3.6 करोड़ IMPS हुए थे वहीं जनवरी 2018 में यह बढ़ कर 9.9 करोड़ हो गए हैं। नोटबंदी के बाद प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीनों पर भुगतान तीन गुना बढ़ा है।

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कार्ड स्वाइप भुगतान में बढ़ोतरी
08 नवंबर, 2016 को डिमोनिटाइजेशन के बाद कार्ड स्वाइप कर भुगतान करने में भी वृद्धि हुई है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2016 में जहां 20.5 करोड़ कार्ड स्वाइप हुए थे, वहीं जनवरी 2018 में कार्ड स्वाइप की संख्या 27.1 करोड़ पहुंच गई।  

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Rupay का इस्तेमाल बढ़ा
जेफरीज के अनुसार ई-कॉमर्स के लिए Rupay का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके साथ ही ई-कॉमर्स पर किए जाने वाला खर्च भी दोगुना से अधिक बढ़ा है। गौरतलब है कि Rupay वीजा और मास्टरकार्ड की ही तरह घरेलू कार्ड पेमेंट सिस्टम है। प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल सोसाइटी बनाने के आह्वान का देश के लोगों पर असर हो रहा है अब इसके प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आ रहे हैं।

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लेस कैश व्यवस्था बनाना उद्देश्य
रिजर्व बैंक के अनुसार 4 अगस्त तक लोगों के पास 14,75,400 करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थे। जो वार्षिक आधार पर 1,89,200 करोड़ रुपये की कमी दिखाती है। जबकि वार्षिक आधार पर पिछले साल 2,37,850 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस प्रकार, बिना किसी प्रतिबंध के, नोटबंदी के बाद कैश का प्रचलन कम हो रहा है।

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