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विश्वस्तरीय शिक्षा को लेकर प्रतिबद्ध मोदी सरकार, हायर एजुकेशन के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार का जोर शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कर उसे विश्वस्तरीय बनाने पर है। पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देश का शैक्षणिक ढांचा सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब मोदी सरकार ने 2022 तक शिक्षा के बुनियादी ढांचे और उसकी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 2022 तक उच्‍च शिक्षा में बुनियादी ढांचे और प्रणालियों (आरआईएसई) को मजबूत बनाने एवं शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी (एचईएफए) के कार्य विस्तार को मंजूरी प्रदान कर दी।

इस सुविधा का सभी संस्‍थानों तक विस्‍तार करने के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने हेफा के अंतर्गत पांच योग्‍यताओं तथा मूलधन के मुख्‍य अंश के पुनर्भुगतान की प्रक्रियाओं को मंजूरी दी है। इन सभी मामलों में सरकारी अनुदान के माध्‍यम से ब्‍याज का लगातार भुगतान किया जाएगा। यह सुविधा 2014 के बाद स्थापित संस्थान, ऐसे केंद्रीय विश्‍वविद्यालय जिनके पास बहुत कम आंतरिक संसाधन हैं और स्‍कूली शिक्षा, स्‍वास्‍थ्य शिक्षा अवसंरचना जैसे एम्‍स, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय के संदर्भ में है।इसके तहत 10 साल से अधिक पुराने तकनीकी संस्‍थान के संदर्भ में संपूर्ण मूलधन का पुनर्भुगतान आंतरिक रूप से संग्रह किए गए बजट संसाधनों के द्वारा होगा। 2008 और 2014 के बीच शुरू किए गए तकनीकी संस्‍थान के संदर्भ में मूलधन की 25 फीसदी राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्त करके होने की बात कही गयी है।

देश में 2014 के पहले शुरू किये गये केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के संदर्भ में मूलधन की 10 फीसदी राशि का पुनर्भुगतान आंतरिक संसाधनों द्वारा तथा मूलधन की शेष राशि के लिए अनुदान प्राप्‍त करके पूरा करने की बात कही गयी है। इसके साथ ही, नए स्‍थापित संस्‍थान (2014 के बाद शुरू) के संदर्भ में स्‍थायी परिसर के निर्माण के लिए वित्‍तीय सहायता मूलधन और ब्‍याज के भुगतान के लिए अनुदान उपलब्‍ध कराया जाएगा। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने सरकारी बांड के जरिये धनराशि जुटाने की प्रक्रियाओं को भी मंजूरी दी है।

आपको बताते हैं कि मोदी सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और रिसर्च, इनोवेशन को बढ़ाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं। 

शिक्षा की क्वालिटी के साथ अवसरों को बढ़ाने पर जोर
मोदी सरकार का Quality of Education और Quantity of Opportunities दोनों पर जोर है। केंद्र सरकार ने उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों की सभी परीक्षाओं को संचालित करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाई है। देश में एजुकेशन सिस्टम को मजबूती देने के लिए एचआरडी मंत्रालय की ओर से कई स्तर पर काम चल रहे हैं। GIAN (Global Initiative of Academic Networks), SWAYAM (Study Webs of Active–Learning for Young Aspiring Minds), Smart India Hackathon, Quality Education, रिसर्च और इनोवेशन इन सब को तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही देश में 20 Institute of Eminence स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत कुछ चिन्हित Public Sector Institutions को 10 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। केंद्र सरकार ने सभी Indian Institute of Management को स्वायत्तता देने के लिए कानून बनाया है। इसके साथ ही  यूजीसी ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए शिक्षा के उच्च मानकों को पूरा करने वाले 60 उच्च शिक्षा संस्थानों को भी स्वायत्तता देने का निर्णय लिया है।

अटल टिंकरिंग लैब के लिए तीन हजार और स्कूलों का चयन
अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) के लिए 3,000 और स्‍कूलों का चयन किया है। इसके साथ ही एटीएल स्‍कूलों की कुल संख्‍या बढ़कर 5,441 हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्कूलों, विश्वविद्यालयों में इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 26 दिसंबर, 2017 को अटल इनोवेशन मिशन के तहत अटल टिंकरिंग लैब की शुरुआत की गई। चयनित स्‍कूलों को बच्‍चों के बीच इनोवेशन और स्टार्टअप की भावना बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में बतौर अनुदान 20 लाख रुपये दिए जाएंगे। नीति आयोग के इस अटल नवाचार मिशन के तहत जल्‍द ही देश के प्रत्‍येक जिले में अटल टिंकरिंग लैब की स्‍थापना की जाएगी। नए स्कूलों के चयन से नवप्रवर्तक के रूप में 10 लाख बच्चों को तैयार करने के मिशन को हकीकत रूप देने में मदद मिलेगी।ये एटीएल इन विद्यार्थी अन्‍वेषकों के लिए इनोवेशन हब के रूप में कार्य करेंगी।

रिसर्च को प्राथमिकता
सरकार ने स्वास्थ्य संस्थानों के साथ-साथ सभी तरह के प्रमुख शैक्षिक संस्थानों में जनरल और रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए निवेश को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए सरकार Revitalising of Infrastructure and Systems in Education यानि RISE के तहत 1 लाख करोड़ के निवेश की योजना पर काम कर रही है।

छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि से टैलेंट को बढ़ावा
केंद्र सरकार की National Means-cum-Merit Scholarship Scheme (NMMSS) के अंतर्गत 2014-15 से 2016-17 तक 3.81 लाख छात्रवृत्तियों को मंजूरी दी गई। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 4.13 लाख से अधिक छात्रवृत्तियों को मंजूर किया गया। वहीं National Scheme of incentive to Girls for Secondary Scholarship (NSIGSE) के तहत 2014-15 में 9.71 लाख छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी गई, जबकि 2017-18 में 9.73 लाख से अधिक छात्राओं को इसका लाभ मिला। AICTE के आंकड़ों के मुताबिक एमटेक के GATE क्वालिफाइड 11,862 स्टूडेंट्स के लिए करीब 292.50 करोड़ रुपये जारी किए गए। पिछले तीन वर्षों को जोड़ें तो यह रकम 1,076 करोड़ रुपये की है।

प्रधानमंत्री युवा योजना से भी उद्यमशीलता को बढ़ावा
इस योजना के तहत युवाओं के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है जिसमें ई-लर्निंग और क्लास रूम टीचिंग पर फोकस है। ई-सेल वास्तविक जीवन में आने वाली परिस्थितियों से निपटने की क्षमता का विकास करने के लिए युवाओं की मदद करने को बनाया गया है। इस योजना में जितने भी संस्थान और स्टूडेंट शामिल होते हैं उनके लिए  भर में  55 रीजनल/नोडल हब के नेटवर्क के सहारे मदद की व्यवस्था है।

खेलो इंडिया कार्यक्रम की पुनर्संरचना
पुनर्संरचना की इस कवायद के तहत देश में स्पोर्ट्स कल्चर को नए सिरे से जमीनी स्तर पर विकसित किया जा रहा है। खेलों की दुनिया में भारत एक ताकत बने, इसके लिए अपने देश में खेले जाने वाले सभी खेलों के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन में किसी भी प्रकार की कमी ना रहे इसके लिए विभिन्न स्तरों पर प्राथमिक खेल विधाओं में चिन्हित किए गए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को 8 वर्षों तक 5 लाख रुपये सालाना की वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। 2017-18 से 2019-20 तक के लिए लगभग 1,756 करोड़ रुपये की वित्तीय राशि को मंजूरी दी जा चुकी है। देश में खेलों के लिए पहली बार एक सकारात्मक और उत्साहजनक माहौल तैयार हो रहा है, इसका अंदाजा इसी वर्ष गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के प्रदर्शन से लगता है। यहां भारत 26 गोल्ड, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज के साथ कुल 66 पदक जीतकर पदक तालिका में तीसरे स्थान पर रहा।  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं: ‘’ ‘खेलो इंडिया’ सिर्फ पदक जीतने का मसला नहीं है, यह खेल को बढ़ावा देने के लिए एक जन आंदोलन है।’’

खेलों को बढ़ावा देने के लिए अन्य बड़ी गतिविधियां:

नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी (मणिपुर) – स्पोर्ट्स एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए यह अपनी तरह की पहली यूनिवर्सिटी है। यहां स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और स्पोर्ट्स कोचिंग से संबंधित शिक्षा की व्यवस्था तो होगी ही, यह चुनिंदा ट्रेनिंग सेंटरों के लिए नेशनल ट्रेनिंग सेंटर के रूप में भी कार्य करेगी। 

पैरा एथलीट के लिए ट्रेनिंग सेंटर – पिछले वर्ष गांधीनगर, गुजरात में विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला ट्रेनिंग सेंटर खोला गया जो पैरा एथलीटों को समर्पित है। देश में यह अपनी तरह का पहला ट्रेनिंग सेंटर है।

स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च पोर्टल का लॉन्च – यह पोर्टल प्रतिभाशाली युवाओं के लिए एक ऐसा पारदर्शी मंच है जहां वे अपनी उपलब्धियों को अपलोड करते हैं। इसके आधार पर उनके लिए कई आगे बढ़ने के कई अवसरों की संभावनाएं बन रही हैं।

सिर्फ शिक्षा ही नहीं मोदी सरकार ने युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। डालते हैं एक नजर-

स्टार्ट-अप इनोवेशन्स से अपनी तकदीर बदल रहे युवा
देश के युवाओं के सपनों को बल देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्ट-अप इंडिया की शुरुआत की थी। पिछले चार वर्षों में ही स्टार्ट-अप के क्षेत्र में आज भारत का अहम स्थान है और उसने ग्लोबल स्टार्ट-अप इको-सिस्टम में खुद को प्रतिष्ठित किया है। स्टार्ट-अप सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए लोगों से पर्याप्त पूंजी और लोगों से जुड़ना बेहद जरूरी है। इसके लिए आगे बढ़ने में फंड की कमी एक बड़ी समस्या थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस समस्या को खत्म कर दिया। युवाओं को इनोवेशन्स की सुविधा प्रदान करने के लिए मोदी सरकार ने ‘धन का निधि’ शुरू किया। इसमें 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। यही नहीं एक वक्त वह भी था जब स्टार्ट-अप सिर्फ डिजिटल और टेक इनोवेशन के लिए बना था। अब हालात बदल चुके हैं और कई कृषि, सामाजिक क्षेत्र, मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में स्टार्ट-अप आ गए हैं।

मोदी सरकार के प्रयासों से गांवों तक फैला स्टार्ट-अप
मोदी सरकार ने स्टार्ट-अप के क्षेत्रों को जहां विस्तार दिया, वहीं इसका दायरा भी बढ़ाया। स्टार्ट-अप अब केवल बड़े शहरों में नहीं हैं। छोटे शहर और गांव वाइब्रेंट स्टार्ट-अप केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। गौरतलब है कि पहले ज्यादातर स्टार्ट अप टायर-1 सिटी में केंद्रित रहते थे, लेकिन अब यह टायर-2 टायर-3 जैसे शहरों में ले में शुरू हो गए हैं। स्टार्ट-अप कार्यक्रम के तहत 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 419 जिलों में स्टार्टअप्स फाइल हुए हैं। इनमें से 44 प्रतिशत स्टार्ट-अप टायर-2 और टायर-3 सिटीज में हैं। लगभग आधे स्टार्ट-अप मध्यम शहरों और गांवों में विकसित हो रहे हैं।

इंडिया-इजरायल इनोवेशन चैलेंज से स्टार्ट-अप को मिल रही नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से ही पिछले साल इजरायल से मिलकर इंडिया-इजरायल इनोवेशन चैलेंज शुरू किया था। इससे भारत और इजरायल में स्टार्ट-अप इको-सिस्टम के बीच प्रौद्योगिकी और बेस्ट प्रैक्टिसेज के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल रहा है। दरअसल यह मंच ‘कॉम्पिटिशन से क्रिएटिविटी’ को निखारने की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन का काम कर रहा है। इसी के तह एग्रीकल्चर सेक्टर में बदलाव लाने के लिए एग्रीकल्चर ग्रांड चैलेंज भी शुरू किया गया है। अटल न्यू इंडिया चैलेंज जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसमें जीतने वाले को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

68 हजार से ढाई लाख तक पहुंचा ट्रेड मार्क रजिस्ट्रेशन
स्टार्ट-अप इंडिया के शुरू होने के बाद ट्रेड मार्क रजिस्ट्रेशन में भी वृद्धि हुई है। 2013-14 में लगभग 68,000 ट्रेड मार्क रजिस्टर होते थे, लेकिन महज चार साल में ही अब ये आंकड़ा ढाई लाख से भी ऊपर पहुंच गया। पेटेंट रजिस्ट्रेशन में भी जबरदस्त तेजी आई है। पहले चार हजार के करीब पेटेंट रजिस्टर होते थे और अब 11, 500 पेटेंट रजिस्टर हुए हैं।  पीएम मोदी की पहल पर ही सहायकों की एक टीम बनाई है जो स्टार्ट-अप के लिए एंटरप्रेन्योर्स को कानूनी मदद भी मुहैया करवा रही है।

छात्रों के हित के लिए कुछ अन्य निर्णय भी लिए गए हैं, आइए देखते है ये कौन से निर्णय हैं-

रेलवे में आयु सीमा बढ़ाई गई
भारतीय रेलवे ने फरवरी महीने में 90 हजार पदों के लिए रिक्तियां निकाली थीं। आयु सीमा को लेकर छात्रों ने अपनी शिकायत की। मोदी सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उम्मीदवारों की मांगें मान ली और आयु सीमा बढ़ाने का फैसला लिया। ग्रुप डी के अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 2 साल बढ़ाकर 28 से 30 वर्ष कर दिया। लेवल 1 पोस्ट के लिए आयु सीमा बढ़ाकर 31 से 33 कर दी गई।

रेलवे में ITI की अनिवार्यता खत्म
फरवरी, 2018 में रेलवे ने लेवल एक के 62,907 पदों के लिए न्यूनतम योग्यता कक्षा 10 और रेलवे एप्रेंटिसशिप या समकक्ष का आईटीआई प्रमाणपत्र का मानक रखा था, लेकिन छात्रों की शिकायतों के बाद तकनीकी प्रमाणन को वैकल्पिक बना दिया गया। मोदी सरकार की संवेदशीलता को मंत्री पीयूष गोयल के इस बयान से समझा जा सकता है, उन्होंने कहा- ”हमें एहसास हुआ कि हमने उम्मीदवारों को पर्याप्त समय नहीं दिया है कि वे समझ सकें कि मानदंड बदल गया है, ऐसे में हमें कक्षा दसवीं की योग्यता की जरूरत है। हमें प्रशिक्षण कार्यक्रम को मजबूत करना है जिसे हमारी आगे मजबूत करने की योजना है। ऐसे में कोई समस्या नहीं होगी।”

SELF ATTESTED कीजिए प्रमाण पत्र
प्रधानमंत्री को देश के लोगों पर पूरा भरोसा है, उनकी ईमानदारी पर विश्वास है। तभी तो उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में किसी अधिकारी से सर्टिफिकेट प्रमाणित करवाने की बाध्यता खत्म कर दी। जुलाई, 2014 के बाद से ही उम्मीदवार स्वयं सत्यापित कर सकता है और सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के वक्त ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट दिखाता है।

तृतीय और चतुर्थ वर्ग में इंटरव्यू खत्म
वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने तीसरे और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों से इंटरव्यू खत्म करवा दिया। पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में समूह तीन और चार के तहत आने वाली नौकरियों के लिए साक्षात्कार को खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया था, जिनमें व्यक्तित्व परीक्षण आवश्यक नहीं हो। अब तक 18 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने समूह ग और घ वर्ग में साक्षात्कार का प्रावधान खत्म कर दिया है।

छात्रों के बैंक खाते में छात्रवृति की रकम
छात्रों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति जमा करने के लिए मंत्रालय ने 2015-16 से राष्‍ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के जरिए प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) का इस्‍तेमाल शुरू कर दिया है। इस कदम से धनराशि के अंतरण की प्रक्रिया छोटी हो गई है और भुगतान के विलम्‍ब में कमी आई है।

मेडिकल शिक्षा को बड़ा प्रोत्‍साहन
शैक्षिक सत्र 2017-18 के लिए विभिन्‍न मेडिकल कॉलेजों और अस्‍पतालों में 4,000 पीजी की सीटें बढ़ा दी गई हैं। सीटों की संख्‍या की दृष्‍टि से यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी है। अब देश में मेडिकल की कुल 35,117 पीजी सीटें उपलब्‍ध हैं। बजट में इसे बढ़ाकर कुल 5000 पीजी मेडिकल सीटें करने का लक्ष्‍य रखा गया है, जिसके शीघ्र ही पूरा हो जाने की संभावना है। वर्ष 2021 तक सरकार एमबीबीएस की सीटें 80 हजार और स्नातकोत्तर की 45 हजार करने का लक्ष्य हासिल करना चाहती है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET)
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अप्रैल, 2016 और 9 मई, 2016 को संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई के बाद NEET(UG) तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया था। इसके लिए अध्यादेश लाया गया और CBSE ने 2016 में इस परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन करा लिया।

दस नए IIT-IIM
केंद्र सरकार ने 2014 में ही जम्मू, छत्तीसगढ़, गोवा, आंध्र प्रदेश और केरल में पांच नए IIT खोलने का फैसला किया था। इसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र में पांच नए IIM खोले जा रहे हैं। सरकार एमपी में जयप्रकाश नारायण नैशनल सेंटर फॉर एक्सिलेंस इन ह्यूमनिटीज भी स्थापित करेगी। इन सबके लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

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