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यूरोप से लौटते ही अंग्रेजी में निकली राहुल की जन वेदना, उड़ाया देश का मजाक

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लगता है 15 दिन की छुट्टी बिताने के बाद राहुल गांधी पर यूरोप की संस्कृति का बहुत बुरा असर हुआ है। आते ही उन्होंने दिल्ली में जो भाषण दिया उससे हर कोई सन्न है। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में उन्होंने आज सचमुच में भूकंप ला दिया। प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते-करते राहुल गांधी ने अपने देश का ही अपमान करना शुरू कर दिया। राजनीति में नेताओं का आपस में हमला तो जायज है, लेकिन क्या इस बहाने देश की आम जनता, धर्म गुरुओं, योग, प्रधानमंत्री के पद का और पूरे देश का मजाक उड़ाना जायज है। आइये राहुल गांधी के इस नफरत भरे भाषण का पोस्टमॉर्टम करते हैं।

1. राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में जिन मुद्दों का मजाक उड़ाया, वो थे – स्वच्छ भारत अभियान, योग, मन की बात और ऐसे दूसरे कार्यक्रम जिन्हें समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू किया है। ‘मेक इन इंडिया’ का मजाक वो बैंगलोर में भी अपने भाषण में उड़ा चुके हैं। इस पर वहां मौजूद कॉलेज की छात्राओं ने आपत्ति भी जाहिर की थी।

2. जिस नोटबंदी को पूरा विश्व फॉलो करने की कोशिश कर रहा है। दुनिया भर में मोदी के जिस कदम का डंका बज रहा है, उस नोटबंदी की राहुल गांधी ने जमकर निंदा की। नीति तक आलोचना तो ठीक थी, लेकिन नीयत पर सवाल उठाना और प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाना क्या जायज है?

3. अपने भाषण में योग ही नहीं, राहुल गांधी ने योग गुरु बाबा रामदेव का भी मजाक उड़ाया। बार-बार नाम भूलने का नाटक करते रहे और बोलते रहे कि ये कोई इकोनॉमिस्ट है… तभी कोई कांग्रेसी उन्हें रामदेव नाम बताता है, तो राहुल गांधी बाबा रामदेव का नाम लेते हैं। वैसे राहुल गांधी को पता होना चाहिए जब बाबा रामदेव आंदोलन शुरू करने दिल्ली पहुंचे थे तो इन्हीं की सरकार के चार मंत्री उन्हें लेने एयरपोर्ट गए थे। क्या राहुल को नाम भूलने की नौटंकी करने से पहले ये याद नहीं रहा?

4. राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर मीडिया को लेकर हमला किया। साथ ही आरोप लगाया कि अब मीडिया वाले खुलकर नहीं बोल पाते। सवाल ये है कि क्या उनकी दादी इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान मीडिया को बहुत आजादी दे दी थी।

5. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस समय देश की आर्थिक हालत बदतर है। जानकारी के लिए वैसे तो राहुल गांधी को पता होना चाहिए कि इस समय दुनिया के सबसे तेज विकास की दौड़ में भारत ऊपरी पायदान पर है। निवेश के लिहाज से तो नंबर वन पर है। लेकिन राहुल गांधी को यह याद दिलाना जरूरी है कि सोने की चिड़िया कही जाने वाली भारत मां की आर्थिक अस्मिता को उस समय ठेस पहुंची जब 1991 में कांग्रेसी शासन के दौरान भारत का सोना विश्व बैंक के पास गिरवी रखना पड़ा था।

6. राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर संस्थाओं को ध्वस्त करने का आरोप लगाया। लेकिन क्या वो भूल गए जब खुद मनमोहन सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को प्रेस कॉन्फ्रेंस में फाड़ दिया था। उस दिन राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के लाइव कवरेज के सामने मनमोहन सरकार के फैसले को ही नहीं फाड़ा था, बल्कि संविधान की आत्मा को भी जार-जार किया था। ये सीख भी इन्हें इनके पिता राजीव गांधी से ही मिली। गौरतलब है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही राजीव गांधी ने अपने विदेश सचिव को बर्खास्त कर दिया था। यही नहीं संवैधानिक संस्थाओं को उस समय भी ध्वस्त किया जाता रहा, जब इनकी दादी इंदिरा गांधी ने दर्जन भर से ज्यादा राज्यों के निर्वाचित सरकारों को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया था।

7. राहुल गांधी ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का इससे पहले इतना बड़ा मजाक किसी ने नहीं उड़ाया। क्या वो भूल गए कि खुद उनके पिता राजीव गांधी ने ही रिजर्व बैंक के गवर्नर मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए जोकर बना दिया था।
राहुल गांधी की ये बातें न सिर्फ उनकी हताशा का प्रदर्शन करती हैं, बल्कि ये भी दिखाती हैं कि आज कांग्रेस किस तरीके से लीडरशिप की कमी से जूझ रही है। सवा सौ साल पुरानी पार्टी को अगर खत्म करने का किसी ने बीड़ा उठाया है तो वो खुद राहुल गांधी हैं। देश का लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सरकार को चुनौती देने वाला विपक्ष मजबूत दावे और तर्क के साथ सामने आए। लेकिन जिस तरीके से राहुल गांधी ने मुट्ठी भर कांग्रेसियों के बीच ठहाका लगाते हुए सड़कछाप बातें की, उससे राहुल गांधी और कांग्रेस का कम बल्कि देश का ज्यादा नुकसान हुआ है।

हरीश चन्द्र बर्णवाल 

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