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राष्ट्र विकास का सूत्र लेकर बढ़ रहे पीएम मोदी पर हर हथकंडा फेल

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आने वाले कुछ विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव का समय निकट आता देख केंद्र की मोदी सरकार के विरोधी राजनीतिक हथकंडे अपनाने में सक्रिय हो चुके हैं। वो ऐसे हर दांव-पेच आजमाने में जुटे है जिससे सरकार को कटघरे को डाल सकें लेकिन विकास के मूल एजेंडे पर चल रही मोदी सरकार पर विरोधियों का हर वार बेकार साबित हुआ है। आइये ऐसे दस हथकंडों पर नजर डालते हैं जिन्हें आजमा-आजमाकर देश में पीएम मोदी के विरोधी इसलिए पस्त पड़ जाते हैं क्योंकि जनता इसके पीछे के सियासी मंसूबों को समझ चुकी है।

1.बीएचयू हंगामे में विरोधियों का पर्दाफाश

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रशासनिक इंतजाम को चाक चौबंद किये जाने की मांग के साथ किये गए छात्राओं के आंदोलन को तब कुछ असामाजिक तत्वों ने हथिया लिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के दौरे पर थे।  घटनाक्रम की प्रारंभिक जांच में असामाजिक तत्वों का हाथ साबित भी हुआ है। छात्राओं के आंदोलन में शामिल रही बीएचयू में कानून की पढ़ाई करने वाली एक छात्रा ने भी इस बात की तस्दीक की है कि कैसे बाहरियों ने उनके आंदोलन पर कब्जा कर लिया। बीएचयू में जिस तरह से हंगामे का रंग दिखा उससे ये साफ जाहिर हो रहा था कि इसके लिए बाकायदा पूरी प्लानिंग की गई थी। एक छात्रा से हुई छेड़छाड़ की एक घटना की आड़ लेकर विरोधियों द्वारा प्रायोजित हंगामे का समय कुछ ऐसा चुना गया जब पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर थे। हद तो तब हो गई जब कुछ ‘सेक्युलर’ पत्रकार और पीएम मोदी के विरोधी इस घटनाक्रम में अपने लिए मौका निकालने में कुछ इस कदर जुटे कि तथ्यों की पड़ताल किये बगैर भी अपने मतलब के पोस्ट डालने में जुट गये। मृणाल पांडे ने तो बीएचयू में लाठीचार्ज में घायल के नाम पर लखीमपुर खीरी की एक अलग ही घटना से जुड़ी तस्वीर पोस्ट कर दी। पीएम मोदी को घेरने के लिए ये विरोधियों की बेचैनी का सबूत है जिसमें उनका खुद का भांडा फूट गया है।

2.रोहिंग्या के पैरोकारों की खुली पोल

देश में अचानक कुछ चेहरे और संगठन रोहिंग्या समुदाय के लोगों के हमदर्द बनकर सामने आ गए हैं। भारत में अभी 40 हजार के करीब रोहिंग्या जम्मू कश्मीर, दिल्ली समेत कई हिस्सों में रह रहे हैं। पिछले कुछ समय से भारत में घुसपैठ कर जहां-तहां बसने की कोशिश में लगे ये वो लोग हैं जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। अपने इस्तेमाल के लिए आतंकी संगठनों की इन पर नजर है, यहां तक कि जम्मू कश्मीर में कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं जिनमें रोहिंग्या समुदाय के लोगों का भी हाथ माना जा रहा है। केंद्र सरकार इनकी वापसी की कवायद शुरू कर चुकी है लेकिन देश में प्रशांत भूषण और असदुद्दीन ओवैसी समेत रोहिंग्या के कई पैरोकार बनकर निकले हैं जो इन्हें यहां बसाने को उतावले नजर आ रहे हैं। ये वैसे चेहरे हैं जो म्यामांर में रोहिंग्या समुदाय के हाथों दर्जनों हिंदुओं की हत्या की दहलाने वाली खबर पर मौन साध जाते हैं। रोहिंग्या को भारत में बसाकर आने वाले समय में राजनीतिक लाभ लेने के अपने खेल में ये पकड़े जा चुके हैं।  

3.‘असहिष्णुता’ का एजेंडा फ्लॉप पर फ्लॉप

बेंगलुरु में महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या होते ही ‘सेक्युलर’ पत्रकार इस नतीजे पर पहुंच जाते हैं कि केंद्र सरकार इसके लिए जिम्मेदार है। हत्या के तुरंत बाद मीडिया ट्रायल शुरू होता है और बिना किसी जांच, गवाह या साक्ष्य के सीधे ये मोदी सरकार पर निशाने साधने लगे। लेकिन इनके प्रदर्शन की तब पोल खुल गई जब देशद्रोह के आरोप में घिरे रहे कन्हैया कुमार ने माइक थामकर इनका नेतृत्व करना शुरू कर दिया। लेफ्ट विचारधारा वाले पत्रकारों ने तो सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां तक की और ट्विटर पर #BlockNarendraModi कैंपेन चलाया। लेकिन सबने देखा कि कैसे इस कैंपेन का उल्टा असर हुआ और ट्विटर पर पीएम मोदी के फॉलोअर्स की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई। ‘सेक्युलर’ पत्रकारों की ये जमात तब पकड़ी गई जब लोगों ने इनके दोहरे मानदंड को देखा। गौरी लंकेश की हत्या पर ये जितने ही आक्रामक थे, उतने ही चुप नजर आए त्रिपुरा में पत्रकार शांतनु भौमिक की हत्या को लेकर। शांतनु की हत्या पर इन्होंने तब थोड़ी-बहुत प्रतिक्रिया दी जब इनके दोहरेपन को सामने लाया गया।  

4.अर्थव्यवस्था पर अफवाह की साजिश नाकाम

कांग्रेस हो या लेफ्ट, विपक्ष की ज्यादातर पार्टियों ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की लगातार आलोचना का भी एक हथकंडा अपना रखा है। नोटबंदी और जीएसटी पर ये विशेष रूप से निशाना साधते रहते हैं, लेकिन इनकी आलोचना में दरअसल इन कदमों की कामयाबी से होने वाली इनकी तकलीफ छलककर सामने आती है। नोटबंदी का कदम जहां अर्थव्यवस्था में पसरे भ्रष्टाचार को खंगालने वाला साबित हुआ है वहीं जीएसटी व्यापारियों के लिए कारोबार की एक सहज स्थिति लेकर सामने आया है। विरोधी अर्थव्यवस्था पर अपनी अधिकतर बातें सतही तौर पर रखते हुए अफवाह फैलाने की कोशिश करते हैं लेकिन पूरा देश देख रहा है कि टेरर फंडिंग करने वाले हुर्रियत नेताओं पर शिकंजा भी मोदी सरकार में ही जाकर कसा है। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टैनली की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले दस साल में भारत की अर्थव्यवस्था छह खरब डॉलर की हो जाएगी और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा। ऐसे में अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार के सुधारवादी कदमों से विपक्ष खासकर कांग्रेस की जलन स्वाभाविक है।

5.योजनाओं को अपना बताने की विरोधियों की चाल ध्वस्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कई मौलिक योजनाओं से देशवासियों का दिल जीत लिया। जन-धन योजना हो, बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मुद्रा योजना या फिर उज्ज्वला …ऐसी कई योजनाओं के जरिये लोगों ने देश की सवा सौ करोड़ जनता के प्रति पीएम मोदी की भावनाओं को महसूस किया। उन्होंने ये देखा कि हर योजना के केंद्र में देश के गरीब और किसान हैं, जिनके विकास से ही देश का सही मायने में विकास होगा। इन योजनाओं की लोकप्रियता और सफलता के साथ ही कांग्रेस ने ये राग अलापना शुरू किया कि मोदी सरकार उसकी ही योजनाओं को अपनी तरह से पेश कर वाहवाही बटोर रही है। लेकिन जनता कांग्रेस के दावों का सच जानती है। वो ये भी देख रही है कि कैसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से अब सरकारी स्कीम के तहत उसे मिलने वाली उस रकम का पूरा सौ फीसदी उसके खाते में आता है, जिस रकम की कांग्रेस के शासन में बंदरबांट हुआ करती थी।    

6.पीएम मोदी के विरोधियों के बहकावे में नहीं आए किसान

मोदी सरकार के विरुद्ध विपक्ष एक हथकंडा इसकी नीतियों को किसान विरोधी बताकर अपनाता है। लेकिन किसानों के लिए मोदी सरकार का दिल किस कदर धड़कता है इसका प्रमाण यही है कि इस सरकार ने 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने की ठान रखी है। किसानों की बेहतरी के लिए यह सरकार एक-पर-एक कई ऐसी योजनाओं को जमीन पर लागू कर चुकी है जो विपक्ष को इसलिए नहीं दिख रहीं क्योंकि किसानों के नाम पर वोट बैंक की उसकी राजनीति को झटका लगा है। न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम मुआवजा देने वाली फसल बीमा योजना ने नुकसान को लेकर किसानों की चिंता को दूर करने का काम किया है। अपनी फसल को किसान बाजार में सही कीमत पर बेच सकें इसके लिए e-NAM यानी ई-कृषि मंडी की योजना लाई गई। सिर्फ किसानों को ही खेती के लिए यूरिया मिले इसके लिए यूरिया की नीम कोंटिंग की गई जिससे इसकी कालाबाजारी की समस्या पूरी तरह खत्म हो चुकी है। मोदी सरकार में गरीबों-किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान विपक्ष से देखी नहीं जा रही है और वो परेशान है।

7.बुलेट ट्रेन पर राजनीति कर घिरे विरोधी

जापान के सहयोग से भारत में पहली बुलेट ट्रेन चलाने के लिए रखी गई नींव ने विरोधियों की नींद उड़ाकर रख दी। देश आधुनिक प्रौद्योगिकी से लैस होकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है लेकिन विपक्ष इसे अमीरी-गरीबी से जोड़कर विकास की इस रफ्तार पर ब्रेक लगाना चाहता है। कांग्रेस के पास इसका तो कोई जवाब नहीं कि छह दशक तक सत्ता में रहकर भी वो भारतीय रेलवे को फायदे में क्यों नहीं ला सकी, लेकिन आज जब मोदी सरकार उस दिशा में अग्रसर हुई है तो वो बुलेट ट्रेन पर राजनीतिक रोटी सेक रही है। दरअसल विरोधियों की दिक्कत ये है कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से भारत भी तेज ट्रेन रफ्तार प्रणाली रखने वाले देशों में शामिल हो जायेगा। भारतीय रेलवे की सुस्त पड़ती कार्यक्षमताओं में भी तेजी आएगी, साथ ही ये न्यू इंडिया के सपनों को साकार करने में भी मददगार साबित होगा। मोदी सरकार के खाते में बुलेट ट्रेन का क्रेडिट जाना कांग्रेस पचा नहीं पा रही है।

8.पीएम के विदेश दौरे पर सवाल उठाना भी पड़ा भारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे को लेकर विरोधी अक्सर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन उनके सवाल को इसलिए गंभीरता से नहीं लिया जाता क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा देश की जनता के हित में होता है, देश के लिए निवेश बढ़ाने वाला होता है, देश के सुरक्षा तंत्र को अधिक से अधिक मजबूती देने के लिए होता है। यह प्रधानमंत्री के विदेश दौरों का ही नतीजा है कि देश में FDI में बढ़ोतरी हुई। अपनी यात्राओं में पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया के लिए भी समर्थन जुटाया है। इतना ही नहीं हमारी सर्जिकल स्ट्राइक को दुनिया भर से मिले समर्थन के पीछे भी पीएम की विदेश यात्राओं का प्रभाव रहा। सच ये है कि पीएम की विदेश यात्राओं ने भी विश्व मंच पर भारत की आवाज को सशक्त  बनाने का काम किया है। विपक्ष का एक और हथकंडा मार खा चुका है।

9.आतंक पर सख्त नहीं होने का हथकंडा चले तो कैसे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व मंच पर बनी ये भारत की साख है जो पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय जगत में एकदम अलग-थलग पड़ चुका है। शायद पाकिस्तान की पस्त हुई ये हालत पीएम मोदी के विरोधियों से नहीं देखी जा रही, इसलिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भाषण की वो खुलकर तारीफ करते नजर नहीं आए। सुषमा स्वराज ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए थे लेकिन आज स्थिति ये है कि भारत डॉक्टर और वैज्ञानिक पैदा कर रहा है तो पाकिस्तान आतंकवादी और ‘जिहादी’। सुषमा के जवाब में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने भारतीय लोकतंत्र पर हमला बोलते हुए एक ऐसी जख्मी लड़की की तस्वीर दिखाई जिसका भारत से कोई लेना-देना ही नहीं था। इस झूठ के साथ पाकिस्तान अपनी एक और बड़ी किरकिरी करवा गया। पाकिस्तान पर अब इस झूठ के लिए संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई होने वाली है। पीएम मोदी की कूटनीति कमाल है कि आज चीन भी ये मान रहा है कि पाकिस्तान में आतंकवाद है।  

10.चीन पर हथकंडा आजमाने का पूरा मौका भी नहीं मिला

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने डोकलाम गतिरोध मामले पर जिस तरह से चीन को अपने कदम खींचने पर मजबूर कर दिया, उससे विरोधियों के हाथ से एक बड़ा मौका निकल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने यह विवाद बेहद शांतिपूर्वक तरीके से निपटाया है जिससे कई लोग हैरान थे कि हमने यह कैसे किया। गौर करने वाली बात है कि चीन की ओर से लगातार आ रही धमकियों के बावजूद भारत अपने रुख से टस से मस नहीं हुआ और आखिर में चीन को अपनी शर्तों को छोड़ना पड़ा। यह पहली बार हुआ जब चीन के साथ किसी गंभीर मुद्दे को भारत ने इतनी मजबूती के साथ हल किया है। इससे पहले विरोधी सरकार पर डोकलाम मामले को लेकर ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते रहे थे।

जाहिर है पीएम मोदी के नेतृत्व में देश का कायाकल्प हो रहा है। न्यू इंडिया का मिशन तेजी पकड़ने लगा है। स्वच्छता अभियान से लेकर पीएम की हर पहल और हर योजना में पूरा देश एकजुट है। राष्ट्र भावना जागृत हो चुकी है। अपने-आप एक जन भागीदारी उमड़ रही है जहां राजनीति के लिए कोई जगह नहीं। देशवासी भी यह महसूस कर रहे हैं कि यह सब केंद्र की सत्ता में नरेंद्र मोदी की सरकार के आने के बाद ही संभव हुआ है। पीएम मोदी के राजनीतिक विरोधी अपनी हताशा में हथकंडे अपनाने में जुटे हैं जो फेल पर फेल होते जा रहे हैं।

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